पंजाब के मानसा में कैमिस्ट के हाथों मारे गए एंटी ड्रग्स एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के मामले में सरकार ही घिरती नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नशा रोकने के नाम पर आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा किए जा रहे नाटकों को बेनकाब करने का दावा करते हुए कहा कि जिस ड्रग इंस्पेक्टर को 2024 में नशा गिरोह का सरगना बताकर बड़ी रकम और संपत्तियों के ब्योरे के साथ गिरफ्तार किया गया था, उसे मान सरकार ने इसी विभाग के मुख्यालय में महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर रखा है।
उन्होंने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप होने के बावजूद ईडी को जांच में शामिल न करने पर भी मान सरकार से सवाल किया।
यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुनील जाखड़ ने मानसा घटना, नशे के खिलाफ पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली और ड्रग इंस्पेक्टर एस. मित्तल की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी से कई अहम सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सरकार को नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के साथ यह भी बताना चाहिए कि नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के खिलाफ वास्तव में क्या कार्रवाई की गई है।
इंस्पेक्टर से मिली थी करोड़ों की कमाई
जाखड़ ने ड्रग इंस्पेक्टर मित्तल के मामले का हवाला देते हुए कहा कि उसे सितंबर 2024 में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने जेलों में बंद नशा तस्करों से कथित मिलीभगत और ड्रग मनी की लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था। उनके दावे के अनुसार, जांच के दौरान 24 बैंक खातों में जमा 7.09 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए और दो लॉकरों से 1.149 करोड़ रुपये की नकदी, लगभग 260 ग्राम सोना तथा विदेशी मुद्रा मिलने की बात सामने आई थी। इसके अलावा जीरकपुर और राजस्थान में अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था।
शिकायत के बाद मानसा से फाजिल्का कर दी थी बदली
जाखड़ ने कहा कि मानसा में शिकायतों के बाद शीशन मित्तल की तैनाती फाजिल्का में की गई थी और इसी दौरान मोहाली में उसकी गिरफ्तारी हुई। उन्होंने सवाल किया कि 2025 में जमानत मिलने और बहाली के बाद उसे मुख्यालय में दवाओं के सैंपलों से संबंधित कार्रवाई का नियंत्रण कैसे सौंप दिया गया।
संदिग्ध इंस्पेक्टर को दोबारा पद कैसे मिला
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि कल जब वह नशे के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा करें, तो यह भी पता लगाएं कि इस ड्रग इंस्पेक्टर को दोबारा अहम पद पर किसने तैनात किया। जाखड़ ने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले की जांच में ईडी को भी शामिल करना चाहिए था, लेकिन भ्रष्टाचार में डूबी भगवंत मान सरकार ने इस ड्रग इंस्पेक्टर को ‘कमाऊ पूत’ समझते हुए अहम जिम्मेदारी देकर विभाग के मुख्यालय में ही तैनात कर दिया।
डीजीपी से कार्रवाईयों का मांगा ब्योरा
उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी से पूछा कि इस मामले के बाद कितने अन्य ड्रग इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हुई, नशा तस्करों की मनी ट्रेल की जांच कहां तक पहुंची और जेलों में बैठकर नेटवर्क चलाने वाले सरगनाओं के खिलाफ क्या कदम उठाए गए। विदेशी मुद्रा और कथित वित्तीय लेन-देन का हवाला देते हुए उन्होंने पूछा कि मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को क्यों नहीं सौंपा गया।
अभियानों के नाम बदले पर नशा नहीं रुका
जाखड़ ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ टास्क फोर्स, कासो , ऑपरेशन क्लीन, एएनटीएफ और ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ जैसी मुहिमें चलाई गईं, लेकिन सरकार को इनके नतीजों का स्पष्ट हिसाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल मुहिमों के नाम बदलने से नशे की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
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गैंगस्टरों को आप में शामिल करवाया गया
उन्होंने डीजीपी द्वारा मार्च 2026 में 2,868 गैंगस्टरों की गिरफ्तारी, 2,273 हथियारों की बरामदगी और 111 मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने संबंधी दावों पर भी सवाल उठाया कि इन कार्रवाइयों का जमीनी स्तर पर क्या असर पड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को उन गैंगस्टरों की सूची जारी करने की भी चुनौती दी, जिन्हें कथित तौर पर आम आदमी पार्टी में शामिल कराया गया है।
पंजाब में सरकार नाम की चीज नहीं
सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है और इस खालीपन को भरने के लिए लोगों को आगे आना पड़ा है। उन्होंने कहा कि मानसा में पंजाब के लोगों का जमावड़ा इस सरकार की असल सच्चाई बयां करता है और दिखाता है कि उसके शासन में लोग कितने दुखी है।
















