जिन्ना के देश की 'सुरक्षा' भरोसे लायक नहीं, अब China के अपने फौजी करेंगे CPEC की सुरक्षा
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जिन्ना के देश की ‘सुरक्षा’ भरोसे लायक नहीं, अब China के अपने फौजी करेंगे CPEC की सुरक्षा

चीन की ओर से बताया गया है कि उसने पाकिस्तान में तीन निजी सुरक्षा कंपनियों को सीपैक परियोजना की सुरक्षा सौंपी है। इन सुरक्षाकर्मियों को वहां तैनात करने के लिए चीन ने पाकिस्तान पर दबाव डालकर मंजूरी प्राप्त की है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Mar 27, 2025, 12:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
Representational Image

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जिन्ना का देश अपने आका के आगे लाचार ही रह सकता है। वह उसके हुक्म बजाने को मजबूर है। लेकिन यही जिन्ना का देश चीन के हितों को अपनी जमीन पर सुरक्षित रखने में नाकारा साबित हुआ है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद पाकिस्तान के नेताओं को बीजिंग बुलाकर खूब खरी—खोटी सुनाई है। लेकिन अब तक इस परियोजना पर काम करने वाले चीन के कई नागरिक विद्रोही गुटों के हमलों में मारे जा चुके हैं और हर हमले के बाद पाकिस्तान ने सुरक्षा पर और ध्यान देने का अपनार वादा खोखला साबित किया है। लेकिन खबर है कि अब चीन ने सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लेते हुए अपने ही सुरक्षा बल पाकिस्तान भेजकर वहां तैनात किए हैं। चीन की ओर से संकेत दिया गया है कि ऐसा इसलिए भी किया गया है क्योंकि इधर कुछ दिनों से पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है। चीन ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा न करते हुए आखिरकार अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा निजी सुरक्षा कंपनियों को सौंपी है।

‘सीपैक’ चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं में भारी निवेश करता है। इस परियोजना का घोषित उद्देश्य चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। लेकिन इस परियोजना को शुरू से ही बलूचिस्तान और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी समूहों से खतरा रहा है। इन गुटों ने इसके विरुद्ध उग्र बयान भी जारी किए हैं और हिंसक आक्रमण किए हैं।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के नेताओं को बीजिंग बुलाकर खूब खरी—खोटी सुनाई है।

पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और CPEC परियोजनाओं पर कई बार हमले हुए हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी तथा अन्य विद्रोही समूहों ने चीनी नागरिकों को निशाना बनाया है। हाल ही में बलूच विद्रोही गुट ने पाकिस्तानी सैन्य बस को बम से उड़ाकर कई सैनिकों को मार डाला था। इसके अलावा, आत्मघाती हमलों और बम विस्फोटों ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सीपैक परियोजना पर हुए कुछ प्रमुख हमलों का उल्लेख करें तो अक्टूबर 2024 में कराची में एक आत्मघाती बम धमाके में चीनी कर्मचारियों को ले जा रहे काफिले को निशाना बनाया गया। इस हमले में दो चीनी इंजीनियर मारे गए और एक दर्जन लोग घायल हुए। प्रतिबंधित उग्रवादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसी तरह ग्वादर बंदरगाह पर 2023 में चीनी नागरिकों पर हमला हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए। यह हमला भी बलूच विद्रोहियों ने किया था। उसी साल बलूचिस्तान में चीनी परियोजना पर काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया। उस हमले में भी कई चीनी श्रमिक मारे गए थे।

चीन की ओर से बताया गया है कि उसने पाकिस्तान में तीन निजी सुरक्षा कंपनियों को
सीपैक परियोजना की सुरक्षा सौंपी है। ये हैं डेवी सिक्योंरिटी फ्रंटियर सर्विस ग्रुप, चाइना सिक्योरिटी ग्रुप और हुवाक्जिन जोंग्स्शान सिक्योरिटी सर्विस। इन कंपनियों ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। इन सुरक्षाकर्मियों को वहां तैनात करने के लिए चीन ने पाकिस्तान पर दबाव डालकर मंजूरी प्राप्त की है।

उधर पाकिस्तान चीनी दबाव के चलते अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित कर चुका है। इसके तहत, पाकिस्तानी सेना और नौसेना को सुरक्षा बढ़ाने के लिए पैसा दिया गया है। हालांकि, पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर चीन का भरोसा कम होता जा रहा है और यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा रहा है।

इसमें संदेह नहीं है कि चीन द्वारा पाकिस्तान में अपने सुरक्षा बलों की तैनाती एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सीपैक परियोजनाओं की कथित सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। यह कदम पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर चीन के भरोसे की कमी को दर्शाता है। यह नया घटनाक्रम दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। कुछ विशेषज्ञ अंदेशा जताते हैं कि चीन पाकिस्तान में धीरे धीरे अपने सैनिक भी भेजकर वहां तैनात करता जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो यह भारत के लिए विशेष चिंता की बात होगी।

Topics: पाकिस्तानचीनbaluchistancpecसुरक्षाoakistanChinaprivate security
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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