रूसी दूतावास की तरफ से बुधवार रात सोशल मीडिया पर बताया गया था कि यूक्रेनी सुरक्षाबलों ने भारतीयों को बंधक बना लिया है। वहीं यूक्रेन की तरफ से कहा गया था कि गोलाबारी की वजह से लोग निकल नहीं पा रहे हैं। उसने रूस से गोलाबारी कम करने की अपील की थी। वहीं, भारत की तरफ से इस पर प्रतिक्रिया आई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में हमारा दूतावास भारतीय नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में है। यूक्रेनी अधिकारियों के सहयोग से कई छात्र कल खार्किव छोड़ चुके हैं। हमें किसी भी छात्र के संबंध में किसी भी बंधक की स्थिति की रिपोर्ट नहीं मिली है। हमने यह अनुरोध किया है यूक्रेन के अधिकारी खार्किव और पड़ोसी क्षेत्रों से छात्रों को यूक्रेन के पश्चिमी भाग में ले जाने के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करने में सहायता करें।
उन्होंने कहा कि हम रूस, रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा के साथ अच्छे से समन्वय कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में यूक्रेन से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को वहां से निकाल लिया गया है। यूक्रेनी अधिकारियों से इस संबंध में हमें जो सहायता मिली है उसके प्रति हम आभार प्रकट करते हैं। यूक्रेन के पड़ोसी देशों से मिल रही मदद के लिए हम उन देशों को धन्यवाद देते हैं।
क्या कहा था रूस और यूक्रेन ने
रूस ने बुधवार रात कहा था कि यूक्रेन के सुरक्षा बलों ने खार्किव में भारतीयों को बंधक बना लिया है। वे ढाल की तरह उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। वे रूसी सीमा बेलगोरोड की जगह यूक्रेन-पोलैंड की सीमा से जाने की शर्त रख रहे हैं। यूक्रेन-पोलैंड की सीमा का वह इलाका अशांत है। रूस की सेना भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए हर जरूरी कार्रवाई कर रही है। रूस का कहना है कि अपनी सीमा से भारत अपने सैन्य विमान या भारत के विमान से भेजेगा। भारतीय नागरिकों को बंधक बनाने से यदि कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी यूक्रेन के कीव प्रशासन की होगी। वहीं यूक्रेन के विदेश मामलों के मंत्रालय ने कहा कि भारत, पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों के छात्र जो रूसी आक्रमण के बंधक बन गए हैं, उनके लिए मास्को अन्य यूक्रेनी शहरों के लिए मानवीय गलियारा खोले।











