राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली की एक अदालत को बताया है कि मार्च में गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिक म्यांमार में एक नागरिक विमान पर ड्रोन हमले से जुड़े हैं। इनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी शामिल हैं। ये लोग भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे।
ये सभी फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। 31 अगस्त को स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने एनआईए की अर्जी मंजूर की, जिसमें दो आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति मांगी गई थी।
एनआईए का कोर्ट में कहा क्या
एनआईए ने 19 अगस्त की अपनी अर्जी में लिखा, “केंद्र सरकार को भरोसेमंद जानकारी मिली है कि कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक म्यांमार में नागरिक विमान पर ड्रोन हमले में शामिल रहे।”
एजेंसी के मुताबिक 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। वे गुवाहाटी पहुंचे, फिर बिना जरूरी दस्तावेज के मिजोरम गए और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार घुस गए। वहां उन्होंने म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन चलाने, असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण दिया। यह ट्रेनिंग म्यांमार की सैन्य जुंटा के खिलाफ थी।
पहले भी ट्रेनिंग और ड्रोन भेजने का जिक्र
एनआईए का कहना है कि ये सात विदेशी पहले भी इसी रास्ते से मिजोरम होकर गए थे। उन्होंने दो बार ट्रेनिंग दी थी। साथ ही यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन और उनके पार्ट्स भारत के रास्ते म्यांमार भेजे गए थे, जो इन जातीय सशस्त्र समूहों के लिए थे।
एजेंसी ने बताया कि ये समूह भारत में प्रतिबंधित कुछ विद्रोही संगठनों को हथियार, आतंकी सामान और ट्रेनिंग देकर मदद करते हैं। इससे भारत की सुरक्षा प्रभावित होती है।
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किस हमले की बात
बर्मा न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार 20 फरवरी के आसपास काचिन राज्य के म्यितकीना एयरपोर्ट पर म्यांमार नेशनल एयरलाइंस के ATR 72-600 यात्री विमान पर FPV सुसाइड ड्रोन से हमला हुआ था। विमान मंडले के लिए टेक-ऑफ की तैयारी कर रहा था। एनआईए की अर्जी में इसी तरह के हमले का जिक्र है, हालांकि साफ नहीं है कि बात इसी घटना की है या नहीं।
पूछताछ क्यों जरूरी
एनआईए ने कहा कि आरोपियों से जब्त कई डिजिटल डिवाइस फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। कुछ रिपोर्ट आ चुकी हैं, लेकिन डेटा बहुत ज्यादा है, इसलिए विश्लेषण में समय लग रहा है। इन डिवाइस से निकली तस्वीरें, वीडियो और आवाज के नमूने आरोपियों से मिलाने हैं।
एजेंसी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और यूक्रेनी विक्टर कामिंस्की से पूछताछ करना चाहती है। कुछ गवाहों के बयान इनसे मिलाने हैं और म्यांमार में बैठे मास्टरमाइंड के बारे में और जानकारी हासिल करनी है।
गिरफ्तारी का ब्यौरा
वैन डाइक 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट पर पकड़े गए। बाकी छह यूक्रेनी—कामिंस्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लिव्याक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफैंकिव और मैक्सिम होंचारुक—लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए। 14 मार्च को उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। 6 अप्रैल से वे तिहाड़ में हैं।
एनआईए यूक्रेनी अनुवादक की मदद से पूछताछ करेगी। टीम लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर और स्टेशनरी भी साथ ले जाएगी। चार्जशीट अगले हफ्ते दाखिल होने की उम्मीद है। जज शर्मा ने अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि एनआईए जांच कर रही है और अदालतें आमतौर पर जांच में दखल नहीं देतीं। आरोपियों के वकील रोहित दांद्रियाल, रोहित गौर और नितिन सलुजा ने कहा कि अर्जी में कोई नया या खास आधार नहीं बताया गया है और यह बाद की सोच है।
एनआईए जांच में पता चला है कि आरोपियों ने यूरोप से आए ड्रोन के कई कंसाइनमेंट मिजोरम में लोगों और समूहों को दिए। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे AK-47 राइफल वाले कुछ अज्ञात आतंकियों के सीधे संपर्क में थे और उनकी अवैध गतिविधियों में मदद कर रहे थे।











