पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का निर्यात हाल के हफ्तों में बढ़ गया है। यह लगभग उसी स्तर पर पहुंच गया है जो युद्ध शुरू होने से पहले था। इस अहम जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही जारी है, हालांकि यहां व्यापारिक जहाजों पर हमलों का सिलसिला चल रहा है।
हमले जारी और तेल निर्यात भी
एक पश्चिमी सुरक्षा अधिकारी ने गोपनीय आंकड़ों के हवाले से बताया कि अगस्त की शुरुआत से ईरान हर हफ्ते होर्मुज में करीब 30 ड्रोन और 10 एंटी-शिप मिसाइल हमले कर रहा है। पिछले 10 दिनों में कम से कम चार व्यापारिक जहाजों को नुकसान पहुंचा है। कई हमले अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका की भी बात कही जा रही है, क्योंकि दक्षिणी तट पर धमाके हो रहे हैं।
फिर भी तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों के जहाजों को अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा मिल रही है। कुछ जहाज ओमान के समुद्री क्षेत्र से अमेरिकी नौसेना द्वारा बताए गए रास्ते पर चल रहे हैं। कुछ जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद करके भी गुजरने की कोशिश की है।
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अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी
अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक क्षेत्र में तीसरा विमानवाहक पोत भेजा जा रहा है और करीब 10 हजार अतिरिक्त सैनिक भी तैनात किए जा रहे हैं। इससे खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और मजबूत होगी।
जी7 देशों का तेल जारी करने का फैसला
ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जी7 देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर चार महीने में 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। शुरुआती 20 दिनों में खास तौर पर डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में आने वाली है। जी7 के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए उठाया गया है।
अमेरिका में शुक्रवार को डीजल की औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। एएए के अनुसार 22 सितंबर को यह कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से गुजरने वाले टैंकरों को सुरक्षा मिलने से निर्यात फिर से बढ़ने लगा है, भले ही इलाके में हमलों का खतरा बना हुआ है।














