सॉल्टिलो (मेक्सिको)। भारतीय तीरंदाज धीरज बोम्मदेवरा (25) ने तीरंदाजी विश्वकप फाइनल 2026 में पुरुषों का व्यक्तिगत खिताब जीत लिया है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय पुरुष हैं। आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने उन्हें बधाई दी है।
शूट-ऑफ तक पहुंचा रोमांचक मुकाबला
धीरज ने खिताबी मुकाबले में जापान के नाकानीशी जुन्या को 6-5 से मात दी। बेहद रोमांचक मुकाबले में मैच का फैसला ‘शूट-ऑफ’ के जरिए हुआ। धीरज ने धैर्य बनाए रखा और निर्णायक तीर पर सटीक 10 अंक हासिल किए, जबकि जुन्या केवल 9 अंक ही बना पाए।
19 साल बाद दोहराया इतिहास
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ धीरज विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत खिताब जीतने वाले केवल दूसरे भारतीय तीरंदाज बन गए हैं। उनसे पहले 2007 में डोला बनर्जी ने दुबई में महिला रिकर्व श्रेणी का खिताब जीता था। उसके बाद पिछले 19 वर्षों में कोई भी भारतीय यह कारनामा नहीं कर सका था।
ओलंपिक पदक विजेताओं को दी मात
टूर्नामेंट में भारत के इकलौते प्रतिनिधि धीरज ने 8 खिलाड़ियों के इस ड्रॉ में शानदार प्रदर्शन किया:
क्वार्टर फाइनल: तुर्की के ओलंपिक पदक विजेता बर्किम ट्यूमर को 7-1 से हराया।
सेमीफाइनल: फ्रांस के दो बार के ओलंपिक रजत पदक विजेता जीन-चार्ल्स वालाडोंट को 7-1 से करारी शिकस्त दी।
फाइनल में मुकाबला बेहद कांटे का रहा
- पहला सेट 28-28 की बराबरी पर छूटा
- दूसरा सेट जापानी तीरंदाज ने 29-28 से जीता
- तीसरे सेट में धीरज ने 29-28 से वापसी की
- चौथे सेट में जुन्या ने 30-28 से बढ़त बनाई
- पांचवें सेट में करो या मरो के मुकाबले में धीरज ने 28-27 से जीत दर्ज कर मैच 5-5 से बराबर किया और फिर शूट-ऑफ में 10 का निशाना लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
शानदार रहा 2026 का सीजन
धीरज ने अंटाल्या में तीसरे विश्व कप चरण में पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व का खिताब जीतकर इस फाइनल टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई किया था। इससे पहले उन्होंने 2023 और 2024 के विश्व कप फाइनल में भी भाग लिया था, लेकिन तब खाली हाथ लौटना पड़ा था। इस बार उन्होंने मेक्सिको में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय रिकर्व तीरंदाजी में नया अध्याय लिख दिया है।
पवन कल्याण ने दी बधाई
आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने धीरज को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के रहने वाले धीरज ने कम उम्र में ही आर्चरी का सफर शुरू किया था और अब वह इस खेल में शिखर पर पहुंच गए हैं, साथ ही ग्लोबल स्टेज पर शान से तिरंगा लहरा रहे हैं। यह भारतीय आर्चरी के लिए एक ऐतिहासिक पल है और हमारे एथलीटों के टैलेंट, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का सबूत है। धीरज ने भारत का मान बढ़ाया है और भारतीय खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है।

















