पाञ्चजन्य की ओर से मुंबई में आयोजित ‘सुशासन संवाद-मुंबई संकल्प’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे जी ने धार्मिक त्योहारों के दौरान होने वाली घटनाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर समुदाय को अपने त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाने का अधिकार है, लेकिन त्योहारों के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं को लेकर समान नजरिया होना चाहिए।
हिंदू त्योहारों में ही पत्थर-अंडे क्यों?
नितेश राणे जी ने कहा कि ईद या मुहर्रम के दौरान किसी हिंदू व्यक्ति द्वारा जुलूस में जाकर पत्थर, चप्पल या दूसरी चीजें फेंकने की घटना उन्होंने नहीं देखी है। नितेश राणे जी ने आगे कहा कि जब हिंदू त्योहारों की बात आती है तो कई बार पत्थर, अंडे या चप्पल फेंके जाने जैसी घटनाओं की खबरें सामने आती हैं। उन्होंने गणेश चतुर्थी और हनुमान जयंती का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मौकों पर इस तरह की घटनाओं को लेकर सवाल उठते हैं।
इसी मुद्दे पर उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “हमारे इधर अंडा और चप्पल आएगा, तो आपकी ईद भी कैसे निकलेगा फिर जुलूस?” नितेश राणे जी ने आगे कहा कि लोग अगर एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान चाहते हैं, तो सभी को दूसरे समुदाय के धार्मिक आयोजनों का भी सम्मान करना चाहिए। नितेश राणे ने मुंबई की पहचान एक कॉस्मोपॉलिटन शहर के रूप में होने का जिक्र करते हुए कहा कि यहां अलग-अलग समुदायों के लोग रहते हैं। ऐसे में सभी समुदायों को अपने त्योहार मनाने की आजादी और सुरक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या उपद्रव को लेकर समान व्यवहार की बात कही। उन्होंने कहा कि धार्मिक त्योहार आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण माहौल में मनाए जाने चाहिए।













