22 जनवरी को देश के उल्लास से दुखी आरफा शेरवानी जैसे कथित पत्रकार ने कहा- “जिस भारत को मैं जानती हूँ, वह मर गया!”
October 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम मत अभिमत

22 जनवरी को देश के उल्लास से दुखी आरफा शेरवानी जैसे कथित पत्रकार ने कहा- “जिस भारत को मैं जानती हूँ, वह मर गया!”

यह गैंग हमेशा ही भारत और हिन्दू भारत के विरुद्ध विषवमन करता रहा है और इस बार इसकी घृणा बहुत तेज है

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jan 24, 2024, 08:16 pm IST
inमत अभिमत

22 जनवरी को जब पूरा देश ही नहीं, बल्कि समूचा विश्व आह्लादित हो रहा था। जो भी इस स्थान की महत्ता और इस मंदिर के सांस्कृतिक महत्व को समझता है, वह हर व्यक्ति एवं देश इस मंदिर के समर्थन में लिख रहा था और समझ रहा था कि आराध्य के जन्मस्थान को वापस पाने की प्रसन्नता क्या है। परन्तु उस समय भारत में बैठ कर एक वर्ग हमेशा के अनुसार हिन्दू संस्कृति के प्रति अपनी घृणा फैला रहा था।

 

यह गैंग हमेशा ही भारत और हिन्दू भारत के विरुद्ध विषवमन करता रहा है और इस बार इसकी घृणा बहुत तेज है। इस बार इसकी कुंठा अपनी हर सीमा पार करने को उतारू है, इस बार यह वर्ग जोर-जोर रो रहा है, इस बार यह वर्ग अपनी घृणा को संविधान के पीछे छिपा रहा है, मगर इसके बाद भी इसका असली चेहरा सामने आ रहा है। इसकी गुलामी मानसिकता एक बार फिर बाहर आई है। इस समूह में कम्युनिस्ट नेता आशी से लेकर कम्युनिस्ट प्रोपोगैंडा वेबसाईट की कथित पत्रकार आरफा शामिल हैं।

 

आरफा के दुःख का पारावार नहीं है। यह याद रखना चाहिए कि यह वही आरफा खानम शेरवानी हैं, जो खुद को बाबर की पहचान से जोड़कर रखना चाहती हैं और भारत की पहचान से बचतीं हैं और भारत से इस सीमा तक घृणा है कि भारतीय मूल के पसमांदा मुस्लिमों के हितों की बात पर जब बहस होती है तो वह बीच बहस से भाग जाती हैं। आरफा के लिए 22 जनवरी 2024 का दिन बहुत दुःख लेकर आया, क्योंकि उन्होंने कहा कि हम जिस भारत की कल्पना करते हैं, जिस भारत को कई सदियों से जानते आए थे, वह अब मर गया है।

https://twitter.com/khanumarfa/status/1749330731682374067?

ये कैसे लोग हैं? कहाँ से आते हैं जो भारत के सांस्कृतिक उत्थान वाले दिन को भारत के मरने की बात कह रहे हैं? ये लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि आज भारत ने फिर से सांस्कृतिक अंगड़ाई ली है। आरफा ने और कई और कथित लिबरल पत्रकारों ने 22 जनवरी को अपनी-अपनी सोशल मीडिया वाल पर भारत के संविधान की प्रति चिपकाई।

 

यह सत्य है कि एक लोकतांत्रिक देश में संविधान ही सर्वोपरि होता है, परन्तु आरफा जैसे लोग संविधान की उस प्रति से भी आकंठ घृणा से भरे हैं, जो मूल प्रति थी। उन्हें भारत के संविधान की तब तो याद आती है जब समाजवाद, पंथनिरपेक्ष जैसे शब्दों से भरी हुई प्रस्तावना उन्हें लोगों को बतानी होती है, परन्तु उन्हें भारत के संविधान की वह मूल प्रति याद नहीं आती है जिसमें प्रभु श्रीराम माता जानकी के साथ विद्यमान है। भारत की तो पहचान ही प्रभु श्रीराम हैं।

मगर आरफा जैसे लोगों को भारत के इस संविधान की सांस्कृतिक पहचान से घृणा है, तभी वह भारत के संविधान की बात तो करती हैं परन्तु उन शब्दों के साथ, जिन्हें आपातकाल के दौरान कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सम्मिलित कर दिया था। परन्तु भारत का आम नागरिक संविधान का आदर करता है। भारत का हिन्दू संविधान का आदर करता है, तभी उसने पांच सौ वर्षों के संघर्ष को भारत का संविधान लागू होने के बाद संवैधानिक तरीके से जीता है। भारत की न्यायपालिका से उसने यह संघर्ष जीता है।

 

क्या भारत के हिन्दुओं को अपनी इस सांस्कृतिक जीत का उत्सव मनाने का भी अधिकार नहीं है? क्या पांच सौ वर्षों एवं असंख्य बलिदानों के बाद बने इस मंदिर के प्रति आदर व्यक्त करने का भी अधिकार हिन्दुओं को नहीं है? क्या भारत के हिन्दू अपनी उस पीड़ा को बहने भी नहीं दे सकते हैं जो उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी झेली है? यह पीड़ा चेतना की पीड़ा है, जिसे आरफा जैसे लोग नहीं समझ सकते क्योंकि भारत पुनर्जन्म की भूमि है। जहां जन्म लेने के लिए देवताओं में होड़ लगी रहती है, जहां स्वयं प्रभु अवतार लेते हैं। यह जन्मों के संचित पुण्यों की भूमि है और इन पुण्यों के महत्व को वही समझ सकता है जिसकी पहचान इस भूमि की हो, जो पसमांदा मुस्लिमों की अर्थात भारतीय मुस्लिमों की पीड़ा को ही समझने से इंकार कर दे, वह कभी भी चेतना की पीड़ा को नहीं समझ पाएगा क्योंकि उसके पास चेतना होगी ही नहीं!

 

आरफा को यह तकलीफ है कि टीवी समाचार पत्रों के एंकर्स तिलक क्यों लगाए हैं? बिंदी क्यों लगाए हैं? भगवा कुरते क्यों पहने हुए हैं आदि आदि! उनका कहना है कि उन्हें यह देखकर पीड़ा हो रही है, उनका दम जैसा घुट रहा है कि आखिर क्यों ऐसा लोग कर रहे हैं? उनका कहना है कि हिन्दी मीडिया तो हिन्दू मीडिया बन गया है। मगर यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह वही आरफा है जिन्हें कभी भी इस बात पर आपत्ति नहीं हुई कि आखिर मुस्लिम लड़कियां स्कूल में बुर्के आदि की लड़ाई क्यों लड़ रही हैं? वह आम मुस्लिम लड़कियों के लिए हिजाब, बुर्के को चॉइस बता सकती हैं, परन्तु श्रीराम मंदिर की कवरेज के लिए गयी महिला एंकर्स यदि अयोध्या की भूमि पर वहां की संस्कृति का पालन कर रही हैं तो आरफा जैसों को समस्या है।

 

आरफा अकेली नहीं है! आरफा जैसे कई हैं। आरफा जैसी कम्युनिस्ट आशी है जिसने लिखा कि 22 जनवरी, एक सेक्युलर देश का पतन! याद रखा जाएगा! सच में! याद सब रखा जाएगा! यह याद रखा जाएगा कि जब भारत अपने सांस्कृतिक जागरण के सबसे महत्वपूर्ण पायदान पर था, उस समय आरफा जैसे लोग भारत के मरने की बात कर रहे हैं, वैसे एक बात सत्य है कि औरंगजेब जैसों की पहचान वाला भारत कभी नहीं रहा था। बाबर की पहचान वाला भारत कभी नहीं रहा था क्योंकि उनके लिए यह भूमि भारत नहीं थी। उनके लिए यह भूमि हिन्दुस्तान थी। देश की सांस्कृतिक पहचान मिटाने वालों को इस भूमि ने स्वीकार नहीं किया है।

 

यह याद रखा जाएगा कि जब पूरा देस अपने आराध्य का उन क़दमों का पालन करने के बाद स्वागत कर रहा था, जो उसने संविधान का पालन करने के बाद प्राप्त हुए थे, तो आरफा जैसे गुलाम मानसिकता वाले लोग सहिष्णु भारत के उस अतिसहिष्णु वर्ग को उसी संविधान की दुहाई दे रहे थे! परन्तु संविधान में तो स्वयं वही प्रभु श्रीराम हैं, जिनके मंदिर का स्वागत 22 जनवरी 2024 को इस देश ने नम आँखों और रुंधे गले से किया था! 

Topics: आरफा शेरवानीआरफा शेरवानी का दुखआरफा शेरवानी की पीड़ाHinduहिंदू से दुखी आरफा शेरवानीअयोध्या समाचारराम मंदिर का उत्साहAyodhya NewsArfa Sherwaniराम मंदिरArfa Sherwani's sorrowRam MandirArfa Sherwani's painहिंदूArfa Sherwani sad with Hinduराम मंदिर अयोध्याenthusiasm of Ram Mandirram mandir ayodhya
Share4
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Ashok Singhal Foundation Ayodhya Karsevak Puram Camp Swami Varun Das Dinendra Das Panchjanya

अयोध्या में संतों ने सराहा अशोक सिंहल फाउंडेशन का सेवा कार्य: दिव्यांगों को मिले कृत्रिम अंग व चश्मे, भावुक पल!

श्री नितेश राणे जी कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार

“ईद हो या मुहर्रम, हिंदू कभी पत्थर नहीं मारता… हमारे त्योहारों में ही पत्थर-अंडे क्यों-” नितेश राणे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं गए कांग्रेसी और सपाई, भय था कहीं जालीदार टोपी न छिटक जाए : सीएम योगी आदित्यनाथ

गोविंद देव गिरि जी, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO जितेंद्र मिश्र साक्षात्कार में हुए थे शामिल, अनुपस्थित बताना गलत: स्वामी गोविंद देव गिरि

बात भारत की! मोहन भागवत जी के Global संदेश से नेपाल बाढ़ तक

सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

राम मंदिर ट्रस्ट: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान, गोविंद देव जी महासचिव बने

Load More

ताज़ा समाचार

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Launches Dnyaneshwari App Youtube Series Mumbai Ravindra Natya Mandir Panchjanya

“ज्ञानेश्वरी कल, आज और कल के लिए मार्गदर्शक”: मुंबई में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने लॉन्च किया ऐप, पढ़ें बड़ी बातें

Punjab ETT Teachers Protest Outside Manish Sisodia House Chandigarh Panchjanya News

पंजाब में ‘आधी सैलरी-पूरा धोखा’ : चंडीगढ़ में शिक्षकों का प्रदर्शन, मनीष सिसोदिया के घर के बाहर परिवार सहित दिया धरना

स्वार्थ की राजनीति: EVM और चुनाव आयोग पर बेबुनियाद सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा विपक्ष!

फ्रांस में सुधार को लेकर शुरू हुआ आंदोलन हिंसा में बदल गया। (चित्र-एआई द्वारा निर्मित )

फ्रांस के स्कूलों में क्यों भड़की हिंसा? आगजनी और गिरफ्तारियों तक कैसे पहुंचा मामला

बांग्लादेश में अवामी लीग पर बड़ा दमनचक्र: नेताओं पर ताबड़तोड़ छापे और गिरफ्तारियां, न्याय या राजनीतिक प्रतिशोध?

डॉ. भीमराव आम्बेडकर के आर्थिक विचार: कृषि, उद्योग और RBI से लेकर सामाजिक न्याय तक, आज क्यों प्रासंगिक हैं बाबा साहेब?

Asian Games 2026 India 6 Gold Medals Women Hockey Lovlina Borgohain Parveen Hooda Panchjanya Sports

2026 एशियाई खेल: स्वर्ण पदकों की लगी झड़ी, शान से लहराया तिरंगा, बेटियों ने हॉकी, तीरंदाजी और मुक्केबाजी में रचा इतिहास

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Borivali Mumbai Rashtra And Dharm Panchjanya News

भारतीय ज्ञान संपदा की संपूर्ण विश्व को जरुरत: बोरीवली में बोले सरसंघचालक जी- ‘भारत की ओर उम्मीद से देख रही दुनिया’

कल का मौसम: 3 अक्टूबर को देश के किन राज्यों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

PM मोदी से बोले कैप्टन मच्छार- हनुमानजी ने बचा लिया, जब भी दर्द में होता हूं ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ता हूं

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies