कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अभिजीत दीपके से ऐसा लगता है कि खुद कॉकरोच समर्थकों का मोह भंग हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार कॉकरोच विरोध कर रहे हैं। वे दावा कर रहे हैं कि SIR के दौरान गड़बड़ी हुई है। लेकिन, लोग अब इस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। CJP के दो बड़े नेता आशुतोष रांका और सौरभ दास पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। बड़ी बात ये है कि मुंबई में कल CJP की ‘लहराओ तिरंगा’ रैली निकाली गई। पुलिस ने अनुमति दी थी, फिर भी रैली में 50 से कम लोग पहुंचे।
पुलिस की अनुमति और तैयारी
मुंबई पुलिस ने रैली के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की इजाजत दे दी थी। विरोध प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने आजाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज मेट्रो स्टेशन के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए थे।
रैली का माहौल कैसा रहा
सुबह से दोपहर तक मैदान में भवन सिंह जन अधिकार यात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) जैसे संगठनों के कुछ कार्यकर्ता और CJP के स्थानीय लोग ही नजर आए। दोपहर 3 बजे के आसपास प्रदर्शनकारी जुटना शुरू हुए, लेकिन उनकी संख्या वहां पहले से मौजूद कार्यकर्ताओं से भी कम रही।
CJP के मुंबई कोऑर्डिनेटर प्रणव अहीरे भी मौके पर नहीं पहुंचे। शाम 5 बजे के बाद जो लोग थे, वे भी चले गए और मैदान पूरी तरह खाली हो गया।
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लोग क्यों कम आए
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कई लोगों का मानना है कि आधिकारिक जानकारी की कमी सबसे बड़ा कारण रही। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन की घोषणा बहुत देर से की गई। मुद्दे को लेकर स्पष्टता नहीं थी और आगे की रणनीति के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया। CJP के आधिकारिक हैंडल पर भी इस रैली के बारे में कोई पोस्ट नहीं किया गया था। एक छात्रा ने कहा कि CJP के सदस्यों के बीच तालमेल नहीं था। जो लोग पहुंचे, उनमें से कुछ को यह भी साफ नहीं पता था कि मैदान तक कैसे पहुंचना है।
नेताओं की गैर-मौजूदगी पर सवाल
प्रदर्शन में CJP के किसी बड़े नेता के न होने पर भी लोग सवाल उठा रहे थे। मुंबई के आयुष नागरेचा ने कहा, “शायद लोगों को यह डर था कि जैसा दिल्ली पुलिस आंदोलनकारियों के साथ कर रही है, वैसा ही मुंबई पुलिस भी करेगी। इसी वजह से लोग नहीं आए।”प्रदर्शनकारियों ने संगठन से ठोस योजना बनाने की बात कही।















