राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने मंगलवार को डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए नैतिक विज्ञापन के नए नियम जारी किए हैं। ये नियम तुरंत से लागू हो गए हैं। अब डॉक्टर और अस्पताल मरीजों के टेस्टिमोनियल, क्लिनिकल रिजल्ट या कोई प्रमोशनल कंटेंट बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सर्च इंजन या ऐप्स पर रैंकिंग सुधारने के लिए पैसे खर्च करने पर भी रोक लग गई है।
AI के इस्तेमाल पर पाबंदी
एनएमसी ने साफ कह दिया है कि रजिस्टर्ड डॉक्टर और अस्पताल AI से बना कंटेंट अपनी सेवाओं का विज्ञापन करने, मरीज लाने या डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट या रिजल्ट की ऐसी जानकारी फैलाने में नहीं लगा सकते जिसे जांचा न जा सके।
AI से नकली मरीज टेस्टिमोनियल, आवाज, क्लिनिकल आउटकम या फर्जी एंडोर्समेंट बनाना पूरी तरह मना है। मेडिकल सेवाओं की क्वालिटी या स्वभाव को गलत तरीके से पेश करना भी वर्जित है।
गलत दावे और रैंकिंग मैनिपुलेशन पर रोक
डॉक्टर “बेस्ट”, “नंबर वन”, “मोस्ट ट्रस्टेड”, “गारंटीड क्योर” या “100% सक्सेस” जैसे दावे नहीं कर सकते। वे सर्च रैंकिंग बढ़ाने के लिए पैसे नहीं दे सकते। इंफ्लुएंसर, विज्ञापन एजेंसी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मरीज लाने के बदले पैसे वाले समझौते भी नहीं कर सकते।
छूट और प्रमोशन पर नियंत्रण
डॉक्टर और अस्पताल सीमित समय के डिस्काउंट, कूपन, गिफ्ट पैकेज या रेफरल बेनिफिट नहीं दे सकते अगर इससे अनावश्यक कंसल्टेशन बढ़ने का खतरा हो। मरीजों की फोटो बिना सही सहमति और सुरक्षा उपायों के इस्तेमाल नहीं की जा सकती।
मरीजों के टेस्टिमोनियल, पहले-बाद की तस्वीरें और ट्रीटमेंट सक्सेस के ऐसे दावे भी बंद हैं जो गलत उम्मीदें जगा सकें या गुमराह कर सकें।सोशल मीडिया का इस्तेमाल कहां तक जायजएनएमसी ने डॉक्टरों को सोशल मीडिया पर सिर्फ तथ्यात्मक और गैर-प्रमोशनल स्वास्थ्य शिक्षा देने की इजाजत दी है। अस्पताल भी सिर्फ वस्तुनिष्ठ जानकारी साझा कर सकते हैं।
उल्लंघन पर क्या कार्रवाई
- पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी और अनिवार्य एथिक्स ट्रेनिंग।
- दूसरी बार सेंसर और आर्थिक जुर्माना।
- तीसरी बार तीन से छह महीने का सस्पेंशन।
- गंभीर मामलों में छह से 12 महीने का सस्पेंशन।
बार-बार उल्लंघन करने पर मेडिकल रजिस्टर से एक से तीन साल के लिए नाम कट सकता है।











