गत 4 जुलाई को पुणे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग का समापन हुआ। इस अवसर पर समारोह के मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि हिंदुओं का संगठन किसी के विरोध के लिए नहीं, बल्कि समूचे विश्व के कल्याण के लिए है।
हिंदू होने का गौरव शांति, सत्य और न्याय पर आधारित जीवन का प्रतीक है। हिंदू समाज की संगठित शक्ति संहारक नहीं, सदैव संरक्षक रही है और भविष्य में भी यही उसकी भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि हिंदू समाज की सकारात्मक शक्ति को जागृत करना है। सज्जन शक्ति का संगठन कर समाज-परिवर्तन लाना ही संघ का मूल ध्येय है।
उन्होंने कहा कि संघ के प्रति उपेक्षा, उपहास और प्रशंसा का समय अब पीछे छूट चुका है। आज समाज स्वयं संघ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहभागी बन रहा है। समाज को केवल उपासना तक सीमित न रखकर आचरण के माध्यम से राष्ट्रधर्म की ओर ले जाना आवश्यक है। भारत के उत्थान में ही विश्वकल्याण का मार्ग निहित है।
उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद ने भारत को ‘मृत्युंजय भारत’ कहा है, जबकि स्वामी विवेकानंद ने प्रत्येक भारतीय को ‘अमृतपुत्र’ के रूप में संबोधित किया है। भारत को संसार की कोई शक्ति समाप्त नहीं कर सकती। यह केवल हमारा स्वप्न नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य है।
हिंदू विचार अनादि और अनंत है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हिमांशु शेखर ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग में उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। यहां स्वयंसेवकों को शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक स्तर पर भारत से जोड़ने का उत्कृष्ट कार्य किया जाता है।
विकसित भारत के निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगी। शिक्षा वर्ग में 75 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। इनमें पश्चिम महाराष्ट्र से 52, कोंकण से 17, देवगिरि से 5 तथा विदर्भ से 1 शिक्षार्थी सम्मिलित रहे। वर्ग के संचालन हेतु 11 पूर्णकालिक शिक्षक तथा 15 स्वयंसेवक व्यवस्थापक के रूप में कार्यरत रहे।

















