देहरादून: विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार श्रद्धेय अशोक सिंहल के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में भव्य समारोह आयोजित किया गया। विश्व हिन्दू परिषद, उत्तराखंड द्वारा आयोजित इस समारोह में अशोक सिंहल के राष्ट्रसमर्पित जीवन, राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान, संत समाज को संगठित करने के उनके प्रयासों तथा सामाजिक समरसता के लिए किए गए कार्यों का स्मरण किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री माननीय पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अशोक सिंहल ने अपना जीवन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित किया: मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धेय अशोक सिंहल जी को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने की प्रेरणादायी मिसाल है। इतिहास में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं, जिनके विचार और कार्य उनके जीवनकाल के बाद भी समाज को दिशा देते रहते हैं। अशोक सिंहल जी ने अपने संपूर्ण जीवन को भारतीय सांस्कृतिक चेतना के जागरण और राष्ट्रहित के कार्यों के लिए समर्पित कर इस आदर्श को स्थापित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद अशोक सिंहल जी का जीवन सादगी, सहजता और सेवाभाव से परिपूर्ण रहा। उनका व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके पद अथवा प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के लिए किए गए कार्यों से आंका जाता है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता रहेगा।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंहल जी की भूमिका स्मरणीय
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंहल जी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर इस आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप प्रदान करने तक उनके प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर संतों, धर्माचार्यों और समाज के अनेक वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य किया।
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उन्होंने ये भी कहा कि राज्य सरकार सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश के संरक्षण और संवर्धन तथा प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा, कानून का प्रभावी अनुपालन और प्रदेश में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसके माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहन मिल रहा है। हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को समझे, उनके महत्व को पहचाने तथा उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में योगदान दे, यह अत्यंत आवश्यक है।
देवभूमि की धार्मिक विरासत का संरक्षण और विकास हो रहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। राज्य सरकार इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। केदारखंड मंदिर माला मिशन के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से न केवल तीर्थस्थलों पर सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी। इसी क्रम में हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर यमुना स्नान घाट का लोकार्पण किया गया है और वहां मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इस क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुंभ को दिव्यता, भव्यता के अनुरूप आयोजित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ सनातन संस्कृति, भारतीय आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भव्य उत्सव होगा। कुंभ का महत्व केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक है। राज्य सरकार कुंभ के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा इसे दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों और वह एक सुखद, सुरक्षित एवं आध्यात्मिक अनुभव के साथ वापस लौटे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत कर हुए क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश विनायक खांडेकर ने बताए की यह वर्ष अशोक सिंगल की जन्म शादी की वर्ष है विश्व हिंदू परिषद द्वारा सम्पूर्ण भारत वर्ष में शताब्दी वर्ष उद्घाटन आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के उद्देश्य अशोक सिघल के जीवन दर्शन को नई पीड़ित तक पहुंचाना और उनमें राष्ट्रीय हित भारतीय संस्कृत धार्मिक चेतना का संचार करना है।
अशोक सिंहल जी ने देशभर के लोगों को एक सूत्र में बांधा
मुख्य वक्ता चंपतराय ने अशोक सिंहल के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया अशोक सिंहल ने राम जन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से देशभर के लोगों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने संतों, महंतों और विभिन्न अखाड़ों को एक मंच पर लाकर व्यापक धार्मिक एवं सामाजिक जनजागरण का मार्ग प्रशस्त किया। उनके नेतृत्व में राम मंदिर का संकल्प केवल एक धार्मिक विषय नहीं रहा अपितु भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और संगठन शक्ति से जुड़ा व्यापक जनआंदोलन बना।
चंपत राय ने बताया कि जब पंजाब में आतंकवाद के कारण भय और असुरक्षा का वातावरण था, तब अशोक सिंहल ने हरिद्वार से यात्रा निकालकर समाज का मनोबल बनाए रखने तथा लोगों में साहस और संगठन की भावना जगाने का प्रयास किया। समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति तथा परम पूज्य स्वामी रवीन्द्र पुरी जी महाराज के सान्निध्य ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। विशिष्ठ अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पद्म कुमार की उपस्थित रही ।
इसके अलावा कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विश्व हिन्दू परिषद उत्तराखण्ड के प्रांत अध्यक्ष रविदेव आनंद, डॉ शैलेन्द्र जी प्रांत प्रचारक,प्रांत संगठन मंत्री अजय कुमार, प्रांत मंत्री धीरेन्द्र शर्मा, प्रांत कार्याध्यक्ष चिंतामणि सेमवाल के साथ कार्यकर्ता एवं स्थानीय समाज के प्रमुख प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

















