झारखंड में जनजातीय समुदाय बड़े पैमाने पर रहा है। बीते कुछ वर्षों के दौरान वहां क्रिश्चियन कन्वर्जन बढ़ा है। हालात तो ये है कि अब इन मिशनरियों ने सरकारी सिस्टम में भी सेंध लगाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में रांची की आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट डाला है। इसमें उन्होंने साफ कहा है कि वे सरकार की नौकरी कर रही हैं और किसी मिशनरी की दलाली नहीं कर रही हैं।
निशा उरांव का बयान
निशा उरांव ने लिखा कि जो सरना जनजातीय बिकाऊ नहीं होते, वे मिशनरियों और वैटिकन-वासियों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। उन्होंने आगे बताया कि मिशनरी की दलाली न करने की वजह से ही वे वैटिकन वासियों की बड़ी सिरदर्द बन गई हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में इसे धर्म युद्ध करार दिया। उन्होंने कहा कि हम नुकसान और अपमान सहेंगे, लेकिन बिकेंगे नहीं और न ही हार मानेंगे।

अपनी पहचान पर जोर
निशा उरांव ने यह भी लिखा कि आईआरएस या कमिश्नर का पद उनकी असली पहचान नहीं है। उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे सरना जनजातीय समाज की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि इस धर्म युद्ध में धर्म की जीत होगी और अधर्म की हार। गौरतलब है कि निशा उरांव, आईआरएस अधिकारी हैं और उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ये बातें साझा की हैं।

















