दिल्ली सल्तनत के जिस इल्तुतमिश को प्रगतिशील कहकर सराहते हैं कम्युनिस्ट, उसके मंदिर तोड़ने वाले रूप को छिपाते हैं
October 8, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

दिल्ली सल्तनत के जिस इल्तुतमिश को प्रगतिशील कहकर सराहते हैं कम्युनिस्ट, उसके मंदिर तोड़ने वाले रूप को छिपाते हैं

कम्युनिस्ट इतिहासकार इल्तुतमिश को इस कारण बहुत ही प्रगतिशील मानते हैं कि उसने अपनी बेटी को गद्दी सौंपी थी। मगर क्या यह महिमामंडन इल्तुतमिश के द्वारा किए गए पापों को छिपाने के लिए है?

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Dec 15, 2024, 10:44 am IST
inविश्लेषण

भारत में दिल्ली सल्तनत और मुगल इतिहास में केवल एक ही महिला शासक हुई और वह थी दिल्ली सल्तनत काल में गुलामवंश के इल्तुतमिश की बेटी रज़िया। जिसे उसके अब्बा ने इसलिए गद्दी सौंपी थी, क्योंकि इल्तुतमिश के बेटे इस लायक नहीं थे, कि वह गद्दी पर बैठ पाते। इसलिए उसने अपनी बेटी को गद्दी सौंपी थी। मगर रजिया को एक अफ्रीकी गुलाम याकूब से इश्क हो गया था और रज़िया को इस कारण विद्रोह का सामना करना पड़ा और उसकी गद्दी चली गई थी।

कम्युनिस्ट इतिहासकार इल्तुतमिश को इस कारण बहुत ही प्रगतिशील मानते हैं कि उसने अपनी बेटी को गद्दी सौंपी थी। मगर क्या यह महिमामंडन इल्तुतमिश के द्वारा किए गए पापों को छिपाने के लिए है? क्योंकि इल्तुतमिश में कोई भी ऐसी बात नहीं थी, जिसके चलते उसकी तारीफ की जाती। दिल्ली में एक बहुत विख्यात स्मारक है, सुल्तान गढ़ी का मकबरा। सुल्तान गढ़ी के विषय में यह कहा जाता है कि यह भारत में किसी भी मुस्लिम का पहला स्मारक है। यह मकबरा इल्तुतमिश के बेटे की याद में बना है और इल्तुतमिश गुलाम वंश की ओर से दूसरा सुल्तान था। इस मकबरे के विषय में यह कहा जाता है कि यह मकबरा हिन्दू मंदिर की भूमि पर बना है।

सीताराम गोयल की पुस्तक hindu temples what happened to them में भी इस मकबरे के विषय में लिखा है कि यह 1235 में बनाया गया था। इस मकबरे की वास्तु भी स्पष्ट रूप से यह कहती है कि यह हिंदू मंदिरों की ही सामग्री से बना है। कई और स्रोत हैं जो यह बताते हैं कि इस मकबरे को हिन्दू मंदिरों को तोड़कर या हिन्दू मंदिरों की सामग्री से बनाया था। https://www.archnet.org/sites/1586 पर भी लिखा है कि यह मकबरा एक हिन्दू मंदिर के स्थान पर बना है।

यह स्पष्ट नहीं है कि इस स्थान पर मौजूद मंदिर को किसने तोड़ा था। मगर इस मकबरे में हिन्दू चिनाई मिलती है। https://www.delhiinformation.in पर भी यह लिखा है कि “मकबरे का कक्ष चार मीनारों पर टिका हुआ है, जो दो स्तंभों द्वारा खड़े किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक एक बीम को सहारा देता है, जो स्तंभों के साथ-साथ फर्श पर हिंदू मंदिरों के प्राचीन अवशेषों को प्रदर्शित करता है।“ मगर इल्तुतमिश ने जिस मंदिर को तोड़ा था, उसकी चर्चा भी नहीं की जाती है। इल्तुतमिश ने जब विदिशा पर आक्रमण किया तो भैयिल्स्वामी मंदिर को नष्ट किया। इस मंदिर को बनने में एक-दो या दस-बीस वर्ष नहीं बल्कि पूरे 300 वर्ष लगे थे।

तत्कालीन इतिहासकार मिनहाज सिराज अपनी पुस्तक तबक-ए-नासिर में लिखता है कि सुल्तान मालवा की ओर गया और भीलसा शहर पर हमला किया। वहाँ पर जो मंदिर था, और जिसके बनने में तीन सौ साल लगे थे, उसे तोड़ दिया। उसके बाद वह उज्जैन की ओर बढ़ा और उसने वहाँ पर महाकाल मंदिर को तोड़ा, जिस तीर्थ की महत्ता का विवरण महाभारत तक में प्राप्त होता है। इल्तुतमिश के हमले के कारण इस ज्योतिर्लिंग को पुजारियों ने एक कुंड में छिपा दिया था। उसके बाद इस मंदिर के अवशेषों पर औरंगजेब ने एक मस्जिद बनवा दी थी। लगभग पाँच सौ वर्षों तक महाकाल वहीं पर रहे।

हिन्दू मात्र भग्नावशेषों को ही पूजते रहे थे, मगर मराठा साम्राज्य विस्तार के लिए जब सिंधिया राजवंश के संस्थापक राणो जी सिंधिया बंगाल विजय के लिए निकले थे, तो उन्होंने जब महाकाल महादेव के मंदिर को इस प्रकार देखा तो उनका खून खौल गया और उन्होंने वहाँ के अपने अधिकारियों एवं उज्जैन के व्यापारियों को यह आदेश दिया कि उनके लौटने तक यहाँ एक भव्य मंदिर बन जाना चाहिए। जब वे बंगाल विजय के उपरांत लौटे तो वहाँ महाकाल अपने पूर्ण वैभव के साथ पधार चुके थे। और उसी के बाद लगभग 500 वर्षों तक बंद सिंहस्थ कुम्भ को उन्होंने ही पुन: आरंभ किया।

इल्तुतमिश की प्रशंसा करने वाले यह नहीं बताते हैं कि वह एक कट्टर मुस्लिम था, जिसे अपनी तुर्क पहचान से प्यार था। और उसने भारत में अरब की मुद्रा प्रणाली की शुरुआत की थी। उसे हिंदुओं से ही नहीं बल्कि मुस्लिमों के दूसरे तबकों जैसे कि शिया से नफरत थी। वह उलेमाओं को खुश करने के लिए दूसरे तबकों का दमन और भी अधिक करता था।

आशीर्वाद लाल श्रीवास्तव भी अपनी पुस्तक द सल्तनत ऑफ डेल्ही में लिखते हैं कि उसने भीलसा में मुख्य मंदिर को तोड़ था और वह विक्रमादित्य और अन्य मुख्य राजाओं की प्रतिमाएं दिल्ली ले आया था। ऐसा था वह कथित प्रगतिशील इल्तुतमिश जिसकी प्रशंसा यह कहकर कम्युनिस्ट इतिहासकार करते हैं कि उसने भारत में तुर्क साम्राज्य को स्थापित किया और इतना प्रगतिशील था कि उसने अपनी बेटी को सत्ता सौंपी। ऐसा कहकर वे हिंदुओं को महिला अधिकारों पर नीचा दिखाने का असफल प्रयास करते हैं।

इन दिनों जब मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने को लोग असहिष्णुता कह रहे हैं, उन्हें और कुछ नहीं तो कम से कम तत्कालीन मुस्लिम यात्रियों के विवरण को ही पढ़ना चाहिए, जिससे उन्हें यह पता चले कि जो इमारतें आज इतनी बुलंद हैं, उनका इतिहास दरअसल है क्या?

Topics: History of Slave DynastyIltutmishLeftist Historyइतिहासhistoryपाञ्चजन्य विशेषगुलामवंश का इतिहासइल्तुतमिशवामपंथी इतिहास
Share4
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

दीप प्रज्वलित कर श्री अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का श्रीगणेश करते महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज। साथ में हैं बाएं से श्री अमित शाह, श्री आलोक कुमार, श्री दत्तात्रेय होसबाले और श्री महेश भागचंदका

संगठन शिल्पी की शताब्दी

अभिनेता नीतीश भारद्वाज से बातचीत करती हुए तृप्ति श्रीवास्तव

‘छत्रपति संवाद:मुंबई संकल्प’ : ‘बच्चों को मोबाइल नहीं, किताब दें’

फिल्मकार डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी से संवाद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

‘छत्रपति संवाद : मुंबई संकल्प’: ‘कहानियों का अकाल नहीं, उन्हें खोजने की कमी ’

एक बैठक के दाैरान (बाएं से) चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी

कांग्रेस के ‘गड़े मुर्दे’!

‘छत्रपति संवाद : मुंबई संकल्प’ : ‘मोबाइल चलाएं, उसकी गिरफ्त में न आएं’

‘छत्रपति संवाद : मुंबई संकल्प’ : ‘हिंदुत्व से जुड़ी है मुंबई की पहचान’

Load More

ताज़ा समाचार

प्रातीकात्मक तस्वीर

एनएमसी के नए नियम: डॉक्टर-अस्पताल अब AI से टेस्टिमोनियल नहीं बना सकते, रैंकिंग पर भी रोक

नाना पाटेकर

BREAKING: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर नहीं रहे, 75 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट से निधन

जंतर मंतर प्रदर्शन में पुलिस पर हमला: वीडियो से हमलावरों की पहचान शुरू की, FIR दर्ज हो सकती है

हूती आतंकियों ने सऊदी अरब के दो एयरपोर्ट्स पर हमला किया, 3 मरे 36 घायल

आज का श्लोक : जीवन का चक्र व्यक्ति के स्वयं के कृत्यों का परिणाम

घुसपैठ भारत के लिए बड़ी समस्या (फोटो-सांकेतिक)

बांग्लादेशी घुसपैठियों में हड़कंप, बंगाल में बीएसएफ की बड़ी कार्रवाई

गोकशी का आरोपी महफूज, जिसे नालंदा से गिरफ्तार किया गया।

गोकशी का इनामी आरोपी महफूज नालंदा से गिरफ्तार

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा

यूपी में मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चलेगा विशेष अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

कभी यूपी में अराजकता की दिखती थी डरावनी तस्वीर, अब माफिया मिट्टी में मिल गए : सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम

मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान,  8 से 10 अक्टूबर तक सभी बूथों पर विशेष कैंप लगाएंगे बीएलओ

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies