महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट मामले में लंबे इंतजार के बाद एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने गुरुवार (31 जुलाई) को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, समीर कुलकर्णी, रमेश उपाध्याय समेत सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया। मालेगांव ब्लास्ट मामले में अदालत के फैसले के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आतंकवाद भगवा न कभी था, ना है, ना कभी रहेगा।”
एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद शिवसेना (एकनाथ) सांसद श्रीकांत शिंदे ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। श्रीकांत शिंदे ने मीडियाकर्मियों से कहा, “पी. चिदंबरम, जिन्होंने भगवा आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया था, उन्होंने कुछ समय पहले यह भी कहा था कि पहलगाम हमले के पीछे जो हमलावर थे, क्या सबूत है कि वे पाकिस्तान से ही आए थे? क्या वे (पी.चिदंबरम) भारतीय लोगों को ही आतंकवादी कह रहे थे? कांग्रेस को ये सवाल उनसे पूछना चाहिए। आतंकवाद को खत्म ना कर पाने की अपनी नाकामी को छिपाने के लिए उन्होंने भगवा आतंकवाद जैसे नैरेटिव को गढ़ने की कोशिश की थी। आज सच लोगों के सामने आया है।”
वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सांसद अनिल देसाई ने एनआईए कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने पर कहा, “यह दूसरा मामला है, जिसमें आरोपियों को बरी किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि अभियोजन पक्ष क्या कर रहा है? उनकी जांच क्या थी और क्या उन्होंने सबूत इकट्ठा किए? क्या उन्होंने अपनी दलीलें उस तरह पेश कीं, जिस तरह से उन्हें पेश किया जाना चाहिए था? पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया, जो निर्दोष मारे गए उनके परिवार वाले क्या सोंचेगे।”
बता दें कि अदालत ने अपने फैसले में उन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके आधार पर 2008 में महाराष्ट्र एटीएस ने आरोपियों के खिलाफ मकोका लगाया था। अपने फैसले में जस्टिस लाहोटी ने कहा, ”आतंक का कोई धर्म नहीं होता। कोई धर्म हिंसा का समर्थन नहीं करता है।” इस अहम टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे राजनीतिक शब्द गढ़ने वालों को भी करारा जवाब दे दिया।
















