नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में न्याय, महिला सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर जारी बहस के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई आंतरिक समिति (IC) की जाँच रिपोर्ट और उसकी अनुशंसाओं के आधार पर की गई है। इस घटनाक्रम के बाद परिसर में न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
न्याय और जवाबदेही की दिशा में अभाविप का स्वागत
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), जेएनयू ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे परिसर में न्याय एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में महिलाओं की सुरक्षा, विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा और किसी भी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अभाविप का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में न्यायपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जाँच और उन पर समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। संगठन ने इन मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाई है और संबंधित विषयों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। संगठन के अनुसार, वर्तमान कार्रवाई जवाबदेही की दिशा में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभाविप जेएनयू ने मीडिया संवाद आयोजित करने की घोषणा की है। इसके माध्यम से संगठन अपनी भूमिका, अब तक किए गए प्रयासों तथा भविष्य की मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रखेगा। साथ ही, परिसर में न्याय, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर संगठन का पक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा। अभाविप ने मीडिया प्रतिनिधियों को संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। संगठन की आगामी मांगों और इस प्रकरण पर उसके विस्तृत पक्ष के सामने आने के बाद घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश और आंतरिक समिति की अनुशंसाओं के आधार पर हुई इस कार्रवाई ने जेएनयू में जवाबदेही तथा सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को फिर से प्रमुखता से सामने ला दिया है।

















