लखनऊ, 4 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सपा ने भले ही लोहिया के आदर्शों के नाम पर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में उसकी तीन सरकारों के कार्यकाल को देखें तो काम कम और कांड-कारनामे ज्यादा नजर आते हैं। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री चौधरी ने कहा कि सपा के राजनीतिक सफर की शुरुआत से ही उसका इतिहास गंभीर विवादों से जुड़ा रहा है। 1994 के रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाएं, अगले वर्ष 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड कि घटना भी सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सत्ता का केंद्र परिवार के भीतर रहा। डिंपल यादव को निर्विरोध निर्वाचित कराने के लिए उनके प्रतिद्वंद्वियों को कथित धमकी दिए जाने, मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 50 विभाग अपने पास रखने तथा बिजली आपूर्ति में चुनिंदा वीआईपी जिलों को प्राथमिकता दिए जाने जैसे मुद्दों ने तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इसी दौर में सपा कार्यकर्ताओं द्वारा थानों में हस्तक्षेप और कानून अपने हाथ में लेने के आरोप भी सामने आते रहे।
यादव सिंह प्रकरण की हुई है सीबीआई जांच
यादव सिंह प्रकरण पर उन्होंने कहा कि मामले में CBI जांच और संपत्तियों की जांच हुई। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच यश भारती पुरस्कारों के वितरण को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुरस्कारों के वितरण में पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए चौधरी ने तत्कालीन मंत्री आजम खान पर अधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप और एक विशेष वर्ग के लोगों को बचाने पर कहा कि इस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों के विस्थापन की बात सामने आई साथ ही सहारनपुर दंगे में तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
मुफ्त लैपटॉप योजना पर उठाया सवाल
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने मुफ्त लैपटॉप योजना और बेरोजगारी भत्ते को लेकर सपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि लगभग 15 लाख लैपटॉप की खरीद के बावजूद करीब 6 लाख ही वितरित किए गए और CAG ऑडिट में इससे जुड़े तथ्य सामने आए। बेरोजगारी भत्ते के नाम पर 20.58 करोड़ रुपये के वितरण के मुकाबले प्रचार पर 15.06 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि युवाओं के नाम पर योजनाएं बनाना अलग बात है और उनका पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना अलग बात है।
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 2013 से 2016 के बीच गन्ना किसानों के राज्य परामर्श मूल्य को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठे और तीन वर्षों तक यह 280 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर रहा तथा गन्ना ब्याज माफी के मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद किसानों को राहत मिली।
JPNIC परियोजना भी सवालों के घेरे में
JPNIC परियोजना को लेकर श्री चौधरी ने आरोप लगाया कि 265 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई और 821 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही व सपा द्वारा नियमों और टेंडर प्रक्रिया में कथित उल्लंघनों किया गया। महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर श्री पंकज चौधरी ने बदायूं कांड, कैराना पलायन और पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड को लेकर सपा सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इन घटनाओं ने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सपा के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर से जुड़े सवालों का जबाव सामने आना चाहिए
श्री पंकज चौधरी ने कहा कि सपा के 34 वर्षों के राजनीतिक सफर में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, भर्ती, किसान, महिला सुरक्षा और परिवारवाद से जुड़े सवालों का जवाब जनता के सामने होना चाहिए। प्रेस वार्ता में उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से ‘सपा के पाप का घड़ा’ फोड़ा और कहा कि सपा के इन 34 वर्षों के राजनीतिक रिकॉर्ड का हिसाब अब जनता के सामने है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन, कानून का राज, विकास, गरीबों और युवाओं के हित तथा पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रही है। इसके विपरीत, सपा के शासनकाल से जुड़े इन मामलों का जवाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 34 वर्षों के राजनीतिक सफर का हिसाब अब जनता के सामने है और उत्तर प्रदेश की जनता विकास, सुशासन और कानून के राज को प्राथमिकता दे रही है।

















