दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की पूर्ण बहुमत से वापसी हुई है। कांग्रेस को तो दिल्ली की जनता पहले ही तीन बार मौका देकर देख चुकी थी,इसके बाद लोगों ने नई उभरी आम आदमी पार्टी को तीन बार मौका देकर एक प्रयोग किया। उसकी पहली सरकार महज 49 दिन तक रही, फिर भी जनता ने अरविंद केजरीवाल के वादों और जुमलों पर विश्वास किया और उन्हें दो बार और मौका दिया।
दिल्लीवासियों को लालची समझा जाने लगा था, लेकिन जब मुफ्तखोरी की राजनीति, झूठे वादे और दिखावटी ईमानदारी की हकीकत सामने आई, तो लोगों का भराेसा आआपा से उठ गया। जनता को वास्तविकता पता चली तो उसने वोट से अपना जवाब दिया। सत्ता पलट दी। आआपा को सत्ता से बाहर कर इस बार भाजपा को माैका दिया। भाजपा सरकार के पहले 100 दिन पूरे होने पर पाञ्चजन्य ने जमीन पर जाकर पड़ताल की। जनता से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक हर स्तर पर संवाद किया और जाना कि दिल्ली एक स्थिर, जवाबदेह और विकासोन्मुख सरकार चाहती है।

स्वास्थ्य: सेवा गुणवत्ता का पुनर्गठन
पहले की स्थिति : मोहल्ला क्लीनिकों को आआपा सरकार ने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। कैग रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिकों में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट 2016-17 और 2021-22 के दौरान दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की समीक्षा पर आधारित थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि क्लीनिकों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति नहीं थी, दवाओं की आपूर्ति में अनियमितता पाई गई और गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं किया जा सकता था। 65 प्रतिशत से अधिक क्लीनिकों में मरीजों के इलाज का कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जारी कोविड-19 फंड का पूर्ण उपयोग नहीं किया। कुल 787.91 करोड़ रुपए में से केवल 582.84 करोड़ रुपए का ही उपयोग किया गया, जिससे महामारी के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में कमी रही।
वर्तमान स्थिति : नई सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल आधार दिया है। डॉक्टरों की उपस्थिति अब समय से रहती है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना दिल्ली में लागू की है। इस योजना के तहत लगभग 36 लाख दिल्लीवासियों को लाभ मिलेगा। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लाई गई है।
शिक्षा: पहले थे सिर्फ दावे, अब हकीकत
पहले की स्थिति : 2022 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने दिल्ली के सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा को उजागर किया था। रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूल भवन जर्जर अवस्था में थे। 20 हजार नए कक्ष बनाने का जो दावा केजरीवाल सरकार करती थी वह भी झूठा निकला। शिक्षकों के पद भी रिक्त पड़े थे। स्कूल निर्माण परियोजनाओं में लागत से कई गुना खर्च किया गया, फिर भी काम समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा नहीं हुआ।
वर्तमान स्थिति : भाजपा सरकार ने कार्यभार संभालते ही शिक्षा के क्षेत्र में काम शुरू कर दिया है। संसाधनों की उपलब्धता और शिक्षक पदों की भर्ती की भी निगरानी की जा रही रही है। शिक्षा के लिए बजट का पारदर्शी आवंटन सुनिश्चित किया गया है। पहली बार ‘स्कूल फीस रेग्युलेशन बिल’ को मंत्रिमंडल से मंजूरी दी गई, ताकि प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से फीस न बढ़ा सकें। आईटीआई और पॉलिटेक्निक में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को हर माह 1000 रुपए दिए जाएंगे। 125 स्कूल लाइब्रेरी डिजिटल होंगी। सौ दिन में 1,63,000 बच्चों को नीट, जेईई की मुफ्त कोचिंग दी गई है। आगे भी कोचिंग लगातार जारी रही।
जल प्रबंधन: घोषणाओं से पारदर्शी वितरण की ओर
पहले की स्थिति : आआपा सरकार के समय में दिल्ली जलबोर्ड में बड़ा घोटाला हुआ। टैंकर आवंटन और बिलिंग में करोड़ों रुपए के घपले सामने आए। ईडी ने इस मामले में आआपा के समय में दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा और उनकी पत्नी अलका अरोड़ा, इंटीग्रल स्क्रू इंडस्ट्रीज के मालिक अनिल कुमार अग्रवाल की 8.80 करोड़ रुपए की कुल कीमत वाली विभिन्न अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच अभी भी जारी है।
वर्तमान स्थिति : दिल्ली जल बोर्ड में एक विशेष ऑडिट प्रकोष्ठ की स्थापना की है। केंद्र सरकार ने अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) योजना के तहत दिल्ली जल बोर्ड के लिए 800 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके तहत झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। अमृत योजना के अंतर्गत झुग्गी-झोपड़ियों वाले क्षेत्रों में लगभग 13,000 नए सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। टैंकर माफिया प्रहार करने के लिए 1167 जीपीएस युक्त टैंकर दिल्ली में चलाए गए हैं।

सार्वजनिक परिवहन: इलेक्ट्रिक बसों से हरित कदम
पहले की स्थिति : कैग रिपोर्ट से खुलासा हुआ था कि पिछली आआपा सरकार ने परिवहन व्यवस्था का भी बेड़ा गर्क कर दिया था। रिपोर्ट में बताया गया कि 2015-16 में डीटीसी का 28,263 करोड़ रुपए का घाटा 2021-22 में बढ़कर 65,274 करोड़ रुपए हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच डीटीसी के बेड़े में बसों की संख्या बढ़ने की जगह कम हो गईं। डीटीसी के पास 2015 में 4,344 बसें थीं जो 2023 में घटकर 3,937 रह गईं। सरकार से धन उपलब्ध होने के बावजूद यह 2021-22 और 2022-23 के दौरान केवल 300 इलेक्ट्रिक बसें ही खरीदी गईं।
वर्तमान स्थिति : भाजपा सरकार ने पहले 100 दिनों में दिल्ली में परिवहन व्यवस्था को और सुलभ बनाने के लिए 460 नई इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल इंटरकनेक्टर (देवी) ई-बस सेवा के तहत शुरू कीं। ये छोटी, नौ मीटर की बसें दूरदराज के क्षेत्रों के शुरू की गई हैं। वर्ष के अंत तक 2080 इलेक्ट्रिक बसें और चलाई जाएंगी। सरकार ने दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर महिलाओं की सुरक्षा के लिए नए रात्रि बसों और गश्ती इकाइयों की शुरुआत भी है।
वित्तीय अनुशासन: विज्ञापन से जनहित की ओर
पहले की स्थिति : केजरीवाल सरकार ने सरकारी विज्ञापनों पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जिसके चलते बहुत सारी योजनाएं अधूरी रह गई। योजनाओं से ज्यादा खर्च उनके प्रचार पर किया गया। उदाहरण के लिए कैग रिपोर्ट में बताया गया कि आआपा सरकार की बिजनेस ब्लास्टर्स योजना के तहत 54.08 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जबकि इसके प्रचार पर 80 करोड़ रुपए खर्च किए गए। पराली प्रबंधन के लिए योजना के लिए 77 लाख रुपए आवंटित किए गए, जबकि इसके प्रचार के लिए 27.89 करोड़ रुपए खर्च किए गए। आआपा ने दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए जो स्मॉग टावर लगाए थे, उसके लिए 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए, उसके विज्ञापन पर 5 करोड़ रुपए खर्च किए। जो स्मॉग टावर लगाए थे वे भी फेल हो गए।
वर्तमान स्थिति : भाजपा सरकार ने प्रत्येक योजना की पूर्व जांच और तिमाही प्रगति रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। दिल्ली बजट में अब योजनागत खर्च का 60 प्रतिशत सीधे जनहित कार्यों पर केंद्रित किया गया है।
नगर निगम : जवाबदेही और स्वच्छता के नए मापदंड
पहले की स्थिति : आआपा के समय दिल्ली के नगर निगमों में कूड़ा प्रबंधन एक विकराल समस्या बनी रही। नगर निगम में भाजपा के होने के चलते दिल्ली सरकार द्वारा सफाई के लिए फंड ही जारी नहीं किया जाता था। दो साल पहले दिल्ली में आई बाढ़ ने दिल्ली सरकार दावों की पोल खोल दी थी। नालों की समय पर सफाई नहीं होती थी। हमेशा किसी न किसी मामले को तूल देकर सिर्फ और सिर्फ राजनीति की जाती थी। दिल्ली का बुरा हाल था।
वर्तमान स्थिति : भाजपा सरकार ने यमुना को साफ करने के लिए 40 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को मंजूरी दी है। सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई शुरू की है। एक दशक बाद 16 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद (सिल्ट) हटाई गई। ओखला में 124 एमजीडी के नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को जल्दी ही शुरू किया जाएगा। इसके अलावा सफाई के लिए नगर निगम को सीधे फंड देने की शुरुआत की है।
प्रदूषण नियंत्रण: घोषणाओं से धरातल पर क्रियान्वयन
पहले की स्थिति : आआपा सरकार लगातार प्रदूषण कम किए जाने का दावा करती थी। उसके स्मॉग टावर फेल हो गए। सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए छिड़काव जैसे काम भी नहीं सिर्फ कागजों पर हुए। करोड़ों खर्च होने के बाद भी प्रदूषण स्तर में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ लगातार बढ़ते गए।
वर्तमान स्थिति : सरकार ने लैंडफिल वाले स्थानों पर चौबीसों घंटे कूड़ा निस्तारण जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके अलावा हर दिन 30,000 मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग की जा रही है। 70 लाख पेड़ लगाने का निर्णय भी लिया गया है। इसके अलावा दीवारों से पोस्टर हटाने, सरकारी इमारतों में विशेष स्वच्छता अभियान और दिल्ली के 312 बजारों में रात को सफाई कराने की मुहिम शुरू की गई है ताकि लोगों को परेशानी न हो। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए साल भर 1000 स्प्रिंकलर और स्मॉग गन तैनात की गई हैं। 70 आधुनिक मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीनों को मंजूरी दी गई है।

प्रशासनिक संवाद: टकराव से सहयोग की ओर
पहले की स्थिति : पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति करते रहे। उनके कार्यकाल में उनके और उपराज्यपाल के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही। कई बार योजनाएं केवल इसलिए रुकीं, क्योंकि सहमति नहीं बन पाई। प्रशासनिक संवाद की कमी से जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वह लड़ाई में इतने उलझे रहे कि दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों की लड़ाई को सर्वोच्च न्यायालय तक ले गए।
वर्तमान स्थिति : भाजपा के सरकार बनाए जाने के बाद ऐसी कोई भी स्थिति नहीं है। उपराज्यपाल से भी कोई टकराव वाली बात नहीं है। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच नियमित बैठकें और नीति समन्वय स्थापित किया गया है। आज मिल-जुलकर काम हो रहा है।
महिला सशक्तिकरण: दावे और हकीकत
पहले की स्थिति : आआपा सरकार ने महिला सशक्तिकरण और दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के सिर्फ दावे किए गए। आआपा के पिछले दोनों कार्यकालों में एक भी महिला को मंत्रिमंडिल में नहीं रखा गया था। जब केजरीवाल जेल गए तो उन्होंने आतिशी मार्लेना को मुखौटा मुख्यमंत्री बनाया था। महिलाओं को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही थी। उनके खुद के घर में केजरीवाल के निजी सचिव विभव ने आआपा की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट तक कर दी थी।
वर्तमान स्थिति : भाजपा सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए महिला समृद्धि योजना लागू की। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के लिए 5,100 करोड़ रुपए बजट आवंटित किया गया है और अनुमान है कि इससे लगभग 17 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी। एक पोर्टल बनाया गया है जहां पर जाकर पात्र महिलाएं पंजीकरण कर सकेंगी। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत 21,000 रुपए की आर्थिक सहायता और छह पोषण किट प्रदान करने की घोषणा की गई। यह योजना महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आशा और विश्वास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने 100 दिन में कई ऐसे काम किए हैं जो सिर्फ शुरुआत नहीं, बदलाव की दिशा में ठोस पहल हैं। 31 मई 2025 को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित ‘100 दिन-रिपोर्ट कार्ड’ समारोह में इन उपलब्धियों को साझा किया गया। दिल्ली की प्रशासनिक संरचना में 100 दिन में जो परिवर्तन आया है, वह शासन की संस्कृति के बदलाव का संकेतक है। यह बदलाव सिर्फ सरकार के स्तर पर नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास के पुनर्निर्माण का भी प्रतीक है।


















