देश की न्यायपालिका से जुड़ा एक बेहद अहम मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने नकदी बरामदगी से संबंधित आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की है।
याचिका में छिपाई गई जस्टिस वर्मा ने पहचान
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस याचिका में जस्टिस वर्मा की पहचान छिपाई गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में उनके नाम की जगह “XXX” लिखा गया है। आमतौर पर ऐसा केवल उन्हीं मामलों में किया जाता है, जिनमें यौन उत्पीड़न की पीड़ित महिला, नाबालिग या विवाह विवाद से जुड़े नाबालिग बच्चों की पहचान छिपानी हो।
याचिका का शीर्षक और विवरण
यह याचिका “XXX बनाम भारत संघ” के नाम से दाखिल की गई है और यह इस साल की सुप्रीम कोर्ट में दर्ज 699वीं सिविल रिट याचिका है। 17 जुलाई को दाखिल इस याचिका में रजिस्ट्री ने कुछ खामियां बताई थीं, जिन्हें दूर करने के बाद 24 जुलाई को इसे औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया।
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किस बेंच के सामने होगी सुनवाई
जानकारी के मुताबिक, जस्टिस वर्मा की याचिका सोमवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच के सामने सूचीबद्ध की गई है। यह सीरियल नंबर 56 पर है। दिलचस्प बात यह है कि ठीक उसके बाद, यानी नंबर 59 पर, एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्पारा की याचिका भी उसी दिन सुनी जाएगी, जिसमें उन्होंने नकदी बरामदगी, उसे जलाए जाने और बाद में गायब हो जाने के मामले में जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
महाभियोग सिफारिश को चुनौती
याचिका में जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की आठ मई की उस सिफारिश को भी रद्द करने की गुहार लगाई है, जिसमें संसद से उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया था। उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी।
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जांच प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच समिति ने साक्ष्य जुटाने की जिम्मेदारी खुद लेने के बजाय बचाव पक्ष, यानी उन पर ही डाल दी, जिससे उन्हें अपने खिलाफ लगे आरोपों को गलत साबित करने का बोझ उठाना पड़ा।
















