कन्वर्जन कराने वाले छांगुर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को मियां छांगुर के भतीजे सबरोज के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया गया। बुलडोजर चला कर सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। बलरामपुर जनपद के थल गैडास बुजुर्ग थाना क्षेत्र के रेहरा माफी में सबरोज ने सरकारी भूमि पर कब्जा करके घर बनवाया था। इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। कुछ दिन पहले छांगुर के घर पर भी बुलडोजर की कार्रवाई की गई थी।
गिरफ्तारी और एफआईआर : सबरोज, शहाबुद्दीन और राजेश जेल में
बता दें कि कुछ दिन पहले अभियुक्त सबरोज उर्फ इमरान उर्फ बुद्ध (उम्र 42 वर्ष) निवासी पुरवा-फकीरनडीह, ग्राम-रेहरामाफी, पोस्ट- रेहरामाफी, थाना- गैड़ास बुजुर्ग, जनपद बलरामपुर व शहाबुद्दीन (उम्र 36 वर्ष) निवासी पुरवा फकीरनडीह, ग्राम रेहरामाफी, थाना- गैड़ास बुजुर्ग को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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छांगुर मामले में अभियुक्त राजेश उपाध्याय को भी गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021, थाना-एटीएस, लखनऊ का वांछित अभियुक्त राजेश कुमार उपाध्याय निवासी चिनहट, लखनऊ को गिरफ्तार किया गया था।
छांगुर और नसरीन की गिरफ्तारी : करोड़ों की विदेशी फंडिंग का खुलासा
गत 5 जुलाई को कन्वर्जन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी एटीएस ने 50 हज़ार रुपए के इनामी जमालुद्दीन उर्फ मियां छांगुर और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया था।
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नीतू कन्वर्जन करके नसरीन बन गई है। इस मामले में छांगुर गैंग के पास 100 करोड़ की फंडिंग की गई है। यह फंडिंग कई वर्षों से की जा रही थी।
दुबई यात्राएं और छांगुर की रहन-सहन में बदलाव
गैंग के सदस्य दुबई आदि देशों में जाकर विदेश यात्रा करते थे। कुछ लोगों को दुबई में ले जाकर कन्वर्जन भी कराते थे। बलरामपुर जनपद में छांगुर के बारे में लोग बताते हैं कि कुछ वर्षों पहले तक यह भिक्षाटन करके अपना गुजारा करता था। अचानक से इसकी जीवन शैली में बदलाव आया और महंगी गाड़ियां एवं ऐशो-आराम की सारी सुविधाएं इसने जुटा ली।
छांगुर के गैंग में शामिल हुए नवीन और नीतू
छांगुर के संपर्क में सबसे पहले नवीन और नीतू आए थे। इसने उन लोगों का कन्वर्जन कराया। नीतू को नसरीन और नवीन को जमालुद्दीन बना दिया और उसकी एक नाबालिग बच्ची को भी कन्वर्ट कराकर अपने भतीजे से उसका निकाह करा दिया। उसके बाद नीतू और नवीन बाद में छांगुर के गैंग में शामिल हो गए।
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एटीएस की जांच और करोड़ों की बैंकिंग लेन-देन
इस मामले में एसटीएफ ने गोमती नगर थाने में वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले की विवेचना के दौरान पाया गया कि 40 बैंक खातों में करीब 100 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग हुई है। इसके बाद इस मामले की विवेचना एटीएस को दे दी गई थी।
अवैध संपत्तियों की खरीद और दरगाह से जुड़ाव
उल्लेखनीय है कि विदेशी फण्डिंग से एक वर्ष के अन्दर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदे जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। विवेचना में पाया गया कि जमालुददीन उर्फ छांगुर ग्राम मधपुर में चांद औलिया दरगाह के बगल में रह रहा था। वो खुद को पीर बाबा व सूफी बासफा हजरत बाबा जलालुद्दीन कहता है। उसने शिजर-ए-तैय्यबा नाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित करवाई है।
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ब्रेनवॉश, कन्वर्जन और प्रलोभन का खुलासा
लोगों को प्रलोभन देकर उसने कन्वर्जन कराया है। लखनऊ निवासी एक पीड़िता को अबू अंसारी ने हिन्दू नाम अमित रखकर प्रेम जाल में फंसाया। उसके बाद छांगुर के पास दरगाह पर ले गया। वहां पर नीतू उर्फ नसरीन, नवीन उर्फ जमालुद्दीन ने पीड़िता का ब्रेनवाश किया। पैसे आदि का प्रलोभन देकर कन्वर्जन करा दिया और उसका नाम अलीना अंसारी नाम रख दिया गया।
कन्वर्जन के रेट और इस्लामिक देशों की यात्राएं
यह भी जानकारी में आया है कि हिन्दू धर्म के ब्राह्मण, सरदार या क्षत्रिय की लड़की को कन्वर्जन करने पर 15 लाख रुपये दिए गए हैं। पिछड़ी जाति की लड़की के लिये 10 से 12 लाख रुपये दिए गए।
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इसके साथ ही अन्य जाति की लड़कियों को 8 से 10 लाख रुपये दिए जाते थे। छांगुर के गिरोह के सदस्य लगभग 40 बार इस्लामिक देशों की यात्रा कर चुके हैं।
















