छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आने के बाद से मिशनरियों के मंसूबों पर सरकार ने शिकंजा कसा है। लेकिन, फिर भी ये लोगों को बहला-फुसलाकर ईसाई बनाने के कुकृत्य में सम्मलित रहते हैं। हालांकि अब लोग जागरूक हैं और वे इन्हें करारा सबक सिखा रहे हैं। ताजा मामले बस्तर संभाग के सुकमा जिले का है, जहां एक गांव की ग्राम सभा ने अपना फैसला सुनाया है। सुकमा के पोलमपल्ली क्षेत्र के पुनपल्ली गांव में हाल ही में हुई ग्राम सभा की बैठक में चर्च बनाने, प्रार्थना सभा करने और मतांतरित लोगों के शव दफनाने के लिए गांव की जमीन न देने का फैसला लिया है।
यह बैठक दो अक्टूबर को हुई थी। ग्राम सभा ने साफ कहा कि गांव की सामुदायिक जमीन का एक इंच भी हिस्सा ईसाई समुदाय या धर्म बदलने वाले लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या फेथ हीलिंग जैसी गतिविधियों के लिए नहीं दिया जाएगा। साथ ही मतांतरित व्यक्तियों के शव गांव की जमीन पर दफनाने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
गांव के प्रवेश पर भी रोक
ग्राम पंचायत के सूचना पटल पर यह फैसला लिखकर लगा दिया गया है। इसमें पादरी और ईसाई धर्म प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक का जिक्र है। नोटिस में कहा गया है कि धर्मांतरण, प्रार्थना सभा या संबंधित गतिविधियों के लिए ये लोग गांव में नहीं आ सकेंगे। जनपद सदस्य मड़कम भीमा ने इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा ने यह कदम गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाज और सामाजिक विरासत को बचाने के लिए उठाया है। फैसला सामाजिक एकता और समुदाय के हित को ध्यान में रखकर लिया गया।
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कानूनी आधार क्या है
ग्राम सभा ने अपने इस निर्णय के लिए संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ के पेसा कानून 2022 का हवाला दिया है। ये प्रावधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी परंपरा और जमीन संबंधी मामलों में ज्यादा अधिकार देते हैं।
बस्तर में पहले भी ऐसे मामले
बस्तर इलाके में ऐसी बातें पहले भी सामने आ चुकी हैं। फरवरी 2024 में बस्तर के छिंदवाड़ा में ग्राम सभा ने मतांतरित लोगों के अंतिम संस्कार पर रोक का प्रस्ताव पास किया था। जनवरी 2025 में एक ईसाई परिवार को अपने पिता का अंतिम संस्कार गांव से बाहर करना पड़ा था।
2025 में बस्तर और कांकेर के कुछ गांवों में पादरियों के प्रवेश पर रोक के बोर्ड लगाने का मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए पक्षों को वैधानिक अधिकारियों के पास जाने को कहा। जून 2026 में कांकेर जिले की 26 ग्राम सभाओं की संयुक्त बैठक में भी चर्च, प्रार्थना सभा और पादरियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव पारित होने की खबर आई थी।
पुनपल्ली ग्राम सभा का यह फैसला बस्तर के आदिवासी इलाकों में अपनी परंपरा और पहचान को लेकर चल रही चर्चा का हिस्सा है। गांव वालों का कहना है कि वे अपनी पुरानी व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं।











