'मुस्लिम प्रेशर ग्रुप' का कारनामादबाव से बदलवाया वि.वि. अनुदान आयोग का अध्यक्ष
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दबाव से बदलवाया वि.वि. अनुदान आयोग का अध्यक्ष
मनमोहन शर्मा
संप्रग सरकार और कांग्रेस ने मुस्लिम नेताओं के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने डा. सैयद हसनैन अख्तर को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए हरी झंडी दे दी है। उल्लेखनीय है कि दो महीने पूर्व तीन सदस्यीय चयन समिति ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (बंगलौर) के निदेशक डा. पंकज चंद्रा को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश का अनुमोदन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी किया और अंतिम स्वीकृति के लिए फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय में भिजवा दी थी। बताया जाता है कि जब डा. चंद्रा को अध्यक्ष बनाने की खबर राजधानी में सक्रिय कुछ मुस्लिम सांसदों एवं मंत्रियों के गुट को लगी तो वे आग बबूला हो गए। उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा. सैयद हसनैन अख्तर को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनवाने के लिए अभियान छेड़ दिया। उल्लेखनीय है कि इस 'मुस्लिम प्रेशर ग्रुप' की गुप्त बैठक सप्ताह में एक बार किसी मुस्लिम सांसद के दिल्ली स्थित आवास पर होती है और उसमें सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तय की जाती है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग केन्द्र सरकार की एक महत्त्वपूर्ण संस्था है जोकि देश के 609 विश्वविद्यालयों और 12 हजार से अधिक कालेजों का नियंत्रण करती है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों के साथ -साथ प्राध्यापकों (प्रोफेसर) के चयन में भी इसकी अहम भूमिका होती है। पर मुस्लिम सांसदों ने डा. पंकज चंद्रा को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा, जिसमें यह कहा गया कि डा. चंद्रा को यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष बनाया गया तो यह मुसलमानों के साथ घोर अन्याय होगा और आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसकी भारी कीमत अदा करनी पड़ेगी। इस पत्र में यह भी कहा गया कि 1953 में स्थापित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अब तक 17 अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं, इनमें से केवल एक अध्यक्ष मुसलमान था, जबकि आयोग के अब तक नियुक्त 20 सचिवों में से एक भी मुसलमान को यह पद नहीं दिया गया। विभिन्न मुस्लिम संगठनों द्वारा भी इस संदर्भ में प्रस्ताव पारित करवाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री और श्रीमती सोनिया गांधी को दर्जनों पत्र भिजवाए गए। इसके बाद सरकारी क्षेत्रों में हड़कंप मच गया। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष से संबंधित फाइल मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को वापस भिजवा दी है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि चयन समिति की बैठक पुन: बुलाकर इस मामले पर पुनर्विचार किया जाए। इसके साथ ही चयन समिति से यह भी सफाई मांगी गई है कि उसने डा. पंकज चंद्रा को अध्यक्ष पद के लिए नियुक्त करने की सिफारिश किस आधार पर की थी, इसका विस्तृत विवरण दिया जाए।
जानकार सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर इस बात के लिए दबाव डाला है कि उनका मंत्रालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष पद के लिए डा. पंकज चन्द्रा की जगह डा. हसनैन अख्तर के नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय से करे।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्तमान अध्यक्ष डा. वेदप्रकाश का कार्यकाल 7 मई, 2012 को समाप्त हो रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार चयन समिति ने अध्यक्ष पद के लिए 80 उम्मीदवारों में से पांच उम्मीदवारों का अंतिम पैनल तैयार किया था। इसमें सबसे ऊपर डा. पंकज चंद्रा का नाम था, जिन्हें इस पद के लिए सबसे योग्य बताया गया था। दूसरा नाम था डा. हसनैन अख्तर का। इनके अलावा अन्य तीन नामों में कोरापुट केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति प्रो. सुरबी बनर्जी और तिरूअनंतपुरम के प्रो. ए. जयकृष्णन का नाम भी शामिल था। अब सांप्रदायिक तत्वों के दबाव के कारण सरकार डा. हसनैन को इस पद पर बैठाने की तैयारी कर चुकी है। n











