ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए एक 25 पेज का खुला पत्र जारी किया है। यह पत्र अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से करीब पांच हफ्ते पहले आया है। इसमें IRGC ने अमेरिकी वोटरों से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को खारिज करने और “भ्रष्ट राजनेताओं से नियंत्रण वापस लेने” की बात कही है। यह पत्र अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के सात महीने बाद जारी किया गया।
पत्र में क्या कहा गया
पत्र में साफ कहा गया है कि अमेरिकी आम लोग और उनकी सरकार अलग हैं। IRGC का तर्क है कि साधारण ईरानी और अमेरिकी दोनों ही महंगी जंगों के शिकार हैं। पत्र में वाशिंगटन से ईरान के प्रति नीति बदलने की मांग की गई है। इसमें अमेरिका के इजरायल के समर्थन और विदेशी सैन्य कार्रवाइयों का विरोध करने को कहा गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि अगर अमेरिकी नीति बदली तो वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व संभव है।
IRGC प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संघर्ष खत्म होने का एक ही रास्ता है कि वाशिंगटन हार माने और पीछे हटे। उन्होंने अमेरिकियों से अपने नेतृत्व पर दोबारा सोचने और ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाने की अपील की। उनका कहना था कि कई अमेरिकी नागरिक इन नीतियों के नुकसानों से अनजान हैं।
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परमाणु कार्यक्रम और युद्ध के लक्ष्य
पत्र में ट्रंप के युद्ध के औचित्य पर बार-बार सवाल उठाए गए हैं। खासकर उनके इस दावे पर कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम खतरा है और सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। तेहरान हमेशा से कहता रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता और उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम सिर्फ नागरिक कामों के लिए है। मोहेब्बी ने कहा, “दुश्मन (अमेरिका) जानता है कि ईरान परमाणु हथियारों के पीछे नहीं है।”
IRGC का दावा है कि अमेरिका और इजरायल अपने घोषित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए। पत्र के मुताबिक पहले लक्ष्य जैसे शासन परिवर्तन और ईरान का विभाजन पूरे नहीं हुए तो लक्ष्य बदलते रहे। इनमें ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण, उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा शामिल था। पत्र में ईरान को विजेता बताया गया है। इसमें दावा किया गया कि हजारों अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरानी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं हुए। साथ ही ईरानी बलों ने अमेरिकी सैन्य संपत्तियों और क्षेत्र के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया।
‘डेथ टू अमेरिका’ का मतलब
पत्र में ईरान के मशहूर नारे “डेथ टू अमेरिका” की भी व्याख्या की गई है। इसमें कहा गया कि यह नारा अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे राजनीतिक शासक वर्ग के खिलाफ है। पत्र में बार-बार आम अमेरिकियों और वाशिंगटन के नेताओं के बीच फर्क दिखाया गया है। इसमें कहा गया कि करदाता ही अमेरिकी जंगों का खर्च उठाते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समय
होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र भी पत्र और मोहेब्बी के बयान में खास है। उन्होंने अमेरिका के इस दावे को खारिज किया कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना प्रभाव खो दिया है। उनका कहना था कि कुछ जहाजों का आना-जाना मतलब यह नहीं कि जलमार्ग पूरी तरह खुला है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस रास्ते से तेल निर्यात पहले के मुकाबले काफी सुधर चुका है।
पत्र जारी होने का समय भी महत्वपूर्ण है। IRGC ने इसे अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के सबसे कमजोर पल के रूप में बताया। मोहेब्बी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं कि यह पत्र अमेरिकी प्रशासन का व्यवहार बदलेगा, लेकिन वोटर इसका संदेश सुन सकते हैं।

















