’जब आपकी कोई विचारधारा होती है… तो हमें नहीं पता कि वह किस रूप में सामने आएगी… हर पापी का भविष्य होता है… लोग कहते हैं कि एक व्यक्ति की हत्या करो तो तुम हत्यारे हो और लोगों की हत्या करो तो विजेता। यही फर्क है। हो सकता है कि वह (खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह हवारा) शांत हो जाए और बदल जाए, लेकिन उसके बाद कौन-सी बात उसे उकसा सकती है, यह हम नहीं कह सकते।’
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री शहीद बेअंत सिंह के हत्यारे खालिस्तानी आतंकवादी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर की। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर खुफिया ब्यूरो (आईबी) से राय ले। हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरण की मांग की है। बब्बर खालसा का उग्रवादी हवारा 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। शीर्ष अदालत ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
न्यायालय ने कहा यह संवेदनशील मामला
जस्टिस एमएम सुंदरश और पीबी वराले की पीठ ने कहा कि ये संवेदनशील मामले हैं और वह राज्य सरकार की सलाह के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया कि हवारा जेल से फरार होने की घटना में शामिल था और हत्या के मामले में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया था।
आतंकी के फरार होने की आशंका जताई
भाटी ने कहा कि स्थानांतरण से उसके फरार होने की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने उच्च जोखिम वाले कैदियों के स्थानांतरण पर गृह मंत्रालय की सलाह का हवाला दिया। उन्होंने पंजाब सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख किया और कहा कि हवारा को स्थानांतरित करने से पंजाब की कानून-व्यवस्था प्रभावित होगी। भाटी ने कहा कि चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के मामले में हवारा को दोषी ठहराया गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन, दिल्ली और पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किए थे। हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इस विस्फोट में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।
स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं, रिहाई की नहीं
हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कालिन गोंसाल्विस ने कहा कि मुख्यमंत्री की हत्या 31 साल पहले हुई थी, जब हवारा महज 21 साल का था। गोंसाल्विस ने कहा,उसकी मां बहुत बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र 82 साल है और उनकी हालत गंभीर है। वह पंजाब की उच्च सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं, रिहाई की नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जेल में हवारा का आचरण बेदाग रहा है।
जेल तोड़ चुका है आतंकी हवारा
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि हवारा जेल ब्रेक की घटना में शामिल था और इस हत्या के मामले में उसकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। यह तर्क देते हुए कि स्थानांतरण से उसके भागने की संभावना बढ़ सकती है, भाटी ने उच्च जोखिम वाले कैदियों के स्थानांतरण पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक एडवाइजरी का हवाला दिया। उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा दायर एक हलफनामे का भी संदर्भ दिया और कहा कि यदि उसे स्थानांतरित किया जाता है तो पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होगी। भाटी ने यह भी कहा कि हवारा को चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की
जब आपकी कोई विचारधारा होती है.. तो हम नहीं जानते कि यह कैसे बाहर आएगी… हर पापी का एक भविष्य होता है.. देखिए, लोग कहते हैं कि यदि आप एक व्यक्ति की हत्या करते हैं तो आप हत्यारे हैं और यदि आप 1,000 लोगों की हत्या करते हैं तो आप विजेता हैं। तो यही अंतर है। वह (हवारा) शायद शांत हो गया हो और बदला हुआ इंसान बन गया हो, लेकिन उसके बाद क्या चीज उसे भडक़ा दे, यह हम नहीं कह सकते।
शीर्ष अदालत ने इसके बाद मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
पूर्व सीएम की हुई थी हत्या
पिछले साल 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली व पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किया था। हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित नागरिक सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से जुड़े मामले में ताउम्र कैद की सजा काट रहा है, जिसमें बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में हवारा का व्यवहार 22 जनवरी 2004 की जेल ब्रेक घटना को छोडक़र निष्कलंक रहा है, जब वह भाग गया था और बाद में उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। याचिका में कहा गया है कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।
2004 जेल ब्रेक कांड में भी आया नाम
हवारा, परमजीत सिंह भियोरा, तारा और हत्या के दोषी देवी सिंह जनवरी 2004 में लगभग 100 फीट लंबी सुरंग खोदकर चंडीगढ़ की उच्च सुरक्षा वाली बुरैल जेल से भाग गए थे। हवारा और भियोरा को अगले दो वर्षों के भीतर फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में भगोड़ा घोषित तारा को थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था, जबकि देवी सिंह फरार है और उसे भी भगोड़ा घोषित किया गया है।
2007 में सुनाई गई थी मौत की सजा
मार्च 2007 में एक ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में हवारा को मौत की सजा सुनाई थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में उसकी सजा को उम्रकैद में बदलते हुए निर्देश दिया था कि उसे शेष जीवन तक जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। हवारा की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उसके साथ-साथ अभियोजन पक्ष द्वारा दायर की गई अपीलें भी शीर्ष अदालत में लंबित हैं।
















