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चिन्मय कृष्ण दास को मिली सिर्फ 5 घंटे की पैरोल, मां के अंतिम संस्कार में हुए शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक, चिन्मय के भाई की अर्जी के बाद चटग्राम जिले के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया ने उन्हें पांच घंटे की पैरोल मंजूर की। इस दौरान चिन्मय अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

Published by
Mahak Singh

बांग्लादेश में हिंदू अधिकारों की आवाज उठाने वाले चिन्मय कृष्ण दास एक बार फिर सुर्खियों में हैं। करीब दो साल से जेल में बंद चिन्मय को अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सिर्फ पांच घंटे की पैरोल मिली। मां के निधन की खबर के बाद परिवार ने उनसे आखिरी बार मिलने और अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें कुछ घंटों के लिए जेल से बाहर आने की इजाजत दी। चिन्मय कृष्ण दास की मां संध्या रानी धर लंबे समय से बीमार चल रही थीं। बताया गया है कि वह कैंसर से पीड़ित थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार सुबह उनका निधन हो गया। मां की तबीयत खराब होने के दौरान परिवार की इच्छा थी कि चिन्मय उनसे मिल सकें, लेकिन जेल में होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। मां के निधन के बाद परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए पैरोल की मांग की।

रिपोर्ट के मुताबिक, चिन्मय के भाई की अर्जी के बाद चटग्राम जिले के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया ने उन्हें पांच घंटे की पैरोल मंजूर की। इस दौरान चिन्मय अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। लंबे समय बाद जेल से बाहर आए चिन्मय के लिए यह बेहद भावुक पल था। उन्होंने अपनी मां को अंतिम विदाई दी और इसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना पड़ा।

छह मामलों में चल रही है कानूनी कार्रवाई

चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ बांग्लादेश में छह आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें राजद्रोह, हत्या, हत्या की कोशिश और तोड़फोड़ जैसे आरोप शामिल हैं। उन्हें नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से उनका मामला लगातार चर्चा में रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चार मामलों में उन्हें हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन राजद्रोह के मामले में उनकी जमानत पर रोक है। वहीं, हत्या से जुड़े एक मामले की सुनवाई चटग्राम स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में चल रही है। चिन्मय की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठे। उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं। फिलहाल उनकी कानूनी लड़ाई जारी है और अब सभी की नजर आगे होने वाली अदालती सुनवाई पर है।

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