हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है। आइए जानते हैं शनिवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
10 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: शनिवार
- माह: आश्विन
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- अमावस्या तिथि: रात 9 बजकर 20 मिनट तक
- इंद्र योग: रात 10 बजकर 3 मिनट तक
- हस्त नक्षत्र: रात 9 बजकर 43 मिनट तक
- विशेष: सर्वपितृ अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या
शुभ मुहूर्त
10 अक्टूबर को श्राद्ध और धार्मिक कार्यों के लिए पंचांग में बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:18 से 3:37 बजे तक
शहरों में राहुकाल का समय
- दिल्ली: सुबह 9:14 से 10:41 बजे तक
- मुंबई: सुबह 9:29 से 10:57 बजे तक
- लखनऊ: सुबह 8:58 से 10:26 बजे तक
- भोपाल: सुबह 9:11 से 10:39 बजे तक
- चंडीगढ़: सुबह 9:16 से 10:43 बजे तक
- कोलकाता: सुबह 8:27 से 9:55 बजे तक
- अहमदाबाद: सुबह 9:30 से 10:58 बजे तक
- चेन्नई: सुबह 8:57 से 10:27 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त
दिए गए पंचांग के अनुसार, सूर्योदय सुबह 6:03 बजे और सूर्यास्त शाम 6:32 बजे होगा।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जिन लोगों को पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जो पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए, वे इस दिन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार श्राद्ध कर सकते हैं। जरूरतमंदों को भोजन और वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
नोट: मुहूर्त और राहुकाल के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। धार्मिक कार्यों से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।











