महान पुरातत्वविद रवींद्र सिंह बिष्ट, जिन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता पर किया शोध
July 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत उत्तराखंड

महान पुरातत्वविद रवींद्र सिंह बिष्ट, जिन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता पर किया शोध

भारत सरकार द्वारा 2013 में पुरातत्व के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए चतुर्थ सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Jan 3, 2023, 02:54 pm IST
in उत्तराखंड
सम्मान प्राप्त करते हुए रवींद्र सिंह बिष्ट

सम्मान प्राप्त करते हुए रवींद्र सिंह बिष्ट

रवींद्र सिंह बिष्ट सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद जिन्हें सिंधु घाटी सभ्यता पर उनकी विद्वता और भारतीय राष्ट्रीय स्मारकों के संरक्षण के प्रयासों के लिए जाना जाता है। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2013 में पुरातत्व के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए चतुर्थ सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

रवींद्र सिंह बिष्ट का जन्म 2 जनवरी सन 1944 को देवभूमि उत्तराखंड में भीमताल नैनीताल में लेफ्टिनेंट एलएस बिष्ट के घर हुआ था। स्थानीय स्कूलों में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सन 1958 में विशारद की डिग्री उत्तीर्ण की और सन 1960 में साहित्य रत्न की परीक्षा उत्तीर्ण कर वह संस्कृत साहित्य के विद्वान बने। अपनी शिक्षा के क्रम को बदलते हुए उन्होंने सन 1965 में लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति में मास्टर डिग्री हासिल की थी। ​​इसके बाद उन्होंने सन 1967 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित स्कूल ऑफ आर्कियोलॉजी से सन 2002 में पुरातत्व विषय को लेकर स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया गया था। रवींद्र सिंह बिष्ट ने अपने अकादमिक अध्ययन को पूरा करने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय से अपनी थीसिस इमर्जिंग पर्सपेक्टिव्स ऑफ द हर्रपन सिविलाइजेशन इन द लाइट ऑफ रिसेंट एक्सकेवेशन्स इन बनावली एंड धोलावीरा के लिए डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी।

उत्तराखंड की महान विभूतियां : डॉ. घनानंद पाण्डे जिन्हें 1969 में मिला पद्म विभूषण सम्मान

रविंद्र सिंह बिष्ट ने अपने करियर की शुरुआत सन 1969 में पंजाब के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग में वरिष्ठ तकनीकी सहायक के रूप में की थी। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के विभिन्न पुरातात्विक स्टेशनों में अधीक्षण पुरातत्वविद के रूप में कार्य किया था। उन्होंने अपने सेवा कार्यकाल के समय अलग-अलग क्षमताओं में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था। वह पुरातत्व विभाग के केंद्रीय सलाहकार बोर्ड के सचिव, कांडला में सीमा शुल्क विभाग के लिए विशेषज्ञों की समिति के अध्यक्ष और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा अजंता और एलोरा पर बहु-विषयक अंतरिम प्रस्तुति के समन्वय निदेशक रहे। वह सेवाकाल के समय कुमाऊं विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और ज्ञान प्रवाह, सांस्कृतिक अध्ययन और अनुसंधान केंद्र वाराणसी की अकादमिक समितियों में सम्मिलित रहे। वह भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की समीक्षा समिति के पूर्व सदस्य, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान गोवा, डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर और अनुसंधान संस्थान पुणे, अजंता की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल समिति, एलोरा संरक्षण के साथ पर्यटन विकास परियोजना, पुरातत्व विभाग–संग्रहालय–अभिलेखागार विभाग बिहार सरकार के पुनर्गठन के लिए समिति और विश्व की चार महान सभ्यताओं की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन समितियों के सदस्य रहे।

सन 1999 में सिंधु सभ्यता प्रदर्शनी, दक्षिण कोरिया प्रदर्शनी, कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए भारतीय राष्ट्रीय ट्रस्ट के सदस्य होने के अलावा और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के सदस्य रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के विशेषज्ञ माने जाने वाले रविंद्र सिंह बिष्ट ने मानवीय सभ्यता के अध्ययन से संबंधित कई उत्खननों का नेतृत्व किया है। रविंद्र सिंह बिष्ट को दी जाने वाली एक और प्रख्यात उपलब्धि अनेकों भारतीय राष्ट्रीय स्मारकों का संरक्षण है। हरियाणा में तैनात उप निदेशक के रूप में उन्होंने नारनौल में 11 स्मारकों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट के कार्य का एक अन्य क्षेत्र संपूर्ण देश में संग्रहालयों की स्थापना और रखरखाव करना था। वह लाल किला दिल्ली में स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, होशियारपुर में विश्वेश्वरानंद वैदिक अनुसंधान संस्थान संग्रहालय और चंडीगढ़ में पुरातत्व और संग्रहालय विभाग में संग्रहालय की स्थापना में शामिल रहे। उन्होंने पंजाब के संगरूर में दरबार हाल, दरबार हाल, पुराना किला, पटियाला, रत्नागिरी और रोपड़ में संग्रहालयों के नवीनीकरण, पुनर्व्यवस्था और पुनर्रचना में योगदान दिया है। उन्होंने सुल्तानपुर लोधी, कुरुक्षेत्र, कामागाटामारू नगर, बनावली और धोलावीरा से खुदाई की गई सामग्री के विशेष प्रदर्शन और नवपाषाण तांबे की एक विशेष प्रदर्शनी जैसी कई प्रदर्शनियों के संचालन में भी भूमिका निभाई है।

उत्तराखंड की महान विभूतियां : रामस्वरूप आर्य प्रजापति… आजादी आंदोलन की लौ जलाने वाले

सन 1994 के विश्व पुरातत्व कांग्रेस के अवसर पर राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में स्वतंत्रता के बाद से भारत की कांस्य युग और मेगालिथिक संस्कृतियां उनके नेतृत्व में आयोजित की गईं थीं। रविंद्र सिंह बिष्ट को शिक्षण के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान के प्रसार में श्रेष्ठ योगदान देने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए कक्षा और क्षेत्र प्रशिक्षण दोनों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को डिजाइन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने सन 1986 से सन 1997 की अवधि के समय में पुरातत्व संस्थान नई दिल्ली में भी पढ़ाया था। उन्होंने भारत के विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों में विशेष व्याख्यान भी दिए और सन 1992 में शेरोन, कनेक्टिकट अमरीका में उन्होंने एसोसिएशन फॉर हड़प्पा स्टडीज अमरीका के निमंत्रण पर धोलावीरा पर एक विशिष्ट व्याख्यान दिया था। डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट के कई शोध लेख भी प्रकाशित हुए हैं।

भारत सरकार ने सन 2013 में डॉ. रवींद्र सिंह बिष्ट को भारत के चतुर्थ सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया। वह आचार्य नरेंद्र देव अलंकार के प्राप्तकर्ता भी हैं, जो उन्हें 2013 में आचार्य नरेंद्र देव शिक्षा निधि एवं जन नियोजन आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान किया गया था। डॉ. रवींद्र सिंह बिष्ट 35 साल की राजकीय सेवा के बाद संयुक्त महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के दायित्व से 31 जनवरी सन 2004 को सेवानिवृत्त हुए थे। वर्तमान में वह दिल्ली के पास साहिबाबाद, गाजियाबाद के आवासीय इलाके राजेंद्रनगर में परिवार सहित रहते हैं।

Topics: सिंधु घाटी सभ्यतापुरातत्वविदRavindra Singh BishtArticles on Ravindra Singh BishtLife of Ravindra Singh BishtResearch of Ravindra Singh BishtIndus Valley Civilizationरवींद्र सिंह बिष्टArchaeologistरवींद्र सिंह बिष्ट पर लेखरवींद्र सिंह बिष्ट का जीवनरवींद्र सिंह बिष्ट का शोध
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

मध्य प्रदेश में मिली मां दुर्गा की प्राचीन मूर्ति

मध्य प्रदेश: ललितासन मुद्रा में मिली देवी दुर्गा की दुर्लभ मूर्ति, 3D स्कैनिंग से होगा संरक्षण

पाकिस्तान को अचानक सिंधु घाटी सभ्यता की याद क्यों आई? देखिए उसका पाखंड

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI-generated image)

सिंधु नदी: भारतीय सभ्यता का पालना और भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और रणनीतिक विरासत का आधार

एकताल गांव : शिल्पकला को समर्पित

Rakhigarhi

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है राखीगढ़ी‌‌ का‌ पुरास्थल?

Dancing girl statue theft from national musium

नेशनल म्यूजियम से ‘डांसिंग गर्ल’ की मूर्ति चोरी: अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सर्मन मुखर्जी गिरफ्तार

Load More

ताज़ा समाचार

1996 Dausa Bus Bomb Blast Case Supreme Court Verdict Rajasthan News Abdul Hamid Justice Panchjanya

14 मौतें, 30 साल का इंतजार और फिर निराशा: आतंक के बाद भी छूट रहे हैं आतंकी, दौसा बस ब्लास्ट केस के फैसले पर बड़े सवाल!

Puri Rath Yatra Hera Panchami Gundicha Temple Adap Mandap Darshan Lord Jagannath Mata Laxmi Panchjanya

पुरी रथयात्रा: हेरा पंचमी पर गुंडिचा मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जानिए क्यों माता लक्ष्मी ने तोड़ा महाप्रभु का रथ

Delhi Sansad Chalo Violence Leaked WhatsApp Chats CJP JNU Sansad Chalo Briar BitChat Panchjanya

“मौत हुई तो सरकार पर बढ़ेगा प्रेशर”: CJP ‘संसद चलो’ प्रदर्शन में हिंसा की साजिश? लीक व्हाट्सएप चैट्स में बड़ा खुलासा

Delhi Jantar Mantar Protests vs National Sentiment Skyroot Vikram 1 Parliament Indian Democracy Panchjanya

क्या जंतर-मंतर पर जुटती भीड़ ही देश का सच है? जानिए विरोध प्रदर्शन और ‘राष्ट्रीय भावना’ के बीच का पूरा फर्क!

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट

“लाइट, कैमरा और आंदोलन”: छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर फिर एक्टिव हुई टूलकिट? जानिए जंतर-मंतर के पीछे का पूरा सच!

Punjab and Haryana High Court PIL against Sacrilege Law 2026

पंजाब के अबोहर में लहराया भाजपा का परचम: हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुए चुनाव में AAP को झटका, मेयर पद पर कब्जा!

Foreign Tourists Praise India Safety Over London Phone Theft Medical Tourism Free Rabies Vaccine Digital Payment UPI Panchjanya

“लंदन से ज्यादा सुरक्षित है भारत”, विदेशी महिला पर्यटक ने सोशल मीडिया पर शेयर किया आंखों देखा सच!

प्रतीकात्मक चित्र

Madarsa Scandal: कागजों पर चल रहे मदरसे, हिंदुओं के बच्चों का दिखाया दाखिला, MP के मदरसों में बाल अधिकारों का उल्लंघन

Explainer। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नेपाल ने 1 रुपए के सिक्के से हटाया ‘कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा’

Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Haridwar Kanwar Yatra 2026 Review Meeting Mela Bhawan Panchjanya

कांवड़ यात्रा 2026: 30 जुलाई से शुरू होगी यात्रा, हरिद्वार में सीएम धामी ने दिए सुरक्षा और सुविधाओं के सख्त निर्देश!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies