पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में कथित दुष्कर्म की अफवाह के बाद हुई हिंसा और आगजनी के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस से घटना की वास्तविकता स्पष्ट करने को कहा है। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि 26 सितंबर को इंटरनेट मीडिया मंच रेडिट पर जिस कथित दुष्कर्म की घटना की जानकारी प्रसारित हुई थी, वह वास्तव में हुई थी या नहीं।
पुलिस बताए, घटना की पुष्टि के लिए क्या किया
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने बुधवार को एलपीयू के छात्र रवि राज की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब पुलिस से कहा कि वह यह स्पष्ट करे कि विश्वविद्यालय परिसर में कथित दुष्कर्म की घटना हुई थी या नहीं। अदालत ने पुलिस को यह भी बताने को कहा कि घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
पुलिस ने पोस्ट हटाने के लिए क्या कार्रवाई की
अदालत ने कहा कि यदि जांच में ऐसी कोई घटना नहीं हुई पाई जाती है तो पुलिस यह भी बताए कि अफवाह फैलाने वाले रेडिट पोस्ट को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
रेडिट पर अफवाह के बाद भडक़ी थी हिंसा
एलपीयू परिसर में 26 सितंबर की रात कथित दुष्कर्म की सूचना इंटरनेट मीडिया पर फैलने के बाद बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए थे। इसके बाद विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। परिसर में तोडफ़ोड़, आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। विश्वविद्यालय ने 28 सितंबर से दस दिनों के लिए कक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर दी थीं। पुलिस ने कथित दुष्कर्म के आरोपों की जांच के लिए मामला दर्ज किया है, लेकिन अभी तक यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि ऐसी घटना वास्तव में हुई थी। पुलिस कथित घटना के साथ-साथ उस रेडिट पोस्ट के स्रोत की भी जांच कर रही है, जिसके बाद अफवाह तेजी से फैली थी।
सीबीआई जांच की मांग
याचिकाकर्ता छात्र रवि राज ने परिसर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव चोपड़ा ने दलील दी कि पुलिस को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित दावे के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। वहीं, पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल के. सिंगला ने अदालत को बताया कि पुलिस रेडिट से संपर्क कर पोस्ट के स्रोत का पता लगाने का प्रयास कर रही है। अदालत ने परिसर में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।
पूर्व छात्र मोहम्मद फरहत देव पर गुंडों को बुलाकर तोडफ़ोड़ करवाने का आरोप
एलपीयू में हुई हिंसा के मामले में यूनिवर्सिटी के छात्र और कुछ पूर्व छात्र भी रडार पर हैं। ये लोग भी विद्यार्थियों को भडक़ाने, तोडफ़ोड़ व लूटपाट करने की साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी की राम्या मिश्रा नाम की एक छात्रा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में एक सीसीटीवी फुटेज का वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि खुद को इन्फ्लुएंसर होने का दावा करने वाला यूनिवर्सिटी का पूर्व छात्र फरहत देव इस साजिश में शामिल है। फुटेज में दिख रहा है कि 27 सितंबर यानी रविवार की रात को एक युवक छात्र कल्याण विभाग (डीएसडब्लयू) में दाखिल होता है, जिसका नाम फरहत देव है। अंदर आकर वह बाहर लोगों (गुंडों) को इशारा करके अंदर बुलाता है। एक युवक अंदर आकर सबसे पहले कैमरे को डंडे से तोड़ता है। वीडियो में मुंह ढके कुछ युवकों के हाथों में तेजधार हथियार दिख रहे हैं।
कौन है मोहम्मद फरहत
पुलिस ऐसे करीब आठ से दस संदिग्ध युवकों की पहचान करने में जुटी है। उसका नाम मोहम्मद फरहत है। (इंस्टाग्राम अकाउंट नाम फरहत देव) मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ का रहने वाला है। वह एलपीयू का पूर्व छात्र है। छात्रा राम्या ने एक और दावा किया कि यह पूर्व छात्र धरने के लिए और तोडफोड़ करने के दौरान अलग-अलग कपड़े पहनकर आया था।
मुझे एक वीडियो के आधार पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा : फरहत
मोहम्मद फरहत ने इंटरनेट मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसे उन घटनाओं के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जिनमें उसकी कोई भूमिका नहीं थी। वह मौके पर मौजूद था, लेकिन उसने लोगों को तोडफ़ोड़ करने से रोकने की कोशिश की। वह डीएसडब्ल्यू के अंदर गया था, लेकिन इसके बाद साहिल नाम के व्यक्ति के बुलाने पर बाहर आ गया। बाद में वह लोगों से तोडफ़ोड़ रोकने और शांत रहने के लिए कह रहा था। उसने दावा किया कि उसके पास ऐसे वीडियो हैं, जिनसे उसकी ओर से किए गए प्रयासों का पूरा संदर्भ सामने आ सकता है। जहां उसकी गलती होगी, वह उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है।
पुलिस फुटेज व वीडियो से कर रही पहचान
हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए पुलिस एलपीयू के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और इंटरनेट मीडिया पर शेयर वीडियो को भी खंगाल रही है। पुलिस का फोकस उन लोगों की पहचान पर है, जो वीडियो में चेहरे ढककर परिसर में घूमते या हथियार लेकर दिखाई दे रहे हैं।















