मध्य प्रदेश में सीहोर जिले के देवबड़ला पुरातत्व स्थल स्थित संग्रहालय में 11वीं सदी की देवी दुर्गा की मूर्ति है। परमार शैली में निर्मित इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देवी दुर्गा ललितासन मुद्रा में विराजमान हैं। यह एक ऐसी आरामदायक मुद्रा होती है, जिसमें एक पैर लटका होता है और दूसरा मुड़ा। चरणों के पास उनकी सवारी शेर है। वहीं देवी के सिर के दोनों ओर बनी नौ आकृतियां उनके नवदुर्गा स्वरूपों का प्रतीक हैं। इन आकृतियों के हाथों में वही हथियार दिखाई दे रहे हैं, जिनका उल्लेख प्राचीन शिल्प ग्रंथों में मिलता है। इस प्रकार की प्रतिमाएं आठवीं-12वीं शताब्दी की अत्यंत दुर्लभ मानी जाती हैं।
पुरातत्वविद डॉ. रमेश चंद्र यादव कहते हैं कि हजारों साल पहले मां दुर्गा के रूपों का शिल्पांकन मूर्तियों में मिलना दुर्लभ है। इस तरह की यह मध्य प्रदेश में मिली पहली मूर्ति है। इसी तरह पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे का कहना है कि देवबड़ला में कई दुर्लभ मूर्तियों को संरक्षित रखा गया हैं। इनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई गई है। इसमें दुर्गा, महागौरी और ब्रह्मा की मूर्तियां भी हैं।
2016 से जारी है खुदाई
यह मूर्ति वर्ष 2023 में एक प्राचीन मंदिर के गर्भगृह के मलबे से प्राप्त हुई थी। देवबड़ला में पुरातत्व स्थल पर करीब 15 मंदिर हुआ करते थे, जो 400 से 500 वर्ष पहले ध्वस्त हो गए और उनकी मूर्तियां जमीन में दब गईं। लेकिन मंदिर की दीवारों, मूर्तियों और अवशेषों में इतिहास के अनेक अध्याय सुरक्षित रह गए। देवबड़ला में 2016 से शुरू हुई खोदाई में अब तक 15 प्राचीन मंदिरों के अवशेष, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मिल चुकी हैं, जो इस क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास की पुष्टि करती हैं। इनमें से दो मंदिरों बिलकेश्वर महादेव और विष्णु मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है। खोदाई में प्राप्त हुईं देवी-देवताओं की कई मूर्तियों को यहां के संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।
3D स्कैनिंग से होगा डिजिटल संरक्षण
यहां मिलीं मूर्तियों के बारे में सारी जानकारी जुटाकर ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत 3D स्कैनिंग कर पूरे विवरण के साथ पोर्टल में अपलोड किया जा रहा है, जिससे भविष्य में देश के साथ-साथ पूरी दुनिया के लोग इनके बारे में जान सकें। मूर्तियों का बारीकी से अवलोकन, धर्म ग्रंथों में देवी-देवताओं के रूप, वेशभूषा, और आसन के आधार पर विवरण तैयार किया जा रहा है।
शिव, विष्णु, ब्रह्मा और महागौरी की भी दुर्लभ प्रतिमाएं
बता दें कि देवबड़ला संग्रहालय में एक ही पत्थर के स्तंभ पर शिव और विष्णु की संयुक्त मूर्ति, तीन मुख वाले ब्रह्मा की प्रतिमा और तपस्या मुद्रा में महागौरी की दुर्लभ प्रतिमा भी संरक्षित है। पुरातत्व विभाग का कहना है कि इन दुर्लभ प्रतिमाओं का वैज्ञानिक अध्ययन और डिजिटल संरक्षण भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।















