टाइम्स में पिछले दिनों The Network Map project के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट पर सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में हंगामा मचा हुआ है तो वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि यह तो पहले से ही उन्हें पता था।
आखिर क्या है रिपोर्ट और मामला?
ग्रूमिंग गैंग्स के विषय में तो इस समय लोग जानने लगे हैं कि कैसे कम उम्र की किशोर लड़कियों या बच्चियों को लालच देकर फुसला कर उन्हें जिस्म मे बाजार मे धकेलने का काम यूके में हुआ था और उसमें सबसे अधिक योगदान पाकिस्तान मूल के आदमियों का था। पहले तो दशकों तक इस मामले को दबाने का लगातार प्रयास किया जाता रहा। फिर इसे नकारे जाने का प्रयास किया गया और अब हालांकि, इसे स्वीकार तो कर लिया है, मगर अभी भी यह कहा जा रहा है कि नागरिकता पर प्रश्न न है कि किसने किया है।
मगर पीड़िताओं से लेकर इस मामले को उठाने वाले लोगों ने एक बात बार-बार कही थी कि यह एक संगठित अपराध है और इसके एक नहीं, बल्कि कई पहलू हो सकते हैं। जैसे कि ड्रग्स का व्यापार और मानव तस्करी। मगर इन सभी बातों पर गौर ही नहीं किया गया था, बल्कि मीडिया से लेकर प्रशासन तक ने इस पर बात करने से लगभग इनकार कर दिया था।
150 से अधिक अपराधियों से जुड़े ग्रूमिंग गैंग्स के शिकारियों के तार
मगर अब टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जो सामने आया है उसमें यही निकलकर आया है कि कैसे ग्रूमिंग गैंग्स के शिकारियों के तार 150 से ज्यादा खतरनाक अपराधियों और संगठित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, ग्रूमिंग गैनट्स ड्रग्स तस्करों, उन्हें सुरक्षा देने वाले रैकेट्स, और हिंसा करने वाले गिरोहों के साथ जुड़े हुए थे। इस रिपोर्ट में पहली बार यह भी बताया गया है कि कैसे इन पीडिताओं को पूरे देश में तस्करी किया जाता था।
यह नेटवर्क मैप इस सप्ताह जारी होने वाला है और इसने पुलिस, कोर्ट और स्थानीय रेकॉर्ड्स का इस्तेमाल किया है और साथ ही ग्रूमिंग गैंग्स की पीड़िताओं, पत्रकारों, के साथ इसके खिलाफ अभियान चलाने वालों के साथ बातचीत की है और उसके साथ इस विषय पर एक विस्तृत डोजियर बनाया है।
टाइम्स के अनुसार शोधकर्ताओं ने कहा है कि उन्होनें इस समस्या को लेकर पहले जिस प्रकार का बेहद कमजोर काम हुआ है, उसकी कमियों को दूर करने के लिए काम किया है। इसमें जबाव देने वालों में से अधिकतर लोगों ने अपनी पहचान गोपनीय रखी है, क्योंकि उन्हें डर था कि इतने व्यापक स्तर पर अपराध के विषय में बोलने पर उनके साथ बुरा हो सकता है।
ग्रूमिंग गैंग्स नहीं बल्कि माफिया है समस्या?
यूके की मीडिया में अब यह भी कहा जाने लगा है कि ग्रूमिंग गैंग्स नहीं दरअसल माफिया समस्या है। कहा जा रहा है कि ग्रूमिंग गैंग्स में लड़कियों को फुसलाने वाले और जिस्मों के व्यापार में धकेलने वाले हो सकता है कि पाकिस्तानी मूल के हों, मगर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि इसमें और भी देशों के अपराधी इससे जुड़े हुए अपराधों में संलग्न हों।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि वे तो इस पर लगातार लिख रहे थे और कह रहे थे। पत्रकार रिचर्ड नॉर्थ ने एक्स पर अपने आर्टिकल में लिखा है कि नेटवर्क मैप यह बताता है कि कैसे ग्रूमिंग गैंग्स में शामिल लोग दूसरे अपराधों की शृंखलाओं में शामिल थे। उन्होनें शेफील्ड के हाल ही में सजायाफ्ता गरूमर इलियास, जिसे किलर कहा जाता था, का उदाहरण दिया। इलियास लड़कियों को फुसलाने के लिए ही नहीं बल्कि लड़कियों को मजबूर करने के लिए बंदूक और सामूहिक बलात्कार की धमकी देने के लिए भी कुख्यात था।
उन्होनें लिखा कि नेटवर्क मैप यह भी बताता है कि कैसे ड्रग्स की तस्करी से जुड़े एक आदमी ने उस पर हमला किया था और पुलिस ने इस मामले को आगे जाकर एक और गोलीबारी के मामले से जोड़ा था, मगर इलियास पाकिस्तान भाग गया था और उसके बाद अपने मुकदमे के लिए वापस नहीं लौटा।
इसी तरह उमर सफ़दर, जिसे वेस्ट यार्कशायर के केघली में 8 आदमियों वाले ग्रूमिंग गैंग का हिस्सा होने के कारण 2022 में जेल भेजा था, तो इसी के साथ इसी गैंग का नाम हफ्ता वसूली के साथ भी जुदा था। सफ़दर पर भी हमला हुआ था और सफ़दर को 2011 में ड्रग्स के अपराध के लिए भी दोषी ठहराया गया था।
लोगों का कहना है कि यह गठजोड़ बहुत ही खतरनाक है, क्योंकि यह “बिरादरी| की संरचना पर आधारित है। इसलिए पहले अधिकारियों को इस पूरी संरचना को समझना होगा और उसे पहचानना होगा, जो कि उन्होनें अभी तक नहीं किया है। ग्रूमिंग गैंग का लगातार विरोध करने वाले कार्यकर्ता राजा मिया का भी यह कहना है कि इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

















