इंदौर की तीन वर्षीय बच्ची वियाना जैन ने 21 मार्च को जैन परंपरा अनुसार संथारा के माध्यम से अपने प्राण त्याग दिए। वियाना को ब्रेन ट्यूमर था और लंबे समय से बीमार चल रही थी। वियाना का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है, क्योंकि वह इतनी छोटी उम्र में संथारा लेने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की बच्ची बनी।
संथारा कराने वाले जैन मुनि राजेश मुनि महाराज ने बताया कि जब उन्होंने वियाना को देखा, तो उसकी हालत समझ गए। उसकी आँखें नहीं खुल रही थीं और वह बहुत अस्वस्थ लग रही थी। मुनि महाराज ने उसके माता-पिता पीयूष और वर्षा जैन से इस बारे में विचार करने को कहा।
मुनि महाराज ने बताया, मैं पहले भी 107 संथारा करवा चुका हूँ, इसलिए मैंने उसकी हालत देखकर समझ लिया कि वह ज्यादा समय जीवित नहीं रह पाएगी। उस समय उसके माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी सब मौजूद थे। परिवार ने मिलकर निर्णय लिया कि वियाना को जैन धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार की यह विशेष प्रक्रिया दी जाए।
वियाना पिछले एक साल से पंचखाण और संकल्प जैसी धार्मिक प्रक्रियाओं में भाग ले रही थी। हमें भरोसा था कि वह इन बातों को समझेगी, और उसने सचमुच समझा भी। जब हमने कहा कि उसे भगवान के पास जाना है, तो उसने हाथ जोड़ लिए। जब पचखाण की बात की, तो वह तुरंत उठकर बैठ गई।
इसके बाद उसे उसकी मां की गोद में लिटाया गया। तौलिए से ढका गया और धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया गया। करीब 10 मिनट तक संथारा की प्रक्रिया चली। उसके बाद वियाना को तीन बार हिचकी आई और वह हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ गई। मुनि महाराज ने कहा, “वह बहुत छोटी बच्ची थी। मेरे दिल को भी बहुत दुख हुआ। लेकिन साथ ही एक संतोष भी था कि वह जैन धर्म की परंपरा में शांतिपूर्वक भगवान का नाम लेते हुए विदा हुई।

















