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साधना भी, सेवा भी

महाकुंभ में अनगिनत संगठन और लोग साधकों और श्रद्धालुओं की सेवा में लगे हैं। कोई भोजन, तो कोई वस्त्र, तो कोई दवाई का नि:शुल्क वितरण कर रहा है। सेवा के विभिन्न रूपों को देखकर हर व्यक्ति गर्व से भर जाता है

Written byहर्षिता सिंहहर्षिता सिंह
Jan 29, 2025, 03:00 pm IST
in विश्लेषण, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
इस्कॉन और अडानी कंपनी की भोजन सेवा ग्रहण करती एक विदेशी श्रद्धालु एवं दंत कुंभ में दांतों की जांच करता एक चिकित्सक

इस्कॉन और अडानी कंपनी की भोजन सेवा ग्रहण करती एक विदेशी श्रद्धालु एवं दंत कुंभ में दांतों की जांच करता एक चिकित्सक

प्रयागराज महाकुंभ में सभी पूज्य धर्माचार्य, साधु-संत और श्रद्धालु मन में सेवा, समर्पण, संकल्प और साधना का भाव लेकर आ रहे हैं। कहा जाता है कि कभी इस कुंभ में आने वाले राजे-रजवाड़े या धन-धान्य से संपन्न लोग सुई से लेकर हाथी तक दान किया करते थे। उस समय की परंपरा में गज दान बड़े दान में गिना जाता था, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं और दान के स्वरूप बदल गए हैं। धार्मिक अनुष्ठानों की इस स्थली पर अब धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों के साथ-साथ हर ओर सामाजिक सरोकार से जुड़ी गतिविधियां दिखाई देती हैं। 4,000 हेक्टेयर भूमि पर, 25 सेक्टरों में विस्तार लिए महाकुंभ क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र या मार्ग होगा, जहां किसी न किसी प्रकार के सेवा कार्य न चल रहे हों। इन सेवा कार्यों में दो सेवा कार्य प्रमुख हैं- पहला अन्न क्षेत्र और दूसरा चिकित्सा।

हर्षिता सिंह
शोधार्थी

महाकुंभ में चल रहे चिकित्सा संबंधी सेवा कार्यों में सबसे बड़ा कार्य दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाली संस्था ‘सक्षम’ द्वारा संचालित नेत्र कुंभ है। 12 जनवरी को प्रारंभ हुआ यह नेत्र कुंभ 26 फरवरी तक चलेगा। आयोजकों की ओर से 5,00,000 मरीजों के नेत्र परीक्षण, उनकी दवाएं तथा आवश्यकता के अनुरूप उनको चश्मा देने की व्यवस्था की गई है। संस्था ने 3,00,000 चश्मा वितरण का लक्ष्य रखा है। नेत्र कुंभ पूरी तरह नि:शुल्क है। व्यवस्था में लगे लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि.) राधाकांत ने बताया, ‘‘बाह्य रोगी विभाग (ओ.पी.डी.) के 10 केंद्र हैं, जिनमें प्रतिदिन 3,000 से अधिक मरीजों को देखा जा रहा हैं। देशभर के नेत्र विशेषज्ञ और प्रमुख अस्पताल इस सेवा कार्य में सहयोग कर रहे हैं।’’

महाकुंभ क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के सेवा विभाग से जुड़े ‘योगक्षेम सेवा न्यास’ द्वारा दंत कुंभ चलाया जा रहा है। विहिप, काशी प्रांत के सेवा प्रमुख अनिल कुमार सिंह ने बताया, ‘‘10 जनवरी से प्रारंभ हुआ दंत कुंभ 26 फरवरी तक चलेगा। इसमें 10 चिकित्सक और सहायक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 500 लोग इस कुंभ का लाभ उठा रहे हैं।’’ डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया, ‘‘ओपीडी प्रात: 9 से बजे अपराह्न 2 बजे तक निर्धारित है। यहां मरीजों के दांतों का परीक्षण, प्राथमिक उपचार, पेस्ट, माउथवाश, दवा आदि नि:शुल्क उपलब्ध हैं।’’ डॉ. पद्मनाभ ने बताया, ‘‘जिन मरीजों को विशेष जांच और चिकित्सा की आवश्यकता होती है, उन्हें उनके शहर के ऐसे संस्थान अथवा डॉक्टर के पास भेजा जाता है, जिन्होंने संस्था के साथ सहयोग का आश्वासन दिया है। मरीज के लिए वहां पर न्यूनतम खर्च पर इलाज की सुविधा है।’’ दंत कुंभ के आयोजन में ‘नेशनल मेडिकोज आर्गनाइजेशन’, ‘डेंटल सर्जन एसोसिएशन’ तथा ‘यूनाइटेड मेडीसिटी, प्रयागराज’ का भी सहयोग मिल रहा है।

महाकुंभ में प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट (पी.पी.एम.) द्वारा संचालित अस्पताल सर्वसुविधा-युक्त है। 11 जनवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले इस अस्पताल में हर सुविधा नि:शुल्क है। पी.पी.एम. ट्रस्ट के संस्थापक महामंडलेश्वर श्रीस्वामी प्रखर जी महाराज ने बताया, ‘‘अस्पताल में आधुनिक मशीनें, डिजिटल एक्स रे, संपूर्ण जांच के साथ ही आपात स्थिति में वेंटिलेटर तक की सुविधा उपलब्ध है। 50 बिस्तरों वाला यह अस्पताल कुशल चिकित्सकों की देखेरख में से संचालित हो रहा है।’’अस्पताल की व्यवस्था देख रहीं मां चिदानंदमयी के अनुसार, ‘‘अस्पताल में प्रतिदिन 1,000 से अधिक लोग आते हैं और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं।’’

उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान की ओर संचालित सेवा प्रकल्प द्वारा महाकुंभ में अनेक प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। संस्थान के आदित्य चौबीसा ने बताया, ‘‘नारायण सेवा संस्थान का शिविर 14 जनवरी को शुरू हुआ है, जो 26 फरवरी तक चलेगा। इस अवधि में दिव्यांगों का माप लेकर उनके लिए कृत्रिम अंग तैयार किए जा रहे हैं। आचार्य महामंडलेश्वर कैलाश जी महाराज के आगमन पर इन अंगों का वितरण किया जाएगा। यदि कोई दिव्यांग मोबाइल, कंप्यूटर अथवा सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने का इच्छुक होगा तो उसे उदयपुर मुख्यालय भेजा जाएगा। शिविर में प्रतिदिन नि:शुल्क फिजियोथेरेपी केंद्र भी चल रहा है।’’ संस्थान के एक अधिकारी विष्णु रावत ने बताया, ‘‘शिविर में जरूरतमंदों को व्हील चेयर और ट्राई साइकिल भी नि:शुल्क दी जा रही है। संस्थान की ओर से अन्न क्षेत्र भी चलाया जा रहा है।’’

महाकुंभ में दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवालान मंदिर द्वारा चाय वितरण एवं नारायण सेवा संस्थान के शिविर में मुरैना के संजय सिंह को मिली व्हील चेयर

महाकुंभ में अनेक स्थानों पर अन्न क्षेत्र चल रहे हैं, जहां मेले में आने वाले हर व्यक्ति को नि:शुल्क भोजन मिलता है। अनेक धर्माचार्यों के शिविरों के साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी अपने अन्न के भंडार खोल दिए हैं। इस बार महाकुंभ में इस्कॉन को विश्व विख्यात उद्योगपति गौतम अडानी का सहयोग मिला है। इस्कॅन द्वारा मेला क्षेत्र और मेले के बाहर दो रसोइयों में भोजन तैयार किया जा रहा है। इस भोजन को इस्कॉन के मुख्य शिविर के साथ ही मेले के अलग-अलग स्थानों पर वितरित किया जाता है। भोजन पहुंचाने के लिए गौतम अडानी की कंपनी ने लगभग तीन दर्जन गाड़ियां उपलब्ध कराई हैं। भोजन की व्यवस्था संभालने वाले प्रमोद चौहान के अनुसार, ‘‘प्रतिदिन औसतन 40,000 लोगों को प्रसाद मिलता है। मुख्य स्नान पर्व पर यह आंकड़ा बढ़ जाता है। भोजन वितरण का समय सुबह 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक निर्धारित है। भोजन में चावल, दाल, पूड़ी, पकौड़े,आलू मटर, काले चने की सब्जी के साथ मिष्ठान में हलुआ, मालपुआ आदि हैं। भोजन में प्रतिदिन बदलाव किया जाता है। यह सेवा 13 जनवरी से शुरू हुई है, जो 12 फरवरी तक चलेगी।’’

गौतम अडानी की ओर से मेले में गीता प्रेस का आरती संग्रह और ‘गीता-7’ नाम की पुस्तक मुफ्त में वितरित की जा रही है। यद्यपि मुफ्त वितरण से होने वाले दुरुपयोग को रोकने के लिए इस्कॉन की 20 रुपए की पुस्तक ‘श्रीमद्भगवद्गीता : यथा रूप’ खरीदने पर ही ‘गीता-7’ दी जाती है। यहां इसकी लगभग 10,00,000 प्रतियां वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमोद चौहान ने यह भी बताया कि इस्कॉन के शिविर से दिव्यांगों और चलने-फिरने में असमर्थ अन्य लोगों को संगम तक पहुंचाने के लिए 50 गाड़ियां दी गई हैं।

नेत्र कुंभ में आंखों की जांच

सामाजिक संस्था ‘ओम नम: शिवाय’ पिछले कई कुंभ से भोजन प्रसाद का वितरण बड़े पैमाने पर करती आ रही है। इस बार भी संस्था अपना अन्न क्षेत्र चला रही है। अनुमानत: 30-35 हजार लोगों को प्रतिदिन भोजन प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। संस्था के स्वयंसेवक सफेद वस्त्र में लाल पगड़ी पहनकर बहुत ही विनम्र भाव से श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद ग्रहण करने के लिए बुलाते हैं। संस्था से जुड़े बसंत विक्रम सिंह बताया, ‘‘मेले में चार केंद्र देर रात तक चलते हैं। प्रात: चाय के बाद प्रसाद वितरण प्रारंभ होता है। दिन के भोजन में चावल के साथ कढी अथवा छोले और पूड़ी तथा रात में चावल, रोटी, खीर और किसी चीज की एक सब्जी दी जाती है। कुछ समय बाद इसमें बदलाव भी किया जाता है। 15 दिसंबर, 2024 से प्रारंभ हुआ यह अन्न क्षेत्र 26 फरवरी तक चलेगा।’’

कार्ष्णि ऋषि के आश्रम में चल रहे अन्न क्षेत्र में भारी भीड़ होती है। यहां प्रतिदिन नाश्ते में लगभग 3,000 लोगों को सांभर के साथ इडली और वडा दिया जाता है। नाश्ता समाप्त हो जाने के बाद श्रद्धालुओं को खिचड़ी दी जाती है। सुबह 9 बजे के बाद भोजन का वितरण प्रारंभ होता है। खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी तथा मिष्ठान दिया जाता है। रात्रि में मिठाई नहीं दी जाती है। यहां प्रतिदिन 8 से 10 हजार लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। 12 जनवरी से चल रहा यह अन्न क्षेत्र महाकुंभ के अंत तक चलेगा।

झंडेवालान देवी मंदिर, दिल्ली की ओर से इस महाकुंभ में प्रसाद के रूप में चाय का नि:शुल्क वितरण किया जा रहा है। इसके साथ बिस्कुट या रस्क दिए जाते हैं। यह सेवा प्रमुख आठ स्थानों पर दी जा रही है। चाय पीने वालों के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं है, वे चाहे जितनी चाय पियें। व्यवस्थापक मदन मोहन ने बताया, ‘‘इस सेवा कार्य के लिए 60 लोगों की टोली है, जिसमें 25 सेवादार और 35 कर्मचारी हैं।

चाय वितरण का समय सुबह 5 बजे से रात्रि 11 बजे तक निर्धारित है, लेकिन प्रमुख अवसरों पर श्रद्धालुओं के साथ पुलिस प्रशासन के लोगों के लिए देर रात तक सेवा चलती रहती है। प्रतिदिन 2,500 लीटर दूध का उपयोग होता है। चाय की कितनी भी मांग हो, लेकिन उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता। ब्रित्तानिया और मैरी कंपनी द्वारा रस्क और सुगंध कंपनी की ओर से चाय उपलब्ध कराई गई है। 10 जनवरी से प्रारंभ हुआ यह प्रसाद वितरण 14 फरवरी तक चलेगा।’’ महाकुंभ में एक्यूप्रेशर और अन्य पद्धतियों से भी लोगों की चिकित्सा हो रही है।

महाकुंभ को सेवा का अवसर मानकर अनेक धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाएं या लोग चाय, हलवा, रबड़ी, खीर, फल, तहरी, खिचड़ी जैसी सामग्रियों का वितरण कर रहे हैं। प्रमुख सेवा कार्यों में वस्त्र वितरण भी शामिल है। ऐसे दानदाता भी दिखते हैं, जो छोटी गाड़ियों में शॉल, कंबल या अन्य ऊनी वस्त्र लाते हैं और उन्हें जरूरतमंदों के बीच बांट भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं।

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