दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS का नाम लगातार चर्चा में रहता है। भारत के लिए भी यह समूह काफी महत्वपूर्ण है। साल 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में आर्थिक विकास, तकनीक, सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। आज BRICS सिर्फ कुछ देशों का छोटा समूह नहीं है। इसके 11 पूर्ण सदस्य देश हैं और 10 पार्टनर देश भी इससे जुड़े हुए हैं। इन देशों की आबादी और अर्थव्यवस्था को मिलाकर देखा जाए तो BRICS का दुनिया पर काफी बड़ा प्रभाव है।
BRICS क्या है?
BRICS दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक सहयोगी मंच है। इसमें शामिल देश व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, वित्त और विकास जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं। BRICS कोई संयुक्त राष्ट्र या विश्व बैंक जैसी औपचारिक संस्था नहीं है। इसके बावजूद सदस्य देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर चर्चा करते हैं और अपनी साझा राय रखने की कोशिश करते हैं। इसे विकासशील देशों यानी Global South की आवाज मजबूत करने वाला मंच भी माना जाता है।
BRIC नाम कैसे पड़ा?
BRICS की शुरुआत BRIC से हुई थी। साल 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इन चारों देशों के नाम के पहले अक्षरों से BRIC शब्द बनाया गया। उस समय यह कोई संगठन नहीं था, बल्कि एक आर्थिक विचार था। बाद में इन देशों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ने लगा। साल 2006 में चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ।
BRIC से BRICS कैसे बना?
साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल किया गया। उसने 2011 में पहली बार BRICS सम्मेलन में हिस्सा लिया। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRIC का नाम बदलकर BRICS हो गया। कई वर्षों तक इसमें केवल पांच देश थे- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इसके बाद 2024 में BRICS का बड़ा विस्तार हुआ। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें शामिल किया गया। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी BRICS का पूर्ण सदस्य बन गया। इस तरह अब इसमें कुल 11 सदस्य देश हैं।
भारत के लिए BRICS क्यों जरूरी है?
भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है। इस मंच के जरिए भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ा सकता है। साथ ही, वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की ज्यादा भागीदारी की मांग को भी मजबूती से उठा सकता है। 2026 में भारत की अध्यक्षता में BRICS की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया व्यापार तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्ष जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इसलिए नई दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उभरते देशों की बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
BRICS के 11 सदस्य देश
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- इंडोनेशिया

















