बांग्लादेश के प्रसिद्ध ISCKON संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश की अदालत ने एक मामले में जमानत दे दी है। लेकिन अभी भी वे जेल में ही हैं क्योंकि उनके खिलाफ कई अन्य मामले चल रहे हैं। वे अब एक हिंदू आध्यात्मिक नेता और बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रवक्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनकी उम्र करीब 38-40 साल के आसपास बताई जाती है। वे चट्टोग्राम के सतकानिया उपजिला के रहने वाले हैं।
पिछले साल हुई थी गिरफ्तारी
चिन्मय कृष्ण दास को पिछले साल नवंबर 2024 में ढाका एयरपोर्ट से उन्हें सेडिशन (देशद्रोह) के आरोप में पकड़ा गया। आरोप था कि उन्होंने अक्टूबर में चट्टोग्राम में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान किया था। इसके बाद चट्टोग्राम की एक अदालत में उन्हें पेश किया गया, जहां जमानत की अर्जी खारिज हो गई और उन्हें जेल भेज दिया गया था।
उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने चट्टोग्राम और ढाका समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किए। चट्टोग्राम में ये प्रदर्शन हिंसक हो गए। 26 नवंबर 2024 को वहां एक जूनियर सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या हो गई। भीड़ ने कथित तौर पर उन पर हमला किया। इस हत्या के मामले में चिन्मय कृष्ण दास पर भी आरोप लगे। बाद में उन्हें इस मामले में दिखाया गया और चार्जशीट में शामिल किया गया।
उनके खिलाफ चल रहे कुल छह मामले
उनके खिलाफ कुल छह मामले चल रहे हैं। इनमें से एक हत्या का मामला भी है। 2023 में एक पुराना मामला भी दर्ज था, जिसमें मेखाल इलाके (चट्टोग्राम) में ज़मीन हड़पने, धमकाने और मारपीट के आरोप थे। इस मामले में शिकायतकर्ता मीर मोहम्मद हेलाल उद्दीन (वर्तमान हिल ट्रैक्ट्स एंड लैंड राज्य मंत्री) और उनके पिता पूर्व मंत्री मीर मोहम्मद नासिर उद्दीन थे। आरोप चिन्मय कृष्ण दास और पांच अन्य लोगों पर लगे थे।
हाल ही में, गुरुवार को चट्टोग्राम की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज शाखावत हुसैन ने इस 2023 वाले मामले में सुनवाई के बाद चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी। उनकी तरफ से वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कोर्ट में दलीलें दीं। जमानत मिलने के बावजूद वे अभी रिहा नहीं हुए हैं, क्योंकि बाकी बचे मामलों में उन्हें हिरासत में रखा गया है। ये घटनाएं बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और सनातनी संगठनों से जुड़ी चर्चाओं के बीच हुई हैं। चिन्मय दास को कई बार जमानत की अर्जी लगानी पड़ी। हाईकोर्ट ने सेडिशन मामले में भी पहले जमानत दी थी, लेकिन कुछ समय बाद उसे स्टे कर दिया गया था। बाद में नए-नए केस में उन्हें दिखाया जाता रहा।

















