पाकिस्तान को अचानक अपनी इस्लाम-पूर्व सभ्यतागत विरासत क्यों याद आने लगी? तक्षशिला, गांधार, पाणिनि, संस्कृत और सिंधु-सरस्वती सभ्यता को लेकर पाकिस्तान के नए दावों के पीछे आखिर क्या है? ‘पाञ्चजन्य’ के सुशासन संवाद-ओडिशा की उड़ान 2.0 में IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इस पूरे मुद्दे के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक पहलुओं पर विस्तार से बात की। उनसे बात की है सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने. इस संवाद के दौरान उन्होंने बताया कि इस घटनाक्रम को सिर्फ इतिहास के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान की सभ्यतागत पहचान और उसके नए विरासत-दावों के पीछे एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को भी समझना जरूरी है।
साथ ही जानिए-‘अखंड भारत’ और ‘वृहत्तर भारत’ में क्या अंतर है? और भारत की सांस्कृतिक विरासत आज की राजनीतिक सीमाओं से कितनी व्यापक है?

















