देश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जब से जंतर-मंतर में NEET-UG को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, तभी से ये कहा जा रहा था कि ये प्रदर्शन आम नहीं है। इसमें कई तरह के असामाजिक तत्व शामिल थे। इसी क्रम में अब भारत का विरोध करने वाली कथित पर्यावरणविद कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारतीय छात्रों के आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता जताई है। उसने कहा कि इन छात्रों ने हमें सबको गर्व महसूस कराया और उम्मीद दी है। यह बात उन्होंने लंदन में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) यानि वामपंथियों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
ग्रेटा थनबर्ग का बयान
रविवार को लंदन में SFI के इस कार्यक्रम में ग्रेटा थनबर्ग ने NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे CJP के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन का समर्थन किया। उसने कहा, “भारतीय छात्रों का आंदोलन हमें सबको गर्व महसूस कराता है। उन्होंने हमें उम्मीद दी है। यह दिखाता है कि जब लोग साथ आकर विरोध करते हैं तो क्या हासिल किया जा सकता है। यह लोगों की ताकत का सही मतलब दिखाता है।”
ग्रेटा ने आगे कहा कि भारतीय छात्रों का न्याय के लिए संघर्ष, लोकतंत्र और आजादी की व्यापक लड़ाई हम सबकी लड़ाई भी है। इसलिए हमें भारत के साथ एकजुटता में खड़े होना चाहिए और साथ उठना चाहिए। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन की जरूरत वाली बात बताया।
SFI-UK’s victory gathering is in full swing at Trafalgar Square! We send our salutes to @GretaThunberg, who showed up in solidarity with the Indian student movement at the London protest today. The student movement has given global activists hope about the power of the people ✊ pic.twitter.com/nvtsYqEI2R
— Students' Federation of India – United Kingdom (@sfi_uk) July 26, 2026
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SFI UK का कार्यक्रम और बयान
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) UK ने इस सप्ताहांत कार्यक्रम को आंदोलन की जीत का जश्न बताया। SFI UK ने एक बयान में कहा कि वे छात्र आंदोलन के संघर्ष को सलाम करते हैं। इस आंदोलन की वजह से शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, जो एक बड़ी सफलता है।
SFI UK ने कहा कि लड़ाई बहुत प्रेरणादायक और साहसी रही, लेकिन यह अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वे 21 छात्रों की मौत पर दुख व्यक्त करते हैं, जो NEET के हैंडलिंग की वजह से हुई। साथ ही प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की।
क्या है आंदोलन की पृष्ठभूमि
CJP के नेतृत्व में 36 दिन चला यह आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था। 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई के बाद यह और तेज हो गया। कई छात्र संगठनों और एक्टिविस्टों ने इसका समर्थन किया, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे। उन्होंने लंबे समय तक भूख हड़ताल भी की।
आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने यूनियन शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। CJP ने शनिवार को 36 दिन के आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की। केंद्र सरकार ने बाकी मांगों पर सहमति जताई थी, जिसमें NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIRs वापस लेना शामिल था।














