मुस्लिम बहुल रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। भाजपा ने हुंमायू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को 70 हजार से अधिक वोटों से हराया है। कांग्रेस और अन्य दलों के प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई है।भाजपा की ओर से सखाराव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी के गुलाम नबी आजाद को पटखनी दी है।
इस जीत को शुभेंदु अधिकारी सरकार के कामकाज को जनता के स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा जा रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 58,876 मतो के अंतर से चुनाव हारी थी मगर इतने समय के अंतराल के बाद हुए उपचुनाव में 75000 से अधिक मतों से जीत दर्शाती है कि भाजपा ने कितनी तेजी से पश्चिम बंगाल की जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाया है।
भाजपा का रेजीनगर में बढ़ता जनाधार
रेजीनगर विधानसभा सीट पर 2026 विधानसभा के आम चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर (बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की थी) ने भाजपा को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी । उपचुनाव में जनता ने आम जनता उन्नयन पार्टी को पूरी तरह से नकारते हुए भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाया। लोकसभा चुनाव में रेजीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा तीसरे पायदान पर आयी थी। इसके बावजूद भाजपा की इतनी बड़ा जीत लोकसभा चुनाव के बाद जनता का भाजपा में बढ़ते जनाधार को दर्शाती है।
परिवारवाद के दिन लदे
हुमायूं कबीर द्वारा अपना सीट खाली करने के बाद अपने पुत्र को निर्वाचित करवाने को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया । इस सीट के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि देश की जनता अब परिवारवाद से ऊब गई है। अब जनहित में काम करनेवाले को ही अपना प्रतिनिधि चुन रही है। असम में 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद धुबरी में देश में सर्वाधिक मतों से विजयी रकीबुल अपने द्वारा खाली किये गए सामगुरी विधानसभा सीट पर अपने पुत्र तंज़ील हुसैन को उतारा था, उन्हें भी जनता ने पूरी तरह से नकारते हुए भाजपा के डिपलू रंजन शर्मा को भारी मतो से विजयी बनाया था।
पश्चिम बंगाल अपनी चुनावी परिपाटी पर
पश्चिम बंगाल में जिस भी दल की सरकार बनती है वह लम्बे समय तक सत्ता में रहती है। बंगाल अपने इसी इतिहास हो फिर से दोहराने की ओर बढ़ रहा है। 1977 से 2011 तक लगातार सात विधानसभा चुनाव में वाम दलों ने स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई थी, वही उसके बाद ममता बनर्जी ने लगातार तीन बार सरकार बनाने में कामयाब हुई थी।
राज्य में हुए दो विधानसभा की सीटों के उपचुनाव ने यह साबित कर दिया हैं की पश्चिम बंगाल अपने उसी परिपाटी को बनाये रखने की ओर अग्रसर है। कई राजनितिक प्रेषक पश्चिम बंगाल को भाजपा के लिए अगला गुजरात बता रहे है। गुजरात में भाजपा लगातार सात विधानसभा का चुनाव जीतकर आठवीं जीत के मुहाने पर खड़ा हैं ।
















