नीरजा भनोट से स्मित मच्छार तक, भारतीयों की शूरवीरता की कायल दुनिया
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नीरजा भनोट से स्मित मच्छार तक, भारतीयों की शूरवीरता की कायल दुनिया

आज से लगभग चालीस साल पहले हुई इसी तरह की घटना की याद दिलवा दी है जब एक अन्य हिंदू विरांगना नीरजा भनोट ने अपनी जान दे कर जहाज में सवार कई दर्जन यात्रियों की जान बचाई थी।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by Mahak Singh
Oct 1, 2026, 03:29 pm IST
inभारत

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को जहां आज पूरी दुनिया सलाम कर रही है वहीं इस घटना ने आज से लगभग चालीस साल पहले हुई इसी तरह की घटना की याद दिलवा दी है जब एक अन्य हिंदू विरांगना नीरजा भनोट ने अपनी जान दे कर जहाज में सवार कई दर्जन यात्रियों की जान बचाई थी। आज पूरी दुनिया हिन्दुओं की इसी बहादुरी व कर्तव्यपरायणता को सलाम कर रही है। कल बुधवार 30 सितम्बर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड-1073 में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कॉकपिट के अंदर दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। घटना के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा। विमान ने बेहद कम समय में हजारों फीट की ऊंचाई खो दी। स्थिति बिगड़ती देख यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने कॉकपिट तक पहुंचने की कोशिश की। घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिससे अंदर मौजूद हमलावर को काबू करने का रास्ता बना।

बहादुरी से टला बड़ा विमान हादसा

इसके बाद इस्राइली यात्री यानिव हयून कॉकपिट के अंदर पहुंचे, हयून ने हमलावर को पीछे से पकडक़र नियंत्रण से दूर किया और पायलट की सीट पर पहुंचकर विमान को संभालने में मदद की। इस तरह स्मित मच्छार ने जहाज में सवार 174 लोगों की जान बचाई, जिनमें अधिकतर इस्राइली नागरिक थे। विमान को क्रैश करने की कोशिश करने वाला को-पायलट ओमान का निवासी था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया भर के बड़े नेताओं ने इस हिन्दू सपूत की बहादुरी की प्रशंसा की है। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस को ‘अविस्वसनीय’ बताया। उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने जिस तरह स्थिति का सामना किया, उसने यात्रियों और चालक दल को हस्तक्षेप का मौका दिया। पीएम मोदी ने उन्हें ‘हीरो’ बताते हुए कहा कि उनके साहस ने सैकड़ों लोगों की जान बचाने और एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। डोनाल्ड ट्रंप ने भी घटना को लेकर कैप्टन मच्छार और यात्री यानिव हयून की तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पायलट ने दरवाजा खोलकर अहम भूमिका निभाई। वैसे इस घटना का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है परंतु समझा जा रहा है कि अगर दुर्घटना हो जाती तो यह अमेरिका के ट्विन टावरों पर हुए आतंकी घटना का ही दूसरा रूप होती, संभव है इसके बाद इस्राईल की भी सैनिक प्रक्रिया होती और दुनिया में शांति व्यवस्था को नया खतरा पैदा हो जाता, जो पहले ही इरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते संकट में चली आ रही है। स्मित मच्छार की बहादुरी ने न केवल पौने दो सौ लोगों का जीवन बचाया बल्कि दुनिया को भी एक बड़े संकट से बचा लिया।

नीरजा भनोट की वीरगाथा फिर हुई याद

कल 30 सितम्बर को हुई इस घटना ने एक और हिन्दू विरांगना नीरजा भनोट का पुण्य स्मरण करवा दिया है जो इसी तरह की घटना में शहीद हुई थीं परंतु जीवन के अंतिम क्षण तक अपहृत जहाज के यात्रियों की सुरक्षा के लिए आतंकियों से लड़ती रहीं। उनकी बहादुरी को देख कर पाकिस्तान ने भी उन्हें तमगा-ए-इंसानियत पुरस्कार से सम्मानित किया। 5 सितंबर 1986 की सुबह कराची का जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पैन अमेरिकन वल्र्ड की फ्लाइट 73 मुंबई से न्यूयॉर्क के सफर पर थी और कराची उसका एक पड़ाव था। विमान में करीब 360 यात्री और 19 क्रू सदस्य मौजूद थे। लेकिन अचानक विमान में चार हथियारबंद आतंकी घुस आए और उन्होंने फ्लाइट को हाईजैक कर लिया। उस समय विमान की सीनियर फ्लाइट पर्सर थीं 22 साल की नीरजा भनोट। हालात बेहद खतरनाक थे, लेकिन नीरजा ने घबराने के बजाय तुरंत समझ लिया कि यात्रियों को बचाने के लिए क्या करना जरूरी है। उन्होंने कॉकपिट तक हाईजैक का संकेत पहुंचाया। इसकी वजह से पायलट और दूसरे कॉकपिट क्रू सदस्य विमान से बाहर निकलने में कामयाब रहे जिससे विमान के उड़ान भरने की संभावना खत्म हो गई और आतंकवादी अंदर फंस गए यात्रियों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करने लगे।

आतंकवादियों की नजर अमेरिकी यात्रियों पर थी। नीरजा ने अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छिपाने शुरू कर दिए। पासपोर्ट कूड़ेदान में डाल दिए गए, ताकि आतंकवादियों को यह पता न चल सके कि विमान में कौन-कौन से अमेरिकी नागरिक मौजूद हैं। करीब 17 घंटे तक विमान जमीन पर खड़ा रहा। जब विमान की बिजली चली गई, तो स्थिति अचानक और ज्यादा खतरनाक हो गई। अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। अफरा-तफरी के बीच नीरजा ने इमरजेंसी गेट खोल दिया। उनके सामने मौका था कि वह खुद सबसे पहले विमान से बाहर निकल जाएं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यात्रियों को बाहर निकलने में मदद करना शुरू किया। नीरजा ने बच्चों समेत कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की। इसी दौरान वह आतंकवादियों की गोली का निशाना बन गईं। तीन बच्चों को बचाने की कोशिश करते हुए उन्हें गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल नीरजा को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना में 20 लोगों की मौत हुई. हालांकि, नीरजा की सूझबूझ और साहस के कारण सैकड़ों यात्री सुरक्षित बच पाए।

नीरजा के साहस की फिर गूंज

नीरजा भनोट की बहादुरी को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सम्मान मिला। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। पाकिस्तान ने भी उनकी बहादुरी को मान्यता देते हुए उन्हें ‘तमगा-ए-इंसानियत’ से सम्मानित किया। अमेरिका में भी उनकी बहादुरी के लिए उन्हें कई सम्मान मिले। बाद के वर्षों में उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया और मुंबई में एक चौक का नाम भी उनके नाम पर रखा गया। आज स्मित मच्छार ने नीरजा भनोट की उसी बहादुरी की पुन: स्मृति करवा दी है और दुनिया हिन्दुओं की शूरवीरता व कर्तव्यपरायणता को सलाम कर रही है।

Topics: Indian pilotSmit MachharFlydubai FZ-1073Neerja Bhanot braveryIndian braveryplane crashDubai-Tel Aviv flightisraelplane hijackaircraft safetyAshok ChakraNeerja Bhanot
राकेश सैन
राकेश सैन
वरिष्ठ पत्रकार। पंजाब के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन। [Read more]
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