नौगांव लोकसभा सीट (Nagaon Seat) पर भाजपा लगातार दो बार हारने के बाद उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। यहां से भाजपा के देवाशीष शर्मा विजयी हुए हैं। मतदाताओं ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को प्रतिद्वंदी बनाया है और कांग्रेस को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। भाजपा को 2024 में इस सीट पर 37 प्रतिशत मत मिले थे जो इस बार बढ़कर करीब 52 प्रतिशत हो गए हैं। यह पूर्वोत्तर में भाजपा के बढ़ते कदमों को दिखाता है।
नौगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस की बुरी हार पार्टी के समाप्त होते जनाधार को इंगित करती है। कांग्रेस इस सीट पर दो लोकसभा चुनाव 2019 और 2024 में जीती थी। इसके लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के कारण इस सीट पर उपचुनाव हुए। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी यह सीट 50 प्रतिशत से अधिक मत लेकर जीती थी मगर इस बार जमानत भी नहीं बचा सकी और महज 9 प्रतिशत मत ही प्राप्त कर सकी है।
मुस्लिम बहुल सीट पर कांग्रेस की हार
नौगांव लोकसभा सीट मुस्लिम बहुल है। बदरुद्दीन अजमल इसी कारण धुबरी लोकसभा सीट से रकीबुल हुसैन से रिकॉर्ड 1012476 मतों से चुनाव हारने के बाद इस सीट से उपचुनाव लड़कर फिर से सांसद बनना चाह रहे थे। इस सीट पर अजमल का दूसरे पायदान पर आना और कांग्रेस का इतना बुरा प्रदर्शन साबित करता है कि अब मुस्लिम मतदाताओं का कांग्रेस से पूरी तरह मोहभंग हो गया है। मुस्लिम अब कांग्रेस के बदले अन्य दलों को समर्थन दे रहे हैं।
मुस्लिमों का कांग्रेस से मोहभंग होने का कारण
असम सहित पूरे देश का मुस्लिम समाज कांग्रेस द्वारा समाज के साथ किये जाने वाले दोहरे आचरण से नाखुश है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने धुबरी लोकसभा की सीट पर लगातार तीन बार के सांसद बदरुद्दीन अजमल को देश में सर्वाधिक 1012476 मतो से पराजित किया था। यह कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसदों के जीत के अंतर से योग से भी अधिक था। इसके बावजूद रकीबुल हुसैन का कद छोटा करने के लिए कांग्रेस ने हुसैन को संसदीय दल में नेता, उपनेता या व्हिप का कोई भी पद नहीं दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने हुसैन के साथ इतने दोयम दर्जे का व्यवहार तब किया जबकि सांसद बनने से पूर्व असम विधानसभा में हुसैन पार्टी के उपनेता थे। इससे असम का मुस्लिम वर्ग कांग्रेस से आह महसूस कर रहा है। रकीबुल ने असम के दो बार के मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत को उनके विधानसभा क्षेत्र समागुरी में बीस हज़ार मतो से करारी शिकस्त दिया था।
कांग्रेस को असम में जोर का झटका
नौगांव उपचुनाव में कांग्रेस की बुरी हार इस साल संपन्न हुए असम विधानसभा के चुनाव में उसकी हार की अगली कड़ी है। असम की जनता ने कांग्रेस को बहुत ही जोर का झटका दिया है। लोकसभा में उसके उपनेता और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई खुद का विधानसभा का चुनाव हार गए। 2026 का विधानसभा का चुनाव गोगोई जोरहाट लोकसभा सीट के अंतर्गत आनेवाले जोरहाट विधानसभा सीट से लड़े थे और 23182 मतों से भाजपा के हितेन्द्रनाथ गोस्वामी से चुनाव हार गए थे तब जबकि लोकसभा चुनाव में इस सीट से गगोई 12130 मतों से आगे रहे थे।
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का घटता जनाधार
लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस का जनाधार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के उपनेता गोगोई को विधानसभा चुनाव में हार का समाना करना पड़ रहा है। पुडुचेरी के लोकसभा सांसद वी वैथिलिंगम विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत गंवा देते हैं। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी का तीसरे पायदान पर आना कांग्रेस पार्टी के विलुप्त होते जनाधार को दर्शाता है।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का बढ़ता दायरा
नौगांव उपचुनाव में बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी को नया राजनीतिक जीवन मिला है। अजमल बिंनाकाण्डी विधानसभा सीट से विधायक भी हैं और उनके पार्टी के दो विधायक वर्तमान विधानसभा में हैं। नौगांव लोकसभा सीट पर पहली बाबर चुनाव लड़कर अजमल ने कांग्रेस को पूरी तरह पीछे धकेल दिया। बुरी हार को देखते हुए कांग्रेस के कई विधायक पार्टी छोड़कर अजमल के खेमे में जा सकते हैं। असम के पड़ोसी राज्य मेघालय में कांग्रेस के सभी पांच विधायक सत्तारूढ़ एनपीपी में शामिल होकर कांग्रेस को आंध्र प्रदेश, दिल्ली, सिक्किम, नागालैंड की तरह ही मेघालय में भी शून्य पर लाकर खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस, सीजेपी और विपक्ष के आंदोलन का उलटा असर
कांग्रेस, सीजेपी और विपक्ष ईवीएम और अपनी कई मांगों को लेकर दिल्ली और अन्य स्थानों पर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। मगर असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी सहित देश के अन्य प्रदेशों की जनता ने स्पष्ट बता दिया है कि इनका प्रदर्शन निरर्थक है और अपने मतदान के जरिये अच्छे से साबित भी कर दिया है।















