सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ कथित अभियान शुरू किया है। शुरुआत अपने पैतृक गांव हिंगोली के संतुक पिंपरी से की। इस दौरान सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह समर्थकों और मीडिया के साथ स्कूलों का निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, स्कूलों में उनके पहुंचने और बच्चों व शिक्षकों से बातचीत के तरीके को लेकर कुछ यूजर्स ने सवाल उठाए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके कथित आंदोलन में सैकड़ों अपराधी भी शामिल हुए थे, जिसकी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी है।
सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके और उनके कथित आंदोलन सीजेपी को लेकर यूजर्स में गुस्सा है। एक यूजर ने कहा कि जब बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, तब भी दीपके कक्षा में चले गए और शिक्षकों से अपमानजनक भाषा में बात की। यूजर्स ने सवाल किया कि उन्हें इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसने दिया? साथ ही, स्कूल में इतने मीडियाकर्मियों को साथ ले जाने की क्या जरूरत थी? उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से बिना अनुमति किसी भी स्कूल में प्रवेश करने से रोकने की मांग भी की।
अमित कुमार सिंधी लिखते हैं कि अभिजीत दीपके स्कूल के निरीक्षण के लिए हिंगोली आए और कहा कि वह सरप्राइज इंस्पेक्शन के लिए आए हैं, जैसे कि वे शिक्षा मंत्रालय के कोई अधिकारी हों। लेकिन अगर यह सच में सरप्राइज इंस्पेक्शन था और वे बिना किसी को बताए आए थे, तो उनकी गाड़ी के आते ही ये इतनी भीड़ और मीडिया वहां कैसे पहुंच गई? दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी सरप्राइज इंस्पेक्शन के नाम पर ऐसा ही करते थे और पूरी मीडिया के साथ पहुंच जाते थे।
निरीक्षण के नाम पर कक्षाएं बाधित करना शिक्षा के हित में नहीं
यति शर्मा नाम की एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि यह तथाकथित स्कूल निरीक्षण नहीं, बल्कि मीडिया शो बन चुका है। आज फिर अभिजीत दीपके हिंगोली के एक सरकारी स्कूल में पूरे मीडिया दल और अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए, जबकि कक्षाएं चल रही थीं। सवाल यह है कि उन्हें पढ़ाई के समय स्कूल में घुसकर शिक्षकों और छात्रों को बाधित करने का अधिकार किसने दिया? अगर वास्तव में शिक्षा व्यवस्था की चिंता है, तो निरीक्षण स्कूल समय के बाद भी किया जा सकता है। लेकिन तब कैमरों की भीड़, सुर्खियां और प्रचार नहीं मिलेगा। बच्चों की पढ़ाई और स्कूल का माहौल किसी की व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ाने का मंच नहीं बनना चाहिए। निरीक्षण के नाम पर बार-बार कक्षाएं बाधित करना शिक्षा के हित में नहीं, बल्कि केवल दिखावे की राजनीति और मीडिया स्टंट जैसा प्रतीत होता है।
भाजपा को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
इसी बीच दीपके का एक रिपोर्टर के साथ इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह आरोप लगाते नजर आ रहे हैं कि गरीब बच्चों के पास बुनियादी सुविधाओं वाले स्कूल नहीं हैं, जबकि नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं। इस पर रिपोर्टर ने उनसे कहा कि वह खुद भी विदेश में पढ़े हैं। जवाब में दीपके ने कहा कि मुद्दा भाजपा नेताओं के बच्चों द्वारा टैक्सपेयर्स के पैसे के इस्तेमाल का है। रिपोर्टर ने राहुल गांधी के अमेरिका और यूके में पढ़ने का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या यह गैरकानूनी फंडिंग है। इस पर दीपके ने कहा कि बात राहुल गांधी की नहीं है। रिपोर्टर ने मनीष सिसोदिया और अखिलेश यादव के बच्चों के विदेश में पढ़ने का भी जिक्र किया और सवाल किया कि सिर्फ भाजपा को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
अभिजीत ने एक और अपील की है कि नेताओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें। इसमें भी वह सेलेक्टिव हैं। उन्होंने खुद बोस्टन में पढ़ाई की है।
भाजपा शासित राज्य निशाने पर
दिल्ली में सीजेपी के कथित आंदोलन को आम आदमी पार्टी और वामपंथियों ने पूरी तरह से समर्थन दिया था। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने तो मंच भी साझा किया था। यह साफ दिख रहा है कि सीजेपी भाजपा शासित राज्यों को ही निशाना बना रही है। पहले दिल्ली, फिर महाराष्ट्र और उसके बाद बंगाल। झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन से ये दूर रहे। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आज ही सोशल मीडिया पर कहा कि वह अब राजस्थान के स्कूलों का दौरा करेंगे।

















