देवभूमि में 1000 करोड़ की बिजली चोरी, 800 करोड़ मुस्लिम बहुल इलाकों में? क्या ये बिजली चोरी जिहाद है?
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देवभूमि में 1000 करोड़ की बिजली चोरी, 800 करोड़ मुस्लिम बहुल इलाकों में? क्या ये बिजली चोरी जिहाद है?

उत्तराखंड में सालाना करीब 1000 करोड़ की बिजली चोरी हो रही है। विभागीय सर्वे में 800 करोड़ मुस्लिम बहुल इलाकों से जुड़ा बताया गया। हरिद्वार, रूड़की में सबसे ज्यादा लॉस। धामी सरकार ने छापेमारी शुरू की।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Oct 17, 2026, 11:36 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand Energy theft

प्रतीकात्मक तस्वीर (एआई तस्वीर)

देहरादून: देवभूमि जैसे छोटे से  राज्य में एक हजार करोड़ की बिजली चोरी ? ख़ास बात ये कि विभागीय सर्वे मे ये बात जाहिर हुई है कि करीब 800 करोड़ मुस्लिम बाहुल्य इलाको मे हो रही है तो क़्या ये बिजली चोरी जिहाद है?

धामी सरकार ने बिजली चोरी को रोकने के लिए ऊर्जा विभाग के पेच कसने शुरू कर दिए है। इसी लिए इन क्षेत्रों मे छापमारी शुरू हुई है। नैनीताल, हरिद्वार, उधम सिंह नगर देहरादून और पौड़ी जिले मे सर्वाधिक यूनिट लॉस सामने आया है। हरिद्वार जिले में अकेले रुड़की सर्किल मे सबसे ज्यादा 9 सौ मिलियन यूनिट का विद्युत लॉस बताया गया है जो कि 5 सौ करोड़ से अधिक का है। यहां कभी-कभी 80 फीसदी तक बिजली का लॉस हो रहा है, माना जाता रहा है कि यहां मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों में बिजली चोरी और सीना जोरी दोनों चलती है।

राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा असर

उल्लेखनीय है कि उक्त चोरी का खामियाजा राज्य के उन बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है जो कि बिजली का नियमित भुगतान करते है और उन्हें महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। करीब एक हजार करोड़ की बिजली चोरी का आर्थिक बोझ सरकार उठाने की स्थिति में नहीं है और वो इसका बोझ उपभोक्ता पर डाल रही है। उत्तराखंड में सिर्फ आठ शहरों का ही एटीएंडसी लॉस राज्य के अन्य 114 शहरों पर भारी पड़ रहा है।

8 शहरों में 69 फीसद लाइन लॉस

इन आठ शहरों में 27 प्रतिशत से लेकर 69 प्रतिशत तक लाइन लॉस हो रहा है। इसकी एक सबसे बड़ी वजह बिजली चोरी और बिजली बिलों का भुगतान न करना है। इस नुकसान के मामले में पहाड़ का सिर्फ जोशीमठ और अन्य सात शहर हरिद्वार और यूएसनगर के हैं।
जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने ऊर्जा निगम के एटीएंडसी लॉस और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस का ब्यौरा अपने विस्तृत टैरिफ ऑर्डर में जारी किया है।

इसे भी पढ़ें: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अग्निवीरों के पहले बैच के दो जवानों को पीएसी में नौकरी दी

इसमें बताया गया है कि लक्सर, लंढौरा, मंगलौर, सितारगंज, खटीमा, गदरपुर, जसपुर, खटीमा, में सबसे अधिक वित्तीय और ट्रांसमिशन लॉस हो रहे हैं। इसी के साथ ही इन शहरों में सबसे अधिक पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लॉस है और इसका सीधा खामियाजा पूरे उत्तराखंड की जनता को महंगी बिजली के रूप में भुगतना पड़ रहा है। इन आठ शहरों का खामियाजा उत्तराखंड के अन्य 114 शहरों को भुगतना पड़ रहा है।

राज्य में हैं ऊर्जा निगम के 46 डिवीजन

उत्तराखंड में ऊर्जा निगम के 46 डिवीजन हैं। इन 46 डिवीजनों में 19 पहाड़ और 27 मैदान में हैं। इसी तरह कुल 122 सब डिवीजन हैं। इनमें 51 पहाड़ और 71 मैदान में हैं। विधि सदस्य नियामक आयोग की रिपोर्ट है कि टैरिफ ऑर्डर में ऊर्जा निगम को सख्त लहजे में साफ कर दिया गया है कि हर हाल में इस लॉस को कम किया जाए। इसके लिए ऊर्जा निगम के कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। नियमित रूप से कार्यों का ब्योरा लिया जाएगा। एनर्जी ऑडिट सुनिश्चित किया जाएगा। ओएंडएम और कैपिटल मद में होने वाले खर्चों पर भी नजर रखी जाएगी।

बढ़ता जा रहा है नुकसान

वर्ष 2021-22 में ऊर्जा निगम का कुल डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 14.70 प्रतिशत रहा। 2022-23 में ये बढ़ कर 16.39 प्रतिशत पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में ये कुछ कम 15.63 प्रतिशत रहा।

एक हजार करोड़ का नुकसान

ऊर्जा निगम को हर साल वित्तीय और ट्रांसमिशन लॉस से सालाना एक हजार करोड़ का नुकसान होता है। हालांकि, उत्तराखंड में बिजली चोरी रोकने को विभाग की ओर से सख्त अभियान भी चलाया जा रहा है।

तकनीक का सहारा

ऊर्जा विभाग ने तकनीक का सहारा लेकर ये पता लगाना शुरू कर दिया है कि किस ट्रांसफार्मर से बिजली चोरी हो रही है। इसके लिए ड्यूल मीटर लगाए गए है जिससे हर उपभोक्ता की जानकारी अब विभाग के पास रहती है कि बिजली चोरी कहां हो रही है। जानकारी के अनुसार गदरपुर में 30.58 प्रतिशत,जसपुर 27.00, खटीमा 53.00 लक्सर 27.00 लंढौरा 69.40 मंगलौर 47.62 सितारगंज में 27.25 प्रतिशत का लाइन लॉस है।

ज्यादातर मुस्लिम बहुल इलाकों में होती है बिजली चोरी

इसमें गैर करने की बात है कि ये सभी उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र के डिविजन है और इनमें ज्यादातर मुस्लिम बाहुल्य इलाके हैं। यानि मुस्लिमो द्वारा बिजली चोरी जिहाद किया जा रहा है। जहां बिजली चोरों के खिलाफ ऊर्जा विभाग कतराता रहता है और इसकी बड़ी वजह यहां जब जब भी बिजली चोरों के खिलाफ कारवाई हुई एक विशेष समुदाय की संगठित भीड़ ने ऊर्जा विभाग की टीम पर संगठित होकर हमला किया है।

पुलिस की भूमिका?

पिछले कुछ महीनों में हरिद्वार ऊर्जा विभाग ने हिम्मत दिखा कर बिजली चोरी रोकने के लिए पुलिस के साथ मिलकर छापे मारी की थीं, लेकिन बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ जब पुलिस में एफ आई आर की बारी तो क्राइम रेट बढ़ जाएगा इस वजह से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पायी।

यू पी सी एल कुमाऊं चीफ शेखर त्रिपाठी ने बताया कि बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया है, जैसे जैसे पुलिस फ़ोर्स  मिल रही है हमने हल्द्वानी रामनगर काशीपुर मे कार्रवाई करके 250 से अधिक बिजली चोरी के केस दर्ज किए हैं, अभियान जारी है। हमारा संकल्प है कि उत्तराखण्ड में ट्रांसमिशन लॉस को खत्म किया जाए, जिससे राज्य पर आर्थिक बोझ न पड़े।

सीएम धामी के स्पष्ट निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बिजली चोरी को रोकना ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी है। करोड़ों रु का लॉस हो रहा है ये सरकार पर आर्थिक भार है और आम उपभोक्ता पर भी इसका असर हो रहा है। इसको रोकने के लिए सख्ती जरूरी है इसके लिए फोर्स का भी प्रयोग किया जाएगा।

Topics: बिजली चोरीउत्तराखंड बिजली चोरीबिजली चोरी जिहाद
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