शुक्रवार को जुमा नहीं, होगी महाआरती : धार भोजशाला में 721 साल बाद रचा जाएगा इतिहास, हिन्दू समाज का बड़ा ऐलान
June 30, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

शुक्रवार को जुमा नहीं, होगी महाआरती : धार भोजशाला में 721 साल बाद रचा जाएगा इतिहास, हिन्दू समाज का बड़ा ऐलान

धार भोजशाला में 721 साल बाद इतिहास रचने जा रहा है। 22 मई शुक्रवार को हिंदू समाज मां सरस्वती की भव्य महाआरती करेगा। हाई कोर्ट के फैसले और एएसआई (ASI) की 2200 पन्नों की रिपोर्ट के बाद धार में महासत्याग्रह और महाविजय महोत्सव मनाया गया। पढ़ें विशेष रिपोर्ट

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 19, 2026, 06:35 pm IST
in भारत, धर्म-संस्कृति, मध्य प्रदेश
dhar bhojshala friday maha arati announcement

धार । मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर धार में स्थित मां वाग्देवी के परम पवित्र धाम भोजशाला में इस बार का शुक्रवार (22 मई) एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक गौरव का साक्षी बनने जा रहा है। इंदौर हाई कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के बाद, अब हिंदू समाज आगामी 22 मई को पूरे स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला परिसर में मां सरस्वती का भव्य पूजन-अर्चन और महाआरती करने जा रहा है।

भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने मंगलवार को एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए इसे एक युगांतरकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 721 वर्षों के लंबे और अनवरत संघर्ष के बाद हिंदू समाज को इस रूप में निर्बाध पूजा करने का यह पावन अवसर मिल रहा है।


22 मई का महा-आयोजन: धान मंडी से प्रस्थान करेगी भव्य यात्रा

अशोक जैन ने पत्रकार वार्ता में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया-

  • सामूहिक प्रस्थान: 22 मई शुक्रवार को दोपहर ठीक 12 बजे धान मंडी चौराहे से सकल हिंदू समाज सामूहिक रूप से भव्य यात्रा के रूप में भोजशाला के लिए प्रस्थान करेगा।
  • महाआरती का समय: दोपहर 1 बजे भोजशाला परिसर के भीतर मां वाग्देवी की भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
  • प्रमुख उपस्थिति: इस ऐतिहासिक घोषणा के दौरान भोजशाला आंदोलन से अनवरत जुड़े रहने वाले प्रखर कार्यकर्ता दीपक बिड़कर, सोनू गायकवाड सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और युवा उपस्थित रहे।

अलाउद्दीन खिलजी के दंश से मुक्ति: 1997 के आंदोलन को मिला मुकाम

समिति के संरक्षक ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि राजा भोज द्वारा निर्मित इस पावन विद्या केंद्र और मां सरस्वती मंदिर पर वर्ष 1305 में क्रूर मुगल आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी के समय अवैध कब्जा किया गया था। तब से लेकर आज तक हिंदू समाज अपने इस गौरव को वापस पाने के लिए लगातार संघर्षरत रहा है।

उन्होंने बताया कि अनेक पूज्य संतों, सामाजिक संगठनों और राष्ट्रभक्त आंदोलनकर्ताओं के त्याग और तपस्या के बल पर वर्ष 1997 में जिस निर्णायक आंदोलन की शुरुआत हुई थी, उसे 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के बाद एक महान मुकाम हासिल हुआ है।

न्यायालयीन आदेश के बाद अब पुरातत्व विभाग (ASI) भी शासकीय रूप से इस पूरे परिसर को केवल “भोजशाला” नाम से ही संबोधित कर रहा है। यदि कोई अन्य कानूनी अड़चन नहीं आती है, तो इस शुक्रवार को इतिहास में पहली बार बिना किसी रुकावट के हिंदू समाज वहां महाआरती संपन्न करेगा।


भोजशाला में महासत्याग्रह और महाविजय महोत्सव: गूंजे वैदिक मंत्र

उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद धार की भोजशाला मंगलवार को ही आस्था, संस्कृति और असीम उत्साह के एक विशाल केंद्र में बदल गई थी। पहली बार आयोजित हुए इस ‘महासत्याग्रह’ और ‘महाविजय महोत्सव’ में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे परिसर में “जय मां वाग्देवी”, “जय श्रीराम” के उद्घोष और पवित्र वैदिक मंत्रों की गूंज से दिशाएं गुंजायमान हो उठीं.

महिलाओं और संतों की भारी भागीदारी, हुई भव्य आतिशबाजी

सुबह तय समय पर शुरू हुआ यह सत्याग्रह पहले से कहीं अधिक व्यापक और भव्य स्वरूप में दिखाई दिया। बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा और संत समाज हाथों में भगवा ध्वज लिए भोजशाला पहुंचे।

  • धार्मिक अनुष्ठान और हवन: महासत्याग्रह के समापन के बाद मां वाग्देवी की विशेष पूजा-अर्चना और विधि-विधान से हवन किया गया। श्रद्धालुओं ने परिसर में जल रही ‘अखंड ज्योति’ के दर्शन किए, जिसे लोग सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के रूप में देख रहे हैं।
  • दीपों से जगमगाई भोजशाला: शाम होते ही पूरा परिसर रंग-बिरंगी आतिशबाजी और हजारों दीपों की रोशनी से सराबोर हो उठा। महाराजा भोज स्मृति वसंतोत्सव समिति और सकल हिंदू समाज के नेतृत्व में इस सफल आयोजन ने समाज की सक्रियता और एकजुटता का एक अमिट संदेश दिया है।

अदालत की कसौटी पर सत्य: क्या है ASI की 2,189 पन्नों की रिपोर्ट में?

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट माना था कि “पुरातत्व एक विज्ञान है” और इस विवाद का अंत करने के लिए वैज्ञानिक निष्कर्षों पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है। एएसआई के 98 दिनों के सर्वे और उसकी 2,189 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट ने भोजशाला के मंदिर होने के अकाट्य प्रमाण देश के सामने रखे हैं:

1. नींव में उत्कीर्ण है ‘शारदा सदन’: वैज्ञानिक खुदाई के दौरान वर्तमान ढांचे के ठीक नीचे 10वीं-11वीं शताब्दी की परमारकालीन मजबूत नींव पाई गई है। सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि यहाँ मिले बेसाल्ट पत्थरों पर स्पष्ट अक्षरों में ‘शारदा सदन’ लिखा हुआ है, जो राजा भोज के काल के सुप्रसिद्ध संस्कृत विश्वविद्यालय और सरस्वती मंदिर का ही नाम था।

2. ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ से पहचान मिटाने की क्रूर कोशिश: रिपोर्ट के अनुसार, बाद के कालखंड में मस्जिद का निर्माण करने के लिए प्राचीन हिंदू मंदिर के ही स्तंभों और शिलाखंडों का पुनरुपयोग किया गया। इस दौरान मंदिर के सनातनी प्रतीकों, मूर्तियों और संस्कृत के श्लोकों को जानबूझकर छेनी-हथौड़ी से घिसकर मिटाने (Iconographic Erasure) या पत्थरों को जानबूझकर उल्टा और आड़ा-तिरछा लगाने का प्रयास किया गया ताकि मंदिर की पहचान छिप सके।

1455 ईस्वी का फारसी शिलालेख देता है गवाही: परिसर के भीतर मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (1455 ईस्वी) का एक फारसी शिलालेख मिला है। एएसआई द्वारा किए गए इसके आधिकारिक अनुवाद (खंड 4, पृष्ठ 260) में यह साफ लिखा है कि: “एक पुराने आश्रम (शिक्षण केंद्र/मंदिर) को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह (मस्जिद) में परिवर्तित किया गया।”


भोजशाला की स्थापत्य कला: मंदिर होने के 5 जीवंत प्रमाण

  • स्तंभों की विशिष्ट कला: इस परिसर में कुल 106 मुख्य स्तंभ और 82 अर्धस्तंभ हैं। इन सभी पर कीर्तिमुख (सिंहमुख), नागबंध, चैत्य गवाक्ष और कमल के पत्तों की सुंदर नक्काशी है, जो शुद्ध रूप से मध्यकालीन भारतीय मंदिर शैली की पहचान है।
  • संस्कृत शिलालेखों की बहुलता: सर्वे के दौरान परिसर से 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख मिले हैं, जबकि इसके विपरीत अरबी-फारसी के केवल 56 अभिलेख ही मिले।
  • मूर्तियों के प्रामाणिक साक्ष्य: सर्वे के दौरान परिसर और उसके मलबे से भगवान गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और अर्धनारीश्वर सहित कुल 94 मूर्तियों के अवशेष और वास्तु चिन्ह मिले हैं।
  • सम्राट भोज की कालजयी रचनाएं: यहाँ के विशाल पत्थरों पर स्वयं महाराजा भोज द्वारा रचित ‘अवनीकुर्मास्तन’ और उनके गुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजात मंजरी’ नाटिका के अंश उत्कीर्ण हैं।
  • परमारकालीन सिक्के: खुदाई में 10वीं से 11वीं शताब्दी के इंडो-सासानियन सिक्के भी प्राप्त हुए हैं, जो परमार राजवंश के वैभवशाली शासनकाल की पुष्टि करते हैं।

शिक्षा का वैश्विक केंद्र थी राजा भोज की भोजशाला

परमार-पंवार राजवंश पर 12 वर्षों तक गहन शोध करने वाले और राजा भोज कल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पंवार के अनुसार, भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं थी। यह महाराजा भोज के काल में भारत का एक विख्यात और महान संस्कृत विश्वविद्यालय (महाविद्यालय) था, जहाँ सुदूर क्षेत्रों से छात्र विद्या ग्रहण करने आते थे।

पवित्र पत्थरों पर व्याकरण और शिक्षा से जुड़े नागबंध लेख मिलना इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि यह मां सरस्वती की आराधना के साथ-साथ ज्ञान की साधना का सर्वोच्च केंद्र था। दिनभर चले इस भव्य आयोजन ने आज धर्म और संस्कृति के संरक्षण को लेकर समाज की सक्रियता और एकजुटता का एक अमिट संदेश दिया है।

Topics: ASI सर्वे रिपोर्टमां वाग्देवी मंदिरधार महासत्याग्रहअशोक जैन पत्रकार वार्ताMP Newsराजा भोजधार भोजशाला न्यूजभोजशाला महाआरती 22 मईइंदौर हाई कोर्ट भोजशाला फैसला
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आरोपी सैयद इसाक असरार

जबलपुर में हिंदू नाम से डेंटिस्ट बनकर नौकरी का आरोप, 3 युवतियों को प्रेमजाल में फंसाने की शिकायत

मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म

घर वापसी: उज्जैन में सलमान ने छोड़ा इस्लाम; अपनाया सनातन धर्म, बना शांतनु

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का बदलेगा नाम

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम होगा वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय, कार्यपरिषद ने दी मंजूरी

भोजशाला  : फैसले में छिपे सबक

निर्णय अनूठा, बातें अनोखी

धार भोजशाला का सच : कैसे टूटा मंदिर और लंदन पहुंची सरस्वती मां की प्रतिमा?

Load More

ताज़ा समाचार

वेनेजुएला में फिर 4.6 मैग्नीट्यूड भूकंप का आफ्टरशॉक: मौतों का आंकड़ा 1700 पार

आज का श्लोक : न देवा यष्टिमादाय् रक्षन्ति पशुपालवत्।

आज का राशिफल

30 जून का राशिफल: जानें मेष से मीन तक किस राशि के लिए कैसा रहेगा दिन?

भारत माता और मां सरस्वती को पुष्पार्चन करते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

दुनिया को सही दिशा देना भारत की जिम्मेदारी : डॉ मोहन भागवत

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

बंगाल विधानसभा में नया सख्त कानून पारित, 12 महीने तक बिना मुकदमा निवारक हिरासत का प्रावधान

समान नागरिक संहिता

बंगाल में UCC की तैयारी तेज, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी मसौदा समिति की अगुवाई

जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

देशभर में एंबुलेंस सेवाएं होंगी एक समान, स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए दिशा-निर्देश किए जारी

श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हुई आम आदमी पार्टी की सरकार

बेअदबी कानून का मामला : श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हुई पंजाब सरकार, जत्थेदार ने दिया एक महीने का समय

अयातुल्ला अली खामेनेई (फाइल फोटो)

ईरान: खामेनेई के जनाजे में शामिल होंगे बिहार के राज्यपाल हसनैन, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा

स्वामी दीपांकर

एक संन्यासी का स्वप्न, करोड़ों लोगों का संकल्प: स्वामी दीपांकर की भिक्षा यात्रा, संगठित सनातन की ऐतिहासिक यात्रा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies