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‘स्वयंसेवक के लिए सेवा ही जीवन’

संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी के नाम पर बना ‘माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्ट’ नागपुर में छह एकड़ जमीन पर माधव नेत्रालय बनवा रहा है। इसकी आधारशिला सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत की उपस्थिति में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रखी

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 10, 2025, 08:12 am IST
inभारत, विश्लेषण, संघ @100
माधव नेत्रालय के शिलान्यास समारोह में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और श्री नरेंद्र मोदी के साथ (बाएं से) श्री देवेंद्र फडणवीस, स्वामी अवधेशानंद जी महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि जी , श्री नितिन गडकरी व अन्य

माधव नेत्रालय के शिलान्यास समारोह में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और श्री नरेंद्र मोदी के साथ (बाएं से) श्री देवेंद्र फडणवीस, स्वामी अवधेशानंद जी महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि जी , श्री नितिन गडकरी व अन्य

संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी के नाम पर बना ‘माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्ट’ नागपुर में छह एकड़ जमीन पर माधव नेत्रालय बनवा रहा है। इसकी आधारशिला सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत की उपस्थिति में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रखी

गत 30 मार्च को नागपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने माधव नेत्रालय के ‘प्रीमियम सेंटर’ की आधारशिला रखी। यह माधव नेत्रालय का एक विस्तार है। इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी की स्मृति में की गई है। इस सेंटर में 250 बिस्तर का अस्पताल, 14 बाह्य रोगी विभाग (ओ.पी.डी.) और 14 आधुनिक ऑपरेशन थिएटर होंगे। आधारशिला रखने के बाद श्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने निराशा में डूबे भारतीय समाज को झकझोरा, उसके स्वरूप की याद दिलाई, आत्मविश्वास का संचार किया और राष्ट्रीय चेतना को बुझने नहीं दिया।

गुलामी के अंतिम दशक में डॉक्टर जी और श्रीगुरुजी ने इस चेतना को नई ऊर्जा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय चेतना के जिस विचार का बीज 100 वर्ष पहले बोया गया था, वह आज एक महान वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। सिद्धांत और आदर्श इस वटवृक्ष को ऊंचाई देते हैं, जबकि लाखों-करोड़ों स्वयंसेवक इसकी टहनियों के रूप में कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षय वट है, जो निरंतर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को ऊर्जा प्रदान कर रहा है। स्वयंसेवक के लिए सेवा ही जीवन है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत, जूनापीठाधीश्वर महामंडलेशवर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज, आचार्य महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान के स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस और माधव नेत्रालय के डॉ. अविनाश चंद्र अग्निहोत्री मंच पर विराजमान थे।

श्रीगुरुजी को प्रणाम करते हुए श्री मोहनराव भागवत

इस समारोह के पूर्व श्री मोदी आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी की समाधि पर गए और उन्हें नमन किया। इस दौरान सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत और पूर्व सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी उपस्थित थे। इसके बाद प्रधानमंत्री ने दीक्षाभूमि जाकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि माधव नेत्रालय है तो दृष्टि की बात स्वाभाविक है। जीवन में दृष्टि ही दिशा देती है। वेदों में भी यह कामना की गई है कि हम 100 वर्ष तक देखें। यह दृष्टि केवल बाह्य नहीं, बल्कि अन्तर्दृष्टि भी होनी चाहिए। इसी वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गौरवशाली यात्रा के 100 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर मुझे स्मृति मंदिर जाकर पूज्य डॉक्टर साहब और पूज्य श्रीगुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि लालकिले से मैंने सबके प्रयास की बात कही थी। आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश जिस तरह काम कर रहा है, माधव नेत्रालय उन प्रयासों को और आगे बढ़ा रहा है। देश के सभी नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता है। गरीब से गरीब व्यक्ति को भी बेहतरीन इलाज मिले, कोई भी देशवासी जीवन जी ने की गरिमा से वंचित न रहे। जो बुजुर्ग अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर चुके हैं, उन्हें इलाज की चिंता न सताए, ऐसी परिस्थितियों में उन्हें न जीना पडे, यही सरकार की नीति है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

हजारों जनऔषधि केंद्र देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सस्ती दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। देशभर में सैकड़ों डायलिसिस सेंटर मुफ्त में डायलिसिस सेवा देकर हजारों करोड़ रुपए की बचत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ एक ऐसा संस्कार यज्ञ है, जो अन्तर्दृष्टि और बाह्य दृष्टि दोनों के लिए काम कर रहा है। बाह्य दृष्टि के रूप में माधव नेत्रालय इसका उदाहरण है, जबकि अन्तर्दृष्टि ने संघ को आकार दिया है। हमारे यहां कहा गया है कि हमारा शरीर परोपकार और सेवा के लिए ही है। जब सेवा संस्कार बन जाती है, तो साधना बन जाती है। यही साधना हर स्वयंसेवक की प्राणवायु होती है। यह सेवा संस्कार, यह साधना, यह प्राणवायु, पीढ़ी दर पीढ़ी हर स्वयंसेवक को तप और तपस्या के लिए प्रेरित करती है। यह उसे निरंतर गतिमान रखती है, न थकने देती है, न रुकने देती है। स्वयंसेवक के हृदय में एक भाव हमेशा चलता रहता है- ‘सेवा है अग्नि कुण्ड, समिधा जैसे हम जलें।’ हमें प्रकाश बनकर अंधेरा दूर करना है, बाधाएं हटानी हैं और रास्ता बनाना है। यही संघ की भावना है।

श्रीगुरुजी को श्रद्धां सुमन अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार का जन्म हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। उस दिन रविवार था। आज ऐसा शुभयोग बना है कि आज रविवार है, वर्ष प्रतिपदा है, डॉ. हेडगेवार की जयंती है, आज चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है और आज ही माधव नेत्रालय के नए प्रीमियर सेंटर का शिलान्यास भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो रहा है। यह अत्यंत शुभयोग है। शुभयोग के लिए तपस्या करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि गत तीन दशक से माधव नेत्रालय ने नेत्र चिकित्सा सेवा से समाज में प्रकाश फैलाया है। सामान्य जन के जीवन को अपनी चिकित्सा के माध्यम से आलोकित किया है। इस प्रकल्प में लगे स्वयंसेवकों ने बड़े समर्पित भाव से सेवा की है। हम सभी माधव नेत्रालय की इस तपस्या के साक्षी हैं। तपस्या से पुण्य अर्जित होता है, पुण्य से फल मिलता है। लेकिन वह फल अपने लिए न रखते हुए उसका विनियोग लोक कल्याण के लिए करना है।

माधव नेत्रालय के पीछे संघ विचार की प्रेरणा है। यह प्रेरणा स्वार्थ की नहीं, भय या प्रतिक्रिया की भी नहीं, न कोई मजबूरी है। वरन शुद्ध सात्विक प्रेम ही अपने कार्य का आधार है। यह समाज मेरा है, समाज के लोग मेरे अपने हैं, यह दृष्टि संघ की शाखाओं से मिलती है। इसलिए संघ के स्वयंसेवक पूरी प्रामाणिकता से, नि:स्वार्थ भाव से, तन-मन-धन से समाज के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में डेढ़ लाख से अधिक सेवा प्रकल्पों के माध्यम से संघ समाज में सेवाकार्य कर रहा है। समाज के लिए हर कष्ट उठाकर नि:स्वार्थ भाव से सेवाकार्य करना, यही संघ की प्रेरणा है। संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन एक घंटा शाखा से ऊर्जा प्राप्त करते हैं और पैदा उस ऊर्जा का उपयोग समाज के हित के लिए करता है।
इस अवसर पर श्री भैयाजी जोशी, श्री सुरेश सोनी और सहसरकार्यवाह श्री मुकुंद सी.आर. भी उपस्थित थे।

माधव नेत्रालय का इतिहास

श्री माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्रीगुरुजी की जयंती पर 25 फरवरी, 1995 को नागपुर में माधव नेत्र पेढ़ी (बैंक) की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य था नेत्रदान को बढ़ावा देना। 2014 में माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया गया। 18 मार्च, 2018 को माधव नेत्रालय सिटी सेंटर शुरू हुआ। इस समय यहां कम से कम शुल्क में नेत्र रोगियों की चिकित्सा होती है। अब नागपुर के वासुदेव नगर में इस ट्रस्ट को छह एकड़ भूखंड पट्टे पर मिला है। यहीं माधव नेत्रालय के ‘प्रीमियम सेंटर’ की आधारशिला रखी गई। माधव नेत्रालय के डॉ. अविनाश चंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि तीन वर्ष के अंदर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और इसका उद्घाटन 27 मार्च, 2028 को गुड़ी पड़वा के दिन किया जाएगा।

पहली बार संघ मुख्यालय गए पीएम मोदी

गत 30 मार्च को देश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में पहुंचे। इससे पहले वे संघ के प्रचारक के रूप में अनगिनत बार वहां गए होंगे, लेकिन प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए संघ मुख्यालय जाने वाले वे दूसरे प्रधानमंत्री बन गए। इससे पहले 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी संघ मुख्यालय गए थे।

Topics: माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्टराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघभारत की अमर संस्कृतिसरसंघचालकश्रीगुरुजीमोहनराव भागवतनरेंद्र मोदीस्वामी विवेकानंदडॉ. बाबासाहेब आंबेडकरहिंदू नववर्षपाञ्चजन्य विशेषराष्ट्रीय चेतना
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