ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स की कहानी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। और सबसे बढ़कर इसे करने वालों की पहचान पर घमासान जारी है। पश्चिम के वामपंथी और इस्लामिक मीडिया ने पहले तो इस अपराध को पूरी तरह दशकों तक नकारा और जब पीड़िताओं ने आगे आकर कहानी कहना जारी रखा तो बड़ी ही शातिरता से अपराधियों की पहचान को ही विस्तृत और भ्रामक कर दिया।
ग्रूमिंग गैंग्स के लगभग 95% से अधिक अपराधी पाकिस्तानी मूल के मुसलमान हैं, मगर जब मीडिया ने इसे कवर करना शुरू किया, तो उन्होंने इन अपराधियों को पाकिस्तानी मुसलमान नहीं बल्कि एशियाई लोगों का समूह कहा। रिपोर्ट्स बनाई गईं कि “एशियाई गैंग ने ग्रूम करके श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार किया और जिस्म फरोशी के जाल में फेंका!”
मगर क्या यह एशियाई ग्रूमिंग गैंग है? या फिर क्या है सच्चाई?
पाकिस्तानी मुसलमानों के कुकृत्य
श्वेत लड़कियों को ग्रूम करने का सिलसिला आज का दो तीन दशकों का नहीं है, बल्कि यह सिलसिला 1950 के दशक से जारी है। पहले जहाँ ये घटनाएं कम होती थीं, वहीं 90 के दशक में ये बढ़ने लगीं, क्योंकि वोटबैंक के चलते पाकिस्तानी मुसलमानों का राजनीतिक प्रश्रय आरंभ हुआ।
जहां राजनेताओं ने अपने मुंह पर ताला लगाकर रखा तो वहीं इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाले लोगों पर ही उलटी कार्यवाही हुईं। छोटी मासूम श्वेत लड़कियों को बाल वैश्या कहा गया। यह सब होता रहा और पाकिस्तानी मुसलमानों का ग्रूमिंग गैंग अपने कारनामे अंजाम देता रहा।
ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो की खरीखरी
इस मामले पर ब्रिटिश संसद में सबसे मुखर आवाज उठाने वाले सांसद रूपर्ट लो ने अब इसे लेकर खरी बात की है। उन्होनें साफ कहा कि “वे इस गिरोह को वही कहेंगे जो ये हैं, अर्थात पाकिस्तानी मुसलमान रेप गैंग!”
उन्होंने कहा कि हमने सुना कि उन्हें एशियाई ग्रूमिंग गैंग कहा जाता है, जो मेरे हिसाब से एक अपराध है। यह पूरी तरह से गलत है क्योंकि जापानी या अन्य कोई भी एशियाई संस्कृति ऐसा नहीं करती है। वहीं लोगों ने कहा कि इसे रेप गैंग ही कहना होगा, क्योंकि लड़कियों को बहला फुसलाकर फँसाने वाले पाकिस्तानी अंतत: लड़कियों के साथ बलात्कार और जिस्म फरोशी का काम करवाते थे।
छोटी-छोटी लड़कियों से बड़े अपराध करवाए जाते थे, क्योंकि उन्हें नशे का आदी कर दिया जाता था। उनके निशाने पर गरीब या टूटे परिवार की लड़कियां रहती थीं, जो जरा सी संवेदना या मीठी बातों में फंस जाती थीं। और फिर उसके बाद यातनाओं का अंतहीन सिलसिला चलता था।
सोशल मीडिया पर विरोध और समर्थन
रूपर्ट लो की इस बात पर सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी गैंग बिलबिला उठा है और साथ ही इनके समर्थक भी। जैसे ही यह बयान वायरल हुआ, वैसे ही पाकिस्तानी और बांग्लादेश मुसलमान और उनके समर्थक भड़क गए और इस बयान का विरोध सोशल मीडिया पर करने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि लड़कियों के साथ बलात्कार करने में ब्रिटिश श्वेत लोग ही सबसे आगे हैं, क्योंकि वे ही पकड़े गए हैं। रिकार्ड उठा कर देखा जाए।
तो वहीं एक यूजर ने लिखा कि पश्चिम के लोग अपने हर अपराध के लिए किसी न किसी पर आरोप लगाते हैं और भाग जाते हैं, जबकि उनके अपने ही लोग सबसे ज्यादा अपने लोगों का शिकार करते हैं।
लोगों ने एप्सटीन फाइल्स का जिक्र किया और कहा कि पकड़े गए लोगों में ईसाई और यहूदी हैं। लोगों ने कहा कि फिर लेबनोन और गाजा में यहूदी आतंकवाद है और अमेरिका की बमबारी कोरिया को मार रही है तो यह सब ईसाई आतंकवाद है।
तो किसी ने यह भी कहा कि इन्हें पाकिस्तानी मुसलमान गिरोह न कहकर केवल पंजाबी मुसलमानों का गिरोह कहा जाए। बलात्कार वहीं पर आम बात है। लोगों ने इसका समर्थन करते हुए यह भी कहा कि यह ठीक बात है, क्योंकि एशियाई ग्रूमिंग गैंग कहने से मलेशिया, इंडोनेशिया आदि के मुसलमान भी दायरे में आ जाते हैं।
व्हाइट सुप्रीमेसी का लगा दिया तोहमत
वहीं इसका विरोध करने वालों ने इसे व्हाइट सुप्रीमसी कहा। लोगों ने कहा कि व्हाइट सुप्रीमसी कॉम्प्लेक्स ने अमेरिका को एक तीसरी दुनिया के देश में बदल दिया है। एक ने लिखा कि अगर हम अपराधों के स्थान पर धर्म को जोड़ रहे हैं, तो ईसाई, यहूदी की अधिकता वाले गिरोहों ने बलात्कारियों के समूह का नेतृत्व किया है। यही तथ्य है। वह केवल ब्राउन लोगों को कुर्बानी का बकरा बना रहा है।
इस बयान के विरोध में लिखी गई पोस्ट्स हैरान करती हैं, क्योंकि यह सच है कि इन अपराधियों को जेल नहीं मिली, क्योंकि यह अपराध इतनी सफाई से किये गए थे कि लड़कियों को ही दोषी ठहराया गया था। श्वेत लड़कियों के साथ इस आधार पर बलात्कार किया गया था, क्योंकि वे छोटे कपड़े पहनती हैं।
ईसाई लड़कियों को नीचा समझा गया, उन्हें नीचा माना गया और उन्हें कमतर मानते हुए उनके साथ यह सब किया गया।
इस बयान के समर्थन में हालांकि कुछ लोगों ने यह कहा कि इन लड़कियों के अपराधी न्यूयॉर्क के नहीं है, किसी और देश के नहीं हैं, पाकिस्तान के हैं, तो वही कहना चाहिए।

















