महानतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने अकबर की धमकियां की धज्जियाँ उड़ा कर,हिंदू नारी का सामर्थ्य दिखाया
October 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

महानतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने अकबर की धमकियां की धज्जियाँ उड़ा कर,हिंदू नारी का सामर्थ्य दिखाया

रानी दुर्गावती का गौरवशाली इतिहास जानें। 16 वर्ष शासन, 15 युद्धों में विजय, गोंडवाना साम्राज्य का स्वर्ण युग और नर्रई युद्ध में स्वाभिमानपूर्ण बलिदान। अकबर की चुनौती को कैसे स्वीकार किया, पढ़ें पूरी कहानी।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा — edited by कुलदीप सिंह
Oct 5, 2026, 08:27 am IST
inविश्लेषण
कई बार मुस्लिम आक्रांताओं को युद्ध के मैदान में चटाई धूल

कई बार मुस्लिम आक्रांताओं को युद्ध के मैदान में चटाई धूल

भारत के हृदय स्थल में स्थित त्रिपुरी के महान कलचुरि वंश का 13 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अवसान हो गया था। फलस्वरूप सीमावर्ती शक्तियां इस क्षेत्र को अपने अधीन करने के लिए लिए लालायित हो रही थीं। अंततः इस संक्रांति काल में एक वीर योद्धा जादोंराय (यदुराय) ने, तिलवाराघाट निवासी एक महान् ब्राह्मण सन्यासी सुरभि पाठक के भगीरथ प्रयास से, त्रिपुरी क्षेत्रांतर्गत, गढ़ा-कटंगा क्षेत्र में गोंड वंश की नींव रखी। कालांतर में यह साम्राज्य महान गोंडवाना साम्राज्य के नाम से जाना गया। गोंडवाना साम्राज्य का चरमोत्कर्ष का प्रारंभ 48वीं पीढ़ी के महानायक राजा संग्रामशाह (अमानदास) के समय हुआ और इनकी पुत्रवधू वीरांगना रानी दुर्गावती का समय गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्ण युग के नाम से जाना जाता है।

रानी दुर्गावती के इतिहास के साथ खिलवाड़

भारतीय इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह रहा है कि रानी दुर्गावती एवं गोंडवाना साम्राज्य के महान इतिहास को एक छोटी सी कहानी बना डाला और पटाक्षेप कर दिया। रानी दुर्गावती का साम्राज्य लगभग इंग्लैंड के बराबर था। 16 वर्ष का शासन काल था, पूरे भारत में एकमात्र राज्य जहाँ कर, सोने के सिक्के एवं हाथियों तक में चुकाया गया था। जिसके चरित्र, शौर्य, पराक्रम, प्रबंधन और देशभक्ति के सामने, आस्ट्रिया की मारिया थेरेसा, रुस की कैथरीन द्वितीय और इंग्लैंड की एलिजाबेथ प्रथम, रजिया बेग़म और नूरजहाँ, समकक्ष नहीं हैं।

रानी दुर्गावती के सामने अकबर चट्टान बनकर खड़ी हुईं

रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और वीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस अकबर के सामने बड़े-बड़े राजाओं ने घुटने टेक दिए थे। उस अकबर की चुनौती को वीरांगना रानी दुर्गावती ने दिलेरी के साथ स्वीकार किया। इसलिए अब शोधपूर्ण वास्तविक इतिहास लिखा जाना अनिवार्य है, ताकि रानी दुर्गावती और गोंडवाना साम्राज्य साम्राज्य के इतिहास के साथ न्याय हो और वर्तमान पीढ़ी और भावी पीढ़ी में गर्व और गौरव की अनुभूति हो तथा राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हो।

विश्व की श्रेष्ठ वीरांगनाओं और नारी शक्ति के आदर्श प्रतिमानों के आलोक में सोलहवीं शताब्दी के इतिहास के पन्नों को पलटने पर भारत की एक ऐंसी वीरांगना का नाम उभरता है, जो तुलनात्मक दृष्टि से विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना होने का दर्जा प्राप्त करती हैं, उन्हें भारतीय इतिहास में राजमाता वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम से जाना जाता है। रानी दुर्गावती का गौरवशाली इतिहास बुंदेलखंड के कालिंजर से प्रारम्भ होकर गढ़ा कटंगा के गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्ण युग तक पहुँचता है। रानी दुर्गावती 16 वर्ष तक गढ़ा-कटंगा के गोंडवाना साम्राज्य की साम्राज्ञी रहीं। एतदर्थ वीरांगना रानी दुर्गावती के इतिहास के पृष्ठ गोंडवाना से खोलते हैं।

बहुत बड़ा था गोंडवाना साम्राज्य

गोंडवाना साम्राज्य के गढ़ जबलपुर, सागर, दमोह, सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, नागपुर, होशंगाबाद, भोपाल, और बिलासपुर तक फैले हुए थे। समकालीन इतिहासकारों की माने तो 70 हजार गांव थे जिनकी संख्या रानी दुर्गावती के समय 80 हजार तक हो गई थी। किलों की संख्या 57 परगनों की संख्या 57 हो गई थी। कतिपय इतिहासकारों ने 56 सूबों का उल्लेख किया है। अकबर का दरबारी लेखक अबुल फजल लिखता है कि 23 हजार गांव में प्रत्यक्ष प्रशासन था और शेष सामंतों के अधीन करद गांव थे।

गोंडवाना या गढ़ा-कटंगा विस्तृत और संपन्न राज्य हो गया था, इसके पूर्व में झारखंड, उत्तर में था या रीवा का राज्य, दक्षिण में दक्षिणी पठार और पश्चिम में रायसेन प्रदेश था। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम 300 मील तथा चौड़ाई उत्तर से दक्षिण 160 मील थी। इन सीमाओं को रानी दुर्गावती ने और बढ़ा लिया था। गोंडवाना साम्राज्य का क्षेत्रफल लगभग इंग्लैंड के क्षेत्रफल जितना हो गया था। विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दिल्ली के सुल्तान या पड़ौस के कोई अन्य राजा गोंडवाना पर अपना प्रभुत्व स्थापित नहीं कर सके।

उत्तर भारत में मुगल शासक हुमायूँ को शेरशाह ने बिलग्राम (कन्नौज) के युद्ध में परास्त कर भारत से बाहर खदेड़ दिया और साम्राज्य विस्तार के लिए उद्यत हो गया। शेरशाह की धर्म की आड़ में विस्तारवादी नीति से कालिंजर के महान शासक कीरत सिंह चिंतित हो गए थे, इसलिए शेरशाह सहित अन्य मुस्लिम आक्राताओं को मुँह तोड़ जवाब देने के लिए गोंडवाना साम्राज्य के महान् राजा संग्रामशाह से मित्रता का प्रस्ताव रखा, जो एक वैवाहिक संबंध के रुप में फलीभूत हुआ। वीरांगना रानी दुर्गावती का जन्म कालिंजर के किले में राजा कीरत सिंह के यहाँ 5 अक्टूबर सन् 1524 को दुर्गाष्टमी के दिन हुआ था, उनकी माता का नाम कमलावती था।

राजा संग्रामशाह और उनके सुपुत्र दलपतिशाह , राजा कीरतसिंह की सुपुत्री वीरांगना दुर्गावती के स्त्रियोचित सौंदर्य,शिष्टता, मधुरता और पराक्रम से बहुत प्रभावित थे, इसलिए संग्रामशाह ने कीरतसिंह से उनकी सुपुत्री का अपने पुत्र दलपतिशाह के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा, जो स्वीकार्य हुआ।दुर्भाग्य से सन् 1541 में राजा संग्रामशाह का निधन हो गया है बावजूद इसके राजा कीरतसिंह ने अपना वचन निभाया और सन् 1542 अपनी सुपुत्री वीरांगना दुर्गावती का विवाह, राजा दलपतिशाह से कर दिया।यह विवाह सामाजिक समरसता का अद्वितीय उदाहरण है।

सन् 1545 में शेरशाह ने कालिंजर पर आक्रमण किया और मारा गया जिसमें रानी दुर्गावती की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस युद्ध में राजा कीरतसिंह का भी बलिदान हुआ। जिससे वीरांगना दुर्गावती को धक्का लगा परंतु सन् 1548 में पति दलपतिशाह की आकस्मिक मृत्यु ने वीरांगना पर वज्रपात कर दिया। इस वज्रपात से वीरांगना दुर्गावती विचलित हुईं पर शीघ्र ही उन्होंने साहस के साथ अपने 5 वर्षीय अल्पवयस्क सुपुत्र वीर नारायण की ओर से गोंडवाना साम्राज्य की सत्ता संभाल ली। इस तरह गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती का महान् साम्राज्ञी के रुप में उदय हुआ। वीरांगना रानी दुर्गावती का जल प्रबंधन और अर्थनीति आज भी विश्व के लिए मार्गदर्शी है, परंतु युद्ध नीति विलक्षण थी।

16 युद्धों में से 15 में विजयी हुईं थी रानी दुर्गावती

वीरांगना रानी दुर्गावती ने 16 बड़े युद्ध लड़े। 16 युद्धों में से 15 युद्धों विजयी रहीं, जिसमें 12 युद्ध मुस्लिम आक्राताओं से लड़े गये, उसमें से भी 6 मुगलों के विरुद्ध लड़े गये। वैंसे गोंडवाना में प्रचलित है कि छोटे बड़े सभी युद्धों की बात की जाए तो वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े थे जिसमें 51 युद्धों में उन्होंने विजय प्राप्त की थी। गोंडवाना की साम्राज्ञी के रुप में सत्ता संभालते ही मांडू के अय्याश शासक बाजबहादुर ने विधवा महिला जानकर गोंडवाना साम्राज्य दो बार आक्रमण किए परंतु रानी दुर्गावती ने दोनों बार जम कर दुर्गति कर डाली। प्रथम आक्रमण में वीरांगना रानी दुर्गावती ने बाजबहादुर के चाचा फतेह खां को द्वंद्व युद्ध में मार डाला और द्वितीय आक्रमण में बाजबहादुर को मांडू राजधानी घर तक खदेड़ा। बाजबहादुर जीवन भर शरणागत रहा। आगे मालवा के सूबेदार शुजात खाँ की कभी हिम्मत नहीं हुई। रानी दुर्गावती की युद्ध नीति से ही, शेरखां (शेरशाह) कालिंजर अभियान में मारा गया। कुछ दिनों बाद मुगलों ने पानीपत के द्वितीय युद्ध के उपरांत पुनः सत्ता हथिया ली और अकबर शासक बना। शीघ्र ही उसने येन केन प्रकारेण साम्राज्य विस्तार करना आरंभ कर दिया।

रानी दुर्गावती के गोंडवाना साम्राज्य की संपन्नता और समृद्धि की चर्चा कड़ा और मानिकपुर के सूबेदार आसफ खान द्वारा मुगल दरबार में की गई। धूर्त, लंपट और चालाक अकबर लूट और विधवा रानी को कमजोर समझते हुए बदनीयती से बलात् गोंडवाना साम्राज्य हथियाने के उद्देश्य से रानी को आत्मसमर्पण के लिए धमकाया और अपने दूत से यह परवाना लिख कर भेजा-

“अपनी सीमा राज की,
अमल करो परमान।
भेजो नाग सुपेत सोई,
अरु आधार दीवान।।

परंतु गोंडवाना की निर्भीक, स्वाभिमानी, स्वतंत्र प्रिय और स्व की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती नहीं मानी।

तब अकबर का एक और संदेश आया कि स्त्रियों का काम रहंटा कातने का है तो रानी ने जवाब में अपने संदेश के साथ एक सोने का पींजन भेजा और कहा कि आपका भी काम रुई धुनकने का है। अकबर बौखला गया और उसने आसफ खान को गोंडवाना साम्राज्य की लूट और उसके विनाश के लिए रवाना किया। आसिफ खान के साथ पांच अन्य मुगल सेनानायक भी सेना में आकर मिल गए थे।

वीरांगना रानी दुर्गावती को हर बात का पूर्वानुमान था, इसलिए उन्होंने अकबर द्वारा भेजे गए दो गुप्तचरों क्रमशः गोप महापात्र और नरहरि महापात्र को अपनी ओर मिला लिया था । दोनों गुप्तचरों ने अकबर की योजना और आसफ खाँ के आक्रमण के बारे में रानी दुर्गावती को सब कुछ बता दिया।

वीरांगना रानी दुर्गावती सतर्क हो गईं और सिंगौरगढ़ में मोर्चा बंदी कर ली। आसफ खान 6 हजार घुड़सवार सेना 12 हजार पैदल सेना एवं तोपखाने तथा स्थानीय मुगल सरदारों के साथ सिंगोरगढ़ आ धमका। इधर रानी दुर्गावती के साथ, उनके पुत्र वीर नारायण सिंह, आधार सिंह, हाथी सेना के सेनापति अर्जुन सिंह बैस, कुंवर कल्याण सिंह बघेला, चक्रमाण कलचुरि, महारुख ब्राह्मण, वीर शम्स मियानी, मुबारक बिलूच,खान जहान डकीत, महिला दस्ता की कमान रानी दुर्गावती की बहन कमलावती और पुरा गढ़ की राजकुमारी (वीर नारायण सिंह की होने वाली पत्नी) संभाली। अविलंब युद्ध आरंभ हो गया।

★*सिंगोरगढ़ का प्रथम युद्ध★- आसफ खान ने आत्मसमर्पण के लिए कहा, वीरांगना दुर्गावती ने कहा कि किसी शासक के नौकर से इस संदर्भ में बात नहीं की जा सकती है। वीरांगना रानी दुर्गावती ने भयंकरआक्रमण किया, मुगलों के पैर उखड़ गये आसफ खान भाग निकला।

★सिंगौरगढ़ का द्वितीय युद्ध★ – प्रथम युद्ध की तरह पुनः मुगलों के वही हाल हुए, लेकिन मुगलों का तोपखाना पहुंच गया और रानी को जानकारी लग गयी उन्होंने गढ़ा में मोर्चा जमाया और सिंगोरगढ़ छोड़ दिया।

★सिंगौरगढ़ का तृतीय युद्ध★ *- सेनानायक अर्जुन सिंह बैस ने मुगलों के पैर उखाड़ दिए परंतु मुगलों का तोपखाना भारी पड़ गया। इसलिए सिंगोरगढ़ का किला एक रणनीति के अंतर्गत छोड़ दिया गया।

★चंडाल भाटा (अघोरी बब्बा) का युद्ध★ – यह चौथा युद्ध था जिसका उद्देश्य मुगल सेना को पीछे हटाना था ताकि वीरांगना रानी दुर्गावती गढ़ा से बरेला के जंगलों की ओर निकल जाए।चंडाल भाटा के मैदान में घमासान युद्ध हुआ और सेनानायक अर्जुन सिंह बैस ने आसफ खाँ को बहुत पीछे तक खदेड़ दिया। वीरांगना ने तोपखाने से निपटने के लिए, एक शानदार रणनीति बनायी जिसके अनुसार बरेला (नर्रई) के सकरे और घने जंगलों के मध्य मोर्चा जमाया ताकि तोपों की सीधी मार से बचा जा सके।

★गौर नदी का युद्ध★ – गौर नदी पर आसफ खान ने तोपखाना ले जा के लिए पुल का निर्माण करवाया, जिसे ध्वस्त करने के लिए गये महारथी अर्जुन सिंह बैस लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन के 15वें बड़े और मुगलों से 5वें युद्ध में 22 जून 1564 को स्वतंत्रता,स्वाभिमान और शौर्य की देवी – विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने प्रात: सेनानायक अर्जुन सिंह बैस के बलिदान होने का समाचार मिलते ही “अर्द्धचंद्र व्यूह”बनाते हुए “गौर नदी के युद्ध” में आसफ खाँ सहित मुगलों की सेना पर भयंकर आक्रमण किया और पुल तोड़ दिया ताकि तोपखाना नर्रई (बरेला) न पहुँच सके। मुगल सेना तितर-बितर बितर हो गई जिसको जहां रास्ता मिला भाग निकला। वीरांगना रानी दुर्गावती ने पुन:रात्रि में आक्रमण की योजना बनाई परंतु सरदारों की असहमति के कारण निर्णय बदलना पड़ा। यहीं भारी चूक हो गई, यदि रात्रि में आक्रमण होता तो इतिहास कुछ और ही होना था।

नर्रई के घमासान युद्ध और स्व के लिए वीरांगना का प्राणोत्सर्ग

अंततः वीरांगना ने नर्रई की ओर कूच किया। 23 जून 1564 को नर्रई में प्रथम मुठभेड़ हुई, रानी और उनके सहयोगियों ने मुगलों की की दुर्गति कर डाली। आसफ खान सहित मुगल सेना भाग निकली और डरकर बरेला तक निकल गई। 23 जून की रात तक तोपखाना गौर नदी पार कर बरेला पहुंच गया। 23 जून की रात को घातक षड्यंत्र हुआ। आसफ खान ने रानी के एक छोटे सामंत बदन सिंह को घूस देकर मिला लिया। उसने रानी की रणनीति का खुलासा कर दिया कि कल युद्ध में रानी मुगलों को घने जंगलों की ओर खींचेगी जहाँ तोपखाना कारगर नहीं होगा और सब मारे जाएंगे।

आसफ खान डर गया उसने उपचार पूंछा, तब बदन सिंह ने बताया कि नर्रई नाला सूखा पड़ा है और उसके पास पहाड़ी सरोवर है जिसे यदि तोड़ दिया जाए तो पानी भर जाएगा और रानी नाला पार नहीं कर पाएगी और तोपों की मार सीधा पड़ेगी। उधर रात में रानी को अनहोनी का अंदेशा हुआ, उन्होंने सरदारों से रात में ही हमले का प्रस्ताव रखा पर सरदार नहीं माने। यदि मान जाते तो इतिहास कुछ और ही होता। अंततोगत्वा युद्ध की अंतिम घड़ी समीप आ ही गयी। 24 जून 1564 को प्रातः लगभग 10 बजे भयंकर मोर्चा खुल गया और घमासान युद्ध प्रारंभ हुआ पहले हल्ले में मुगलों के पांव उखड़ गए।

मुगलों ने 3 बार आक्रमण किये और तीनों बार गोंडों ने जमकर खदेड़ा, इसलिए मुगलों ने तोपखाना से मोर्चा खोल दिया। रानी दुर्गावती ने योजना अनुसार घने जंगलों की ओर बढ़ना प्रारंभ किया परंतु बदन सिंह की योजना अनुसार पहाड़ी सरोवर तोड़ दिया गया। नर्रई में बाढ़ जैसी स्थिति बन गयी, अब वीरांगना घिर गयी। इसी बीच अपरान्ह लगभग 3 बजे वीरनारायण के घायल होने की खबर आई परंतु वीरांगना रानी दुर्गावती तनिक भी विचलित नहीं हुई। आंख में तीर लगने के बाद भी युद्ध जारी रखा, मुगल सेना के बुरे हाल थे परंतु अचानक रानी को एक तीर गर्दन पर लगा रानी ने तीर तोड़ दिया। हाथी सरमन के महावत को अधार सिंह ने पीछे हटने का आदेश दिया,परंतु रानी समझ गयी थी कि अब वो नहीं बचेंगी! अत: आधार सिंह को उन्होंने स्वयं को मार देने का आदेश दिया परंतु आधार सिंह ने वीरांगना को मारने से मना कर दिया। वीरांगना रानी दुर्गावती, आधार सिंह से यह कहते हुए कि
“मृत्यु तो सभी को आती है आधार सिंह,
परंतु इतिहास उन्हें ही याद रखता है जो स्वाभिमान के साथ जिये और मरे”

इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर करेगा सुनवाई, निलंबन की मांग

वीरगति से पहले 150 से अधिक मुगल सैनिकों का वध किया

युद्ध के गोल में समा गयीं और लगभग 150 मुगल सैनिकों का वध करते हुए, भीषण युद्ध किया जब उनको मूर्छा आने लगी तो उन्होंने अपनी कटार से प्राणोत्सर्ग किया। वहीं सेनापति आधार सिंह के नेतृत्व में कल्याण सिंह बघेला,चक्रमाण कलचुरि और महारुख ब्राम्हण ने युद्ध जारी रखा और वीरांगना के पवित्र शरीर को सुरक्षित किया तथा युवराज वीर नारायण सिंह को रणभूमि से सुरक्षित भेज कर अपनी पूर्णाहुति दी। युवराज वीरनारायण सिंह ने वीरांगना रानी दुर्गावती का अंतिम संस्कार कर चौरागढ़ में सेनापति आधार सिंह के साथ मुगलों के विरुद्ध मोर्चा जमाया, जहाँ मुगलों के विरुद्ध चौरागढ़ ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया। जबलपुर के समीप बरेला, ग्राम पंचायत-पिपरिया खुर्द, बारहाग्राम में स्थित नर्रई की युद्ध भूमि में वीरांगना रानी दुर्गावती का समाधि स्थल है।

विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना रानी दुर्गावती का व्यक्तिव और कृतित्व सनातन धर्म में नारी शक्ति की मीमांसा का पर्याय है।यह शोध आलेख उन हिंदू वीरांगनाओं और समग्र नारियों को सादर समर्पित है,जो जीवन के संग्राम में स्व के लिए मां, बेटी, बहन, पत्नी के रुप में देश की रक्षा के लिए अनादि काल से पूर्णाहुति देती आ रही हैं और दे रहीं हैं जिनकी आस्था और समर्पण अटल है और उन्हें विपरीत परिस्थितियाँ भी हरा नहीं सकीं। हिन्दुओं में बेटी का जन्म एक परिवार, एक कुटुम्ब का जन्म है, इसलिए मातृशक्ति हिंदुत्व का मूलाधार है।एतदर्थ हिन्दू धर्म में एक बेटी का जन्म शक्ति के अवतार के रूप में शिरोधार्य किया जाता है, जिसे विश्व की श्रेष्ठतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने चरितार्थ किया है।कालजयी वीरांगना रानी दुर्गावती चिरकाल तक स्व के लिए आन -बान -शान और बलिदान की पराकाष्ठा का प्रतीक रहेंगी।

सामरिक दृष्टि से देखें तो वीरांगना रानी दुर्गावती ने न केवल अकबर की धमकियों और घमंड को चूर -चूर किया वरन् अकबर के दक्षिण भारत के अभियान को छिन्न-भिन्न करके रख दिया। यदि रानी दुर्गावती ने अकबर को कड़ी चुनौती नहीं दी होती तो, अकबर शीघ्र ही दक्षिण भारत में प्रवेश कर जाता और दक्षिण भारत भी मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया होता,परंतु रानी दुर्गावती के पराक्रम शौर्य और सबल प्रतिरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका।

Topics: वीरांगना रानी दुर्गावतीरानी दुर्गावतीगढ़ा कटंगागोंडवाना साम्राज्यनर्रई युद्धअकबर बनाम रानी दुर्गावती
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

रानी दुर्गावती के नाम पर होगा जबलपुर एयरपोर्ट का नाम, केन्द्र को भेजेंगे प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

महान वीरांगना रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती: स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालीं महान वीरांगना

ग्राम पटनाकला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अभय महाजन

‘पाश्चात्य के प्रभाव से युवा पीढ़ी को बचाएं’

रानी दुर्गावती की आत्मनिर्भर अर्थ नीति और जल प्रबंधन, विश्व के लिए आज भी मार्गदर्शी

राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की वीर गाथा आज भी लोकमानस में जीवंत है।

राजा शंकरशाह ने अंग्रेजों से कहा, “न धर्म बदलेंगे न पेंशन लेंगे,तोप के सामने बांधकर उड़ा दो”

वीरांगना रानी दुर्गावती

NCERT विवाद के बीच यह लेख पढ़ें : रानी दुर्गावती की बहादुरी, अकबर की तिलमिलाहट और गोंडवाना की गौरव गाथा

Load More

ताज़ा समाचार

कई बार मुस्लिम आक्रांताओं को युद्ध के मैदान में चटाई धूल

महानतम वीरांगना रानी दुर्गावती ने अकबर की धमकियां की धज्जियाँ उड़ा कर,हिंदू नारी का सामर्थ्य दिखाया

आज का  श्लोक : अपने काम को खुद संभालें, मिलेगी सफलता

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर करेगा सुनवाई, निलंबन की मांग

फ्लाईदुबई विमान हमला: को पायलट हम्माम अल हम्मामी ने हवा में ही बंद कर दिए थे जहाज के इंजन, क्रैश करना चाहता था विमान

यमन सरकार ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, ताइज में घेराबंदी

बैंकॉक में संस्कृत सम्मेलन में ज्योत्सना बंसल की पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया।

बैंकॉक में गूंजी भारतीय ज्ञान परंपरा: ‘तर्कन्यूमरो’ के जरिए ज्योत्स्ना बंसल ने वैश्विक मंच पर रचा इतिहास

लखनऊ में बाढ़ और राहत अभियान का जायजा लेते अधिकारी

लखनऊ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत अभियान, डीएम ने संभाली कमान

आदि रंगोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव का उत्सव बना उत्तराखंड आदि रंगोत्सव

Ashok Singhal Tribute Hukkeri Karnataka

“अशोक सिंहल का त्याग व सेवा पथ सदैव प्रेरणादायी”: कर्नाटक के हुकेरी में संतों के सानिध्य में गूंजा रामभक्ति का संदेश

भारतीय रेलवे (प्रतीकात्मक चित्र)

कुम्भ से पहले हरिद्वार को तीन नयी रेल सेवाएं, बांद्रा टर्मिनस–दिल्ली सराय रोहिल्ला गरीब रथ का हरिद्वार तक विस्तार

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies