रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के आगरा में सोनकर समाज के ‘गर्जना सम्मेलन’ में शामिल हुए। सम्मेलन में स्वागत के दौरान सोनकर समाज की ओर से राजनाथ सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया। इस सम्मान को स्वीकार करने के पश्चात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चांदी का मुकुट वापस लौटाते हुए कहा कि चांदी का यह मुकुट मैं आपके हवाले करता हूं। किसी गरीब मां-बाप की बेटी शादी के बाद विदा हो रही हो और उसके पैरों में चांदी की पायल न हो, तो इस मुकुट को तुड़वाकर उसके लिए पायल बनवाकर दे देना।
समाज को बंटने नहीं देंगे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज को भड़काने का प्रयास करते हैं। कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर समाज में दरार पैदा करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन हमारा संकल्प है कि हम किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और समाज को बंटने नहीं देंगे। समाज में प्रेम हो, सहयोग हो और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। ‘याद रखिए, टूटने से बिखरेंगे और जुड़ने से निखरेंगे।’
धर्म और राष्ट्र की रक्षा करना हमारा कर्तव्य
उन्होंने कहा कि सनातन और हिंदू धर्म को केवल जाति के चश्मे से देखने वाले लोग उसके मूल भाव को समझ नहीं पाते हैं। हमारी व्यवस्था कर्म आधारित है। इसमें एक ही व्यक्ति के कई कर्तव्य हो सकते हैं और कई लोगों का एक ही कर्तव्य हो सकता है। वह साझा कर्तव्य धर्म की रक्षा करना और राष्ट्र की रक्षा करना है। सोनकर समाज ने लंबे समय तक अत्याचार सहे, लेकिन धर्म और आस्था को नहीं छोड़ा। समाज ने अत्याचार सहे, लेकिन कन्वर्जन नहीं किया। यह उसके धैर्य, संघर्ष और अपनी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

















