भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रे़ड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। यह भारत के लिए एक बड़ा ट्रेड समझौता है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान और सस्ता बनाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को नई बाजार पहुंच मिलेगी और आम लोगों को कुछ चीजें सस्ती पड़ेंगी।
डील के मुख्य फैक्ट्स
यूके ने भारत के 99% टैरिफ लाइन्स पर ड्यूटी खत्म कर दी है। यानी लगभग सारे भारतीय सामान ब्रिटेन में बिना टैक्स के जा सकेंगे।
भारत ने यूके के 90% टैरिफ लाइन्स पर टैरिफ कम या खत्म किए हैं। शुरू में 64% चीजें ड्यूटी-फ्री होंगी।
लंबे समय में इस डील से भारत की जीडीपी में £5.1 बिलियन (करीब 57,000 करोड़ रुपये) और ब्रिटेन की जीडीपी में £4.8 बिलियन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार £25.5 बिलियन बढ़ सकता है।
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भारतीय निर्यातकों को फायदा
भारतीय सामान अब ब्रिटेन में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे क्योंकि टैरिफ खत्म हो गए हैं:
- टेक्सटाइल और गारमेंट्स: 12% तक टैरिफ था, अब जीरो।
- लेदर और फुटवियर: 16% तक, अब जीरो।
- मरीन प्रोडक्ट्स (मछली आदि): 21.5% तक, अब जीरो।
- इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो पार्ट्स: 18% तक, अब जीरो।
- प्रोसेस्ड फूड: 70% तक टैरिफ था, अब जीरो।
- जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स आदि सेक्टर भी मजबूत होंगे।
टेलीकॉम उपकरण, लेदर और दूसरे सेक्टर में निर्यात दोगुना या उससे ज्यादा हो सकता है।
भारतीय उपभोक्ताओं को फायदा
- स्कॉच व्हिस्की: 150% ड्यूटी से घटकर पहले 75%, फिर 10 साल में 40%।
- जिन, ब्रांडी, वोदका जैसी दूसरे अल्कोहल ड्रिंक्स भी सस्ती होंगी।
- ब्रिटिश कारें, ट्रक, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, मेडिकल डिवाइस और कुछ दूसरे सामान सस्ते पड़ेंगे।
प्रोफेशनल्स और कंपनियों के लिए
दोहरा योगदान कन्वेंशन भी लागू हो गया है। इससे 75,000 से ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स और 900+ कंपनियों को फायदा होगा। विदेश में काम करने वाले लोग दोनों देशों में सोशल सिक्योरिटी टैक्स नहीं भरेंगे (अधिकतम 5 साल तक)। IT, फाइनेंस, योगा इंस्ट्रक्टर, शेफ, म्यूजिशियन जैसे क्षेत्रों में प्रोफेशनल्स के लिए मोबिलिटी आसान हुई है। भारत ने सरकारी खरीद के कुछ हिस्से में भी ब्रिटिश कंपनियों को भाग लेने का मौका दिया है।













