NEET पेपरलीक को लेकर दिल्ली में कॉकरोचों (CJP) के प्रदर्शन और हिंसा के बाद उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की गई है। इसी को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा दायर याचिका पर आज (मंगलवार) सुनवाई करेगा। पुलिस ने मामले में कुल 13 FIR दर्ज की थी। साथ ही पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जांच के लिए प्रदर्शन में मौजूद रहे 2,873 लोगों के खिलाफ नया मामला दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।
क्या है मामला
नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में पिछले दिनों दिल्ली में प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई थी। दिल्ली पुलिस ने उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 13 प्राथमिकी दर्ज की थीं। अब पुलिस इन FIR को रद कराना चाहती है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को एक फैसला लिया था। उसी फैसले के मुताबिक दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी इन 13 FIR पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती।
पुलिस की नई मांग
दिल्ली पुलिस ने अदालत से यह भी अनुमति मांगी है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे 2,873 लोगों के खिलाफ नया मामला दर्ज किया जाए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से कई लोगों का पहले से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है। पुलिस कहती है कि इनकी भूमिका की जांच जरूरी है।
कोर्ट में क्या हुआ
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की जल्दी सुनवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस एक अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहती है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 142 का हवाला दिया गया है।
जब पीठ दिनभर की सुनवाई के बाद उठने वाली थी तब मेहता ने यह बात कही। कोर्ट ने जवाब में कहा कि अगर दोनों पक्ष समझौता कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। इसके बाद मामले को मंगलवार की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।
सीजेपी का विरोध मार्च
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी ने दिल्ली में एक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। सीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को जो वादे किए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्हीं वादों के आधार पर संगठन ने अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लिया था।
सीजेपी के अनुसार, यह मार्च शिक्षक दिवस के मौके पर निकाला जाएगा। इसमें उन छात्रों के परिजन शामिल होंगे जिन्होंने नीट परीक्षा रद होने और फिर दोबारा परीक्षा कराने के कारण आत्महत्या कर ली थी। साथ ही जुलाई के आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवार वाले भी मार्च में शामिल होंगे।

















