5 सवाल? आखिर कैसे मौलाना छांगुर हिंदुओं के कन्वर्जन में सफल हुआ- कौन थे मददगार
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5 सवाल? आखिर कैसे मौलाना छांगुर हिंदुओं के कन्वर्जन में सफल हुआ- कौन थे मददगार

Balrampur Hindu Conversion Case: पहला सवाल तो यही उठता है कि मौलाना छांगुर कितने सालों से हिंदुओं के कन्वर्जन में लिप्त था। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी से उसके असली संरक्षकों का पता लगाया जा सकता है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jul 24, 2025, 02:51 pm IST
inविश्लेषण
ग्राफिक- शशि मोहन रावत

ग्राफिक- शशि मोहन रावत

डिजिटल डेस्क, पांचजन्य, नई दिल्ली
मेनस्ट्रीम मीडिया जिसे बाबा छांगुर लिख रहा है, पहली आपत्ति उसी पर होनी चाहिए। छांगुर उर्फ जलालुद्दीन बाबा नहीं है, और न ही हो सकता है। वह खुद को जिंदा पीर बताता था। वह या जिहादी मौलाना है या फिर मुस्लिमों का वो कथित पीर, जिसके मन में हिंदुओं के प्रति नफरत भरी हो। वैसे तो मुस्लिमों में पीर एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक होता है, पर ये कन्वर्जन का जिहादी पीर था। छांगुर, पीर की अपनी इस छवि का फायदा उठाकर हिंदुओं के अवैध कन्वर्जन यानी मतांतरण में जुटा हुआ था। सऊदी अरब से लेकर कई अन्य मुस्लिम देश उसकी मदद कर रहे थे।

बाबा नहीं, कट्टरपंथी जिहादी है छांगुर

बकायदा उसे 500 करोड़ की फंडिंग हुई थी। नेपाल के जरिए 300 करोड़ रुपये आये थे। छांगुर बलरामपुर (Balrampur Conversion Case) के साथ ही यूपी के 9 जिलों में कन्वर्जन का अपना घिनौना खेल खेल रहा था। हिंदुओं के अवैध मतांतरण में उसने अपने सगे-संबंधियों को भी शामिल किया था। जांच एजेंसियां अब उसकी पूरी कुंडली खंगाल रही हैं। लेकिन इस बीच सवाल यह भी उठता है कि कैसे छांगुर उर्फ जलालुद्दीन का अवैध कन्वर्जन का यह पूरा कारोबार फला-फूला?

इसे भी पढ़ें- कभी भीख मांगता था हिंदुओं को मुस्लिम बनाने वाला ‘मौलाना छांगुर’

#पहला सवाल: छांगुर कितने सालों से कन्वर्जन में लिप्त था?
पहला सवाल तो यही उठता है कि मौलाना छांगुर (Maulana Changur) कितने सालों से हिंदुओं के कन्वर्जन में लिप्त था। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी से उसके असली संरक्षकों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया था कि छांगुर पिछले 15 सालों से कन्वर्जन में लिप्त था। लेकिन अगर वह 15 सालों से हिंदुओं के कन्वर्जन में लगा हुआ था तो जांच एजेंसियों की रडार पर क्यों नहीं आया?

कौन थे छांगुर के मददगार जो अब भी जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर हैं

#दूसरा सवाल: क्या छांगुर को किसी राजनीतिक पार्टी का संरक्षण मिला हुआ था।
सवाल तो यह भी उठता है कि क्या छांगुर को हिंदुओं के अवैध कन्वर्जन (Agra Hindu Conversion Case) में किसी राजनीतिक पार्टी का संरक्षण मिला हुआ था। क्योंकि जांच एजेंसियों के हवाले से पहले ही यह बात कही गई है कि छांगुर ने कन्वर्जन से कमाया पैसा कई नेताओं के चुनाव खर्च में भी लगाया था। उसने 2022 के विधानसभा चुनाव में कई प्रत्याशियों को फंडिंग की थी। अब सवाल उठता है कि क्या इन प्रत्याशियों ने उसके कन्वर्जन के इस खेल में सहयोग किया था।

इसे भी पढ़ें-मौलाना छांगुर की ‘लाल डायरी’ से बेनकाब होंगे कई नेता-अफसर, चुनाव में की थी फंडिंग

 

ग्राफिक- शशि मोहन रावत
क्या छांगुर को किसी राजनीतिक दल का संरक्षण मिला हुआ था?

#तीसरा सवाल: भारत या विदेशों की कौन-सी संस्थाएं छांगुर की मदद कर रही थीं
यह सवाल भी अहम है कि भारत या फिर विदेशों की वो कौन सी संस्थाएं थी जो हिंदुओं के अवैध कन्वर्जन में मौलाना छांगुर की मदद कर रही थीं। ये संस्थाएं भारत में अवैध कन्वर्जन के लिए किस तरह से जमीन तैयार कर रही थीं और छांगुर के अलावा और कौन-कौन लोग इनके साथ मिले हुए थे। क्योंकि मौलाना छांगुर देश में हिंदुओं के कन्वर्जन का अकेला सरगना नहीं है। इस पूरे तंत्र के तार मुस्लिम कट्टरपंथी जाकिर नाईक से भी जुड़ रहे हैं।

इसे भी पढ़ें-बलरामपुर ही क्यों कन्वर्जन का ‘अड्डा’? 3 कस्बे मुस्लिम बहुल; हिंदू आबादी कम 

कौन-सी मुस्लिम संस्थाएं छांगुर को पहुंचा रही थी मदद?

#चौथा सवाल: कौन थी वे 1500 युवतियां जिनको छांगुर ने मुस्लिम बनाया
जांच एजेंसियों को अभी यह पता लगाना है कि वो 1500 युवतियां कौन थी जिन्हें छांगुर ने कन्वर्ट किया था। साथ ही उन 1000 मुस्लीम युवकों की फौज के बारे में भी पता लगाना है जिन्हें छांगुर पैसे देकर हिंदू युवतियों को प्रेमजाल में फंसाने और कन्वर्जन कराने के लिए तैयार किया था।

इसे भी पढ़ें-मौलाना छांगुर के 3 हजार अनुयायी कौन? शुरू हुई जांच, 9 राज्यों में था कन्वर्जन नेटवर्क 

#पांचवां सवाल: शासन-प्रशासन में कौन थे छांगुर के मददगार

शासन और प्रशासन में वो कौन थे जो पैसे लेकर छांगुर के कन्वर्जन गिरोह को अपना संरक्षण दे रहे थे। ऐसे ही एक क्राइम ब्रांच प्रभारी हेड इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान सिद्दीकी को सस्पेंड किया गया है। छांगुर से उसके कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी एक बाबू गिरफ्तार हुआ था। जांच एजेंसियों को छांगुर के मददगार सभी लोगों की तह तक पहुंचना है और उनका पर्दाफाश करना है।

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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