विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत-रूस संबंधों पर बड़ी बात कही है। उन्होंने साफ कहा कि जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के साथ खड़ी थी, तब रूस ने भारत का साथ दिया। उनके मुताबिक भारत और रूस के रिश्ते बहुत पुराने और मजबूत हैं। नई दिल्ली के लिए मॉस्को से रिश्ते सिर्फ आज की हालात से तय नहीं होते।
रूस का 70 साल का साथ
जयशंकर ने बताया कि पिछले 70 सालों में रूस ने कश्मीर समेत चार अहम मुद्दों पर भारत का समर्थन किया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस का वीटो। 20 फरवरी 1957 को ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, ब्रिटेन और अमेरिका ने कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव रखा था। इसमें कश्मीर में अस्थायी संयुक्त राष्ट्र फोर्स भेजने की बात कही गई थी। प्रस्ताव को नौ देशों का समर्थन मिला, लेकिन तब के सोवियत संघ (आज का रूस) ने वीटो कर दिया। इस वजह से प्रस्ताव पास नहीं हो पाया।
1965 और 1971 के युद्धों में क्या हुआ
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया। उसने भारत पर दबाव बनाने के लिए अपनी सीमा पर सैनिक तैनात कर दिए थे। ईरान और तुर्किये ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया। ईरान ने पाकिस्तान को हथियार और ईंधन तक दिया।
1971 के बांग्लादेश युद्ध में अमेरिका पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा था। उसने अपना युद्धपोत बंगाल की खाड़ी की तरफ भेजा था। चीन भी पाकिस्तान के साथ था। ईरान ने भी पाकिस्तान की मदद की। उसने हथियार जुटाने और सैन्य सामान उपलब्ध कराने में सहयोग किया।
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यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख
जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत, कूटनीति और समझौते का रास्ता अपनाना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार यही बात कह चुके हैं। 2022 में उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि आज का समय युद्ध का नहीं है। जयशंकर ने बताया कि भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत की है। इसमें ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा अहम बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने जैसे मुद्दे शामिल रहे।
अमेरिका पर टिप्पणी
एक हफ्ते में जयशंकर ने दूसरी बार अमेरिका पर टिप्पणी की। 29 सितंबर को न्यूयॉर्क के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में उन्होंने कहा था कि भारत की चिंताओं में एक पाकिस्तान से आने वाला आतंकवाद है। अगर अमेरिका इस चिंता को नहीं समझता तो इसका असर भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ता है। 4 अक्टूबर को जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में दो बड़े बदलाव दिख रहे हैं। अमेरिका अपनी नीतियों के कारण दुनिया में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। वहीं चीन का बढ़ता असर देशों के बीच मुकाबला बढ़ा रहा है।











